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कानपुर : बदमाशों ने यूपी पुलिस पर किया AK47 से फ़ायर, 8 पुलिसकर्मी शहीद और 7 घायल

उत्तर प्रदेश के कानपुर में हिस्ट्रीशीटर बदमाश विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम और बदमाशों के बीच हुए मुठभेड़ में एक डीएसपी समेत 8 पुलिसवाले शहीद हो गए. इसके अलावा 7 पुलिसवालों को गंभीर रूप से ज़ख़्मी हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मुठभेड़ रात तक़रीबन 1 बजे कानपुर के शिवराजपुर इलाके में हुई. हालांकि उसके कुछ घंटों बाद मुठभेड़ वाली जगह से थोड़ी दूर एक और एनकाउंटर हुआ जिसमें यूपी पुलिस ने 3 अपराधियों को मार गिराया. यूपी पुलिस का कहना है कि ये वही अपराधी हैं जिन्होंने पुलिस टीम पर गोलियां चलाई थीं.

# कैसे हुआ ये सब?

कानपुर पुलिस को 25 हज़ार रुपए के इनामी बदमाश विकास दुबे की भनक लगी थी. विकास दुबे नाम को गिरफ़्तार करने के लिए कानपुर पुलिस ने दबिश दी थी. लेकिन टीम पर जबरदस्त फ़ायरिंग हो गई.विकास दुबे नाम के इस अपराधी के सहयोगियों ने पहले जेसीबी से टीम का रास्ता रोका. उसके बाद घर की छत और खिड़कियों से एक साथ पूरे गैंग ने पुलिस टीम पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं.

यूपी के डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी के अनुसार, पुलिस ने जवाबी फ़ायरिंग की. लेकिन बदमाश ऊंचाई से फ़ायरिंग कर रहे थे. और फ़ायरिंग में वही हुआ, जो हमने बताया. टीम के 8 पुलिसवाले शहीद हो गए. ANI के मुताबिक़, शहीदों में CO देवेंद्र कुमार मिश्रा, SO महेश यादव, चौकी इंचार्ज अनूप कुमार, SI नेबूलाल, सिपाही सुल्तान सिंह, राहुल, जितेंद्र और बबलू के नाम शामिल है.  7 घायल पुलिसकर्मियों में से दो पुलिसवालों के पेट में गोलियां लगी हैं, जिनकी हालत ज़्यादा गंभीर बताई जा रही है.

यूपी पुलिस ने उत्तर प्रदेश की सीमाओं को सील कर दिया है. 500 से ज़्यादा फ़ोन सर्विलांस पर हैं. गांव के लोगों से पूछताछ की जा रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस को सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं. मुठभेड़ के कुछ ही घंटों के भीतर यूपी पुलिस ने हमला करने वाले अपराधियों में से तीन को थोड़ी दूर पर ही मार गिराया. लखनऊ के आला अफ़सर कानपुर पहुंच रहे हैं.

इस घटना में ये भी ख़बर सूत्रों के हवाले से आ रही है कि कानपुर में AK47 से फ़ायरिंग हुई है. क्योंकि पुलिस को घटनास्थल से इसके खोखे भी मिले हैं.

# कौन है ये विकास दुबे?

विकास दुबे का पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है. ख़बरें बताती हैं कि विकास शुरुआत से ही अपराध की दुनिया में नाम बनाना चाहता था. छिटपुट अपराध थे, लेकिन साल 2001 में की गयी एक हत्या से विकास दुबे चर्चा में आया. उसने शिवली थाने में घुसकर दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री और भाजपा नेता संतोष शुक्ला की हत्या कर दी थी. हुआ यूं कि यूपी में 2001 में राजनाथ सिंह वाली भाजपा सरकार आई. संतोष शुक्ला और विकास में अनबन रहती थी. कहते हैं कि संतोष शुक्ला ने सत्ताधारी दल से जुड़ा होने के कारण विकास दुबे को मरवा देने की धौंस भी दिखाई थी. भाजपा नेताओं ने दोनों में सुलह कराने का प्रयास कराया. सफलता नहीं मिली. संतोष शुक्ला एक सभा को सम्बोधित कर रहे थे कानपुर में. विकास अपने गुर्गों के साथ पहुंच गया. संतोष शुक्ला पर फ़ायरिंग शुरू हुई. संतोष शुक्ला जान बचाने के लिए शिवली थाने में भागे. जाकर लॉकअप में छिप गए. विकास थाने में आया. लॉकअप को तोड़कर संतोष शुक्ला को गोलियों से भून डाला.

विकास दुबे

कहते हैं कि कानपुर देहात के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव का रहने वाला विकास अपने गैंग में स्थानीय युवाओं को शूटर के तौर पर भर्ती करता था. पंचायत चुनाव हों या निकाय चुनाव विकास दुबे किसी ना किसी के लिए काम करता ही रहा. कई घटनाओं में गिरफ़्तारी हुई. ज़मानत भी. यूपी STF ने ख़ुद कानपुर के कृष्णानगर इलाक़े से गिरफ़्तार किया. जेल गया. जेल से ही बाहर बैठे अपने चचेरे भाई अनुराग की मदद से सरकारी टेंडर और प्रॉपर्टी का काम करने लगा. जेल में रहते हुए विकास दुबे ने नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव भी जीता था. साल 2018. ख़बर बताती है कि विकास दुबे जेल में बंद था. और काम सम्हाल रहे भाई अनुराग से खिटपिट हो गयी. जेल में ही रहते हुए विकास ने अपने भाई के मर्डर का प्लान बनाया. अटैक हुआ. कई गोलियां लगने के बाद भी अनुराग बच निकला.

अब तक की जानकारी के अनुसार विकास दुबे पर 60 से ज़्यादा गंभीर मामलों के लिए मुक़दमे चल रहे हैं. ज़मानत पर बाहर आने के बाद बहुत दिनों से विकास दुबे पुलिस की वांटेड लिस्ट में चल रहा था.

# यूपी पुलिस डीजीपी क्या कह रहे हैं?

यूपी पुलिस के डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने इस मामले पर जानकारी देते हुए कहा कि-

“हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के खिलाफ धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया गया था, पुलिस उसे गिरफ्तार करने गई थी. जेसीबी को वहां लगा दिया गया जिससे हमारे वाहन बाधित हो गए. फोर्स के उतरने पर अपराधियों ने गोलियां चलाईं. जवाबी फायरिंग हुई लेकिन अपराधी ऊंचाई पर थे, इसलिए हमारे 8 लोगों की मौत हो गई. हमारे लगभग 7 आदमी घायल हो गए. ऑपरेशन अभी भी जारी है क्योंकि अंधेरे का फायदा उठाकर अपराधी भागने में सफल रहे.  आईजी, एडीजी, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) को ऑपरेशन की निगरानी के लिए वहां भेजा गया है. कानपुर से फॉरेंसिक टीम मौके पर थी, लखनऊ से एक विशेषज्ञ टीम भी भेजी जा रही थी. एसटीएफ को तैनात किया गया है. आईजी और एसटीएफ मौके पर पहुंच रहे हैं. कानपुर एसटीएफ पहले से ही काम पर है.

कानपुर पुलिस के 8 शहीद पुलिसवालों के परिवार के प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुःख जताया है. सीएम ने पुलिस महकमे को आदेश दिए हैं कि अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए. और हरसंभव कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.


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