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विक्रम कोठारी की कहानी, जिनके ऊपर बैंक से ₹ 3,700 करोड़ के घपले का आरोप है

बैंकों से हज़ारों करोड़ के गबन के आरोपी रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी को CBI ने गिरफ्तार कर लिया है. कोठारी का मामला तब सामने आया था, जब नीरव मोदी के PNB के ज़रिए 11,345 करोड़ के घोटाले का शोर चरम पर था. शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक विक्रम कोठारी पर पांच बैंकों का करीब 5,000 करोड़ रुपए का कर्ज बकाया है. हालांकि, CBI ने अभी कोठारी को 3,700 करोड़ रुपए के गबन के आरोप में गिरफ्तार किया है. CBI ने विक्रम के बेटे राहुल कोठारी को भी अरेस्ट किया है. इन दोनों को पिछले दिनों पूछताछ के लिए दिल्ली भी लाया गया था.

विक्रम और राहुल कोठारी पर CBI ने ये केस बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर दर्ज किया है. पूछताछ के अलावा CBI ने इस हफ्ते कोठारी के कानपुर वाले घर में छापेमारी भी की थी. सबूत जुटाने के लिए उन्नाव और कानपुर समेत यूपी के कई जिलों में छापेमारी की जा रही है. ED की जांच में छत्तीसगढ़ के एक कारोबारी का भी कोठारी के साथ नाम जुड़ा है. शुरुआती जांच में ये बात भी सामने आई है कि कोठारी ने जिस मकसद के लिए बैंकों से कर्ज लिया था, वो पैसा उन कामों में खर्च नहीं किया.

विक्रम कोठारी
विक्रम कोठारी

पिछले दिनों विक्रम कोठारी के बारे में कर्ज वापस न करने की नीयत से देश छोड़कर भागने की खबरें भी आई थीं. हालांकि, इसके बाद कोठारी की कंपनी रोटोमैक ने सफाई जारी की थी कि कोठारी भागे नहीं हैं और ऐसी खबरों से छवि खराब करने की कोशिश न की जाए.

कौन हैं विक्रम कोठारी

कोठारी पेन बनाने वाली कंपनी रोटोमैक के मालिक हैं, जिसका संबंध पान पराग से है. कोठारी के पिता मनसुख भाई कोठारी गुजराती परिवार से ताल्लुक रखते थे. उन्होंने अगस्त 1973 में पान मसाले का धंधा शुरू किया और अपने प्रॉडक्ट को नाम दिया, ‘पान पराग.’ साल 1983 से 1987 के बीच पान पराग विज्ञापन देने वाली सबसे बड़ी कंपनी के तौर पर सामने आई. फिर शम्मी कपूर के ‘बारातियों का स्वागत पान पराग से कीजिएगा’ वाले ऐड ने इसे न भूलने वाला प्रॉडक्ट बना दिया.

मनसुख कोठारी (बाएं) और पान पराग के विज्ञापन में शम्मी कपूर (दाएं)
मनसुख कोठारी (बाएं) और पान पराग के विज्ञापन में शम्मी कपूर (दाएं)

मनसुख भाई के दो बेटे हुए. दीपक और विक्रम कोठारी. पिता का धंधा इन्हीं दोनों के बीच बंटा. दीपक के हिस्से में आया पान पराग और विक्रम के हिस्से में आई पेन कंपनी रोटोमैक. विक्रम ने इसे चमकाने की खूब कोशिश की. सलमान खान जैसे स्टार को ब्रांड एंबैस्डर बनाकर प्रचार करवाया. इसी कंपनी के विस्तार के लिए कोठारी ने बैंकों से लोन लिया, लेकिन धंधा नहीं चला, तो वो बैंकों का पैसा नहीं चुका पाए. कोठारी ने कानपुर में बैंकों से अघाकर लोन लिया, उस पर दबाकर ब्याज चढ़ा, लेकिन अब बैंकों के पास कॉलर पकड़ने के लिए कोई नहीं है.

