इंडिया वर्सेज़ ऑस्ट्रेलिया (IndvsAus). विश्व क्रिकेट में इंडिया की सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी ऑस्ट्रेलियन टीम. ऑस्ट्रेलिया ने इंडिया को कई घाव दिए हैं. जिसमें साल 2003 वनडे वर्ल्ड कप फाइनल में आई हार, आज भी कई लोगों को चुभती है. वैसे इसके अलावा भी ऑस्ट्रेलिया ने इंडिया को कई दफ़ा कुचला है. हालात इतने खराब थे कि तब के इंडियन फ़ैन्स मैच से पहले ही अपने दिलों-दिमाग को मजबूत कर कहते थे, ‘हम सेकेंड बेस्ट तो हैं ही’.
गाना गाने का शौकीन बोलर, जिसने सचिन को कई दफ़ा आउट किया
ये बंदा तो गाते ही रहता था.
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इंडियन फ़ैन्स अपनी टीम द्वारा ऑस्ट्रेलिया को दी गई कड़ी चुनौती से ही खुश हो जाते थे. जैसे जब सचिन तेंडुलकर ने ऑस्ट्रेलियन लेजेंड ग्लेन मैक्ग्रा को डॉमिनेट किया तो इंडिया फ़ैन्स ने खूब जश्न मनाया था.
साल 2000 में नैरॉबी में हुए ICC नॉकआउट मैच में सचिन ने मैक्ग्रा को खूब सुनाया. और उनकी गेंदों पर खूब बाउंड्री निकाली. इसके बारे में cricket.com को बताते हुए सचिन ने कहा था,
‘जिस तरीके से मैक्ग्रा ने पहला ओवर डाला, मैंने सौरव गांगुली से बात की और उनको सुझाव दिया कि मुझे मैक्ग्रा के पीछे जाना चाहिए. मुझे एहसास हुआ कि मुझे कुछ आउट ऑफ द बॉक्स करना होगा (माइंड गेम्स खेलने होंगे). मैंने उनको कुछ शब्द कहे जिससे वो सरप्राइज हो गए. मैंने भी उनके खिलाफ शॉट्स खेलना शुरू कर दिया, हालांकि इनमें से कुछ शॉट्स रिस्की थे.
प्लान ये था कि उनको गुस्सा दिलाना था. और मुझे आउट करने की जगह (मैक्ग्रा से) मेरी बॉडी पर अटैक करवाना था. कुछ गेंदों पर हम बीट हुए लेकिन हम मैक्ग्रा से वहां गेंदबाजी करवा पाए जहां हम चाहते थे. मैंने तेजी से 38 रन बनाए. और क्योंकि ये जीत की वजह बने, इसलिए मैं खुश था.’
ग्लेन मैक्ग्रा और सचिन तेंडुलकर के बीच मैदान पर और भी कई दफ़ा जंग हुई. लेकिन ये जंग जुबान की नहीं बल्कि बैट और बोल की ज्यादा थी. इन जंग से अलग आप ये जानते हैं कि कई बार मैक्ग्रा गाने गाते हुए गेंदबाजी करते थे?
# गाना गाते विकेट निकालते मैक्ग्राजी हां, और ऐसा ही एक सुझाव मैक्ग्रा ने मिचल जॉनसन को दिया था. ये बात जॉनसन ने शेन वॉटसन को Lessons learnt with the greats पॉडकॉस्ट में सुनाई थी. साल 2010-11 में हुई ऐशेज़ सीरीज़ में जॉनसन कमाल नहीं कर पाए थे. इस दौरान मैक्ग्रा ने जॉनसन को कई सुझाव दिए थे. जिसमें से एक गाना गाकर नेगेटिव कॉमेंट्स को दूर रखना था.
जॉनसन ने इस सुझाव के बारे में बताते हुए कहा,
‘जब मैं गेंद डालने के बाद वापस जा रहा था तब मेरे दिमाग में एक गाना होता था. ये मेरे शुरुआती दिनों की बात थी. जब मैंने खेलना शुरू किया था. फिर मैं आलसी हो गया और किसी कारण से मैंने ये करना बंद कर दिया.’
मैक्ग्रा की सलाह पर जॉनसन ने ये फिर शुरू किया.
‘ग्लेन मैक्ग्रा ने मुझे ये याद दिलाया, क्योंकि वो भी यही चीज़ करते थे. और मुझे याद है उन्होंने कहा था, मुझे ये याद नहीं कि ये 2007 वर्ल्ड कप की बात है या कब की. लेकिन किसी ने इस बात को फिर मेंशन किया था. और ये बात पहले काम करती थी.’
पॉडकॉस्ट में बैठे वॉटसन भी इस बात से राज़ी हुए. और कहा,
‘ग्लैन मैक्ग्रा ऐसा करते थे. उन्होंने यही चीज़ मुझसे भी कही थी. मुझे लगता है ये शायद 2007 की बात थी. उन्होंने कहा, ‘जब मैं अच्छा प्रदर्शन कर रहा होता हूं तब मेरे दिमाग में हमेशा एक गाना होता है. जब मैं अपने हर ओवर की पहली गेंद डालने जाता हूं मुझे पता होता कि इस ओवर में, मैं कौन सी गेंद डालने वाला हूं. और मेरे दिमाग में एक गाना होता है.’
हालांकि इसके साथ वॉटसन ने ये भी माना कि ये बहुत ताकतवर चीज है. और इससे आपके दिमाग में गलत चीज़ें नहीं आती. खैर, ग्लेन मैक्ग्रा के दिमाग में चल रहे गानों के जैसे ही उनकी गेंदबाजी भी होती थी. बिना शू-शां के दौड़कर आना और सटीक लाइन लेंथ पर गेंदबाजी करना उनकी ताकत थी. और जब वो गेंद फेंकते थे, उस समय स्ट्राइक पर खड़े बल्लेबाज़ और उस बल्लेबाज़ के फ़ैन्स के मुंह से सिर्फ एक शब्द निकलता था- ‘दर्दनाक’.
मैक्ग्रा ने अपने टेस्ट करियर में 563 विकेट्स, वनडे करियर में 381 विकेट्स और दो T20I मुकाबलों में पांच विकेट झटके हैं.






