कोठारी ने किससे कितना कर्ज लिया

कोठारी कानपुर में रहते हैं/थे, जहां इनके कई घर हैं और ऑफिस है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कोठारी पर पांच सरकारी बैंकों का 5,000 करोड़ रुपए बकाया है. ये कर्ज इन्होंने 2010 में लेना शुरू किया था. यूनियन बैंक के स्थानीय मैनेजर के मुताबिक कोठारी ने पांच बैंकों से करीब तीन हज़ार करोड़ रुपए का लोन लिया था, जो 2018 तक ब्याज लगने के बाद 5,000 करोड़ रुपए हो गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक कोठारी पर अलग-अलग बैंकों का इतना बकाया है:

इंडियन ओवरसीज़ बैंक: 1400 करोड़
बैंक ऑफ इंडिया: 1395 करोड़
बैंक ऑफ बड़ौदा: 600 करोड़
यूनियन बैंक: 485 करोड़
इलाहाबाद बैंक: 352 करोड़

इसके अलावा कोठारी पर 600 करोड़ रुपए का एक चेक बाउंस होने का भी मामला है, जिसमें पुलिस इनकी तलाश कर रही है.

एक कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के साथ विक्रम कोठारी
एक कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी के साथ विक्रम कोठारी

कोठारी को बैंकों से इतना पैसा मिल कैसे गया

अब क्या ये भी आपको बताए जाने की ज़रूरत है. आम आदमी को बैंक से भले एक लाख रुपए का भी कर्ज न मिले, लेकिन ऐसे बड़े व्यवसायियों के साथ बैंक हमेशा कॉपरेट करते नज़र आते हैं. अभी तक की रिपोर्ट्स के मुताबित बैंकों ने कोठारी की संपत्ति को ज़्यादा करके आंका, जिससे उन्हें ज़्यादा लोन मिला. यानी कोठारी ने अपनी संपत्ति जितनी कीमत की दिखाई थी, वो उससे कहीं कम कीमत की है. कोठारी को अपने दिवंगत पिता मनसुख भाई कोठारी की साख का भी खूब फायदा हुआ.

क्या कोठारी वाकई देश छोड़कर भाग गए हैं?

ये बड़ा सवाल है. शुरुआत में इसके दो जवाब सामने आए. पहला कयास ये लगाया गया कि कोठारी कर्ज और गिरफ्तारी के डर से देश छोड़कर भाग गए हैं. कानपुर के कुछ स्थानीय लोगों ने कोठारी को सालभर से न देखने का दावा करके इस कयास को पुष्ट किया. लेकिन दूसरा जवाब आया कानपुर के मीडिया सोर्सेस से, जिनका कहना था कि कोठारी देश छोड़कर नहीं भागे हैं और उनका कानपुर आना-जाना रहता है.

विक्रम कोठारी की कंपनी रोटोमैक की तरफ से जारी किया गया लेटर
विक्रम कोठारी की कंपनी रोटोमैक की तरफ से जारी किया गया लेटर

हालांकि, कोठारी देश छोड़कर भागे हैं या नहीं, इस सवाल पर तब विराम लग गया, जब कोठारी के भयंकर चर्चित होने के बाद उनकी कंपनी रोटोमैक की तरफ से सफाई जारी की गई. रोटोमैक ने अपने बयान में कहा, ‘हमारे चेयरमैन के देश चोड़कर भागने की खबरें गलत हैं और उनकी छवि खराब कर रही हैं. विक्रम कोठारी कानपुर में ही हैं और बैंकों के साथ मामला सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं.’

सलमान खान के साथ विक्रम कोठारी
सलमान खान के साथ विक्रम कोठारी

कानपुर के मीडिया सूत्रों ने ये दावा भी किया था कि जनवरी में कोठारी को कर्ज देने वाले बैंकों की मीटिंग हुई थी, जिसमें कोठारी अपने बेटे राहुल के साथ आए और आश्वासन दिया कि वो कर्ज वापस करेंगे. बैंक कई बार कोठारी को पैसा चुकाने का नोटिस भेज चुके हैं.

बैंक क्या कह रहे हैं

यूनियन बैंक के ब्रांच मैनेजर पीके अवस्थी का कहना है, ‘रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी ने बैंक से 485 करोड़ रुपए का लोन लिया था, जिसे उन्होंने वापस नहीं किया. इसे देखते हुए NCNT के तहत उन पर कार्रवाई की जा रही है. इस प्रक्रिया में कोठारी की संपत्ति बेची जा सकती है.’ इलाहाबाद बैंक के ब्रांच मैनेजर राजेश गुप्ता का बयान है, ‘अगर विक्रम कोठारी लोन नहीं चुकाते हैं, तो उनकी संपत्ति बेचकर पैसे रिकवर किए जाएंगे.’

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कहने के अलावा बैंक कर क्या रहे हैं

बैंकों ने किया ये है कि कोठारी के कर्ज को NPA में डाल दिया. NPA यानी Non-performing Asset. इसे यूं समझिए कि जब कोई बैंक किसी को लोन देता है, तो वो लोन उस बैंक की संपत्ति होता है. मतलब बैंक इस उम्मीद से लोन देता है कि जो पैसा उसने दिया है, वो ब्याज समेत वापस आएगा. पर जब ये पैसा वापस नहीं आता, तो बैंक इसे अपनी ऐसी संपत्ति मान लेता है, जिससे उसे कोई फायदा नहीं हो रहा है. कर्ज के मामले में NPA वो पैसा होता है, जिसकी वसूली की उम्मीद खुद बैंक छोड़ चुका होता है.

जब कोई कारोबारी इतना भारी कर्ज लेकर फरार होता है, तो उसका नाम खराब होने के साथ-साथ सरकार पर भी सवाल उठता है कि क्यों सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया. क्या इन कारोबारियों के अंदर सरकार का कोई डर नहीं है कि वो पैसा लेकर भाग रहे हैं. पर सवाल बैंकों से भी होना चाहिए कि वो कैसे किसी की संपत्ति की जांच किए बिना उसे इतना भारी कर्ज दे देते हैं और फिर वसूली की बारी आने पर हाथ बांधकर खड़े हो जाते हैं. NPA वाले चोंचले से बैंकों की बैलेंसशीट भले मेनटेन हो जाए, पर किसी का तो पैसा लूटा ही जा रहा है.

सोर्स: स्लाइडशेयर
सोर्स: स्लाइडशेयर

और बैंक संपत्ति बेचने की जो बात कह रहे हैं, उसका क्या!

उसका ये कि इलाहाबाद बैंक ने कोठारी की तीन संपत्तियों की नीलामी के लिए 5 सितंबर 2017 की तारीख रखी थी. इसमें कानपुर में माल रोड की कोठी, सर्वोदय नगर के इंद्रधनुष अपार्टमेंट का फ्लैट और बिठूर का फार्म हाउस था. बैंक ने इन तीन संपत्तियों की कुल कीमत 17 करोड़ रुपए रखी थी, लेकिन कोठारी की रसूख और पहुंच के चलते बड़ी बोली लगी ही नहीं और संपत्ति नहीं बिकी.

दावा ये है कि इंडियन ओवरसीज़ बैंक कोठारी के 650 करोड़ के डिपॉज़िट (FDR) जब्त कर चुका है, जबकि कोठारी पर बैंक का कुल कर्ज 1,400 करोड़ रुपए का है. एक और महत्वपूर्ण बात ये भी कि जब कोठारी ने 2010 में इस बैंक से 150 करोड़ रुपए का लोन लिया था, तो 2018 तक कुल बकाया इतना कैसे बढ़ गया. कोठारी पर जितना कर्ज बकाया है, उसके मुकाबले बैंकों के पास कोठारी की मुश्किल से 20% संपत्ति है.

kothari

अधिकतर बैंक अधिकारी इसे घोटाला न बताकर NPA कह रहे हैं यानी वो कर्ज, जिसके वसूले जाने की संभावना खत्म हो चुकी है. वहीं अभी सिर्फ पांच बैंकों के बकाए की बात सामने आई है. आगे कितने खुलासे होंगे, पता नहीं.

कोठारी के दफ्तर का क्या हाल है

कानपुर की माल रोड पर सिटी सेंटर में रोटोमैक का जो ऑफिस है, वो पिछले कई दिनों से बंद है, ऐसा कानपुर के मीडिया सोर्सेस का दावा है. इन्हीं के मुताबिक रोटोमैक में मैनेजर लेवल पर काम करने वाले अधिकतर अधिकारी दो-ढाई महीने पहले नौकरी छोड़ चुके हैं. कुछ छोटे कर्मचारी औपचारिकता के लिए ऑफिस आते हैं, लेकिन कंपनी का कारोबार मंदा है.


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