संसद में महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पर चर्चा चल रही है. केंद्र सरकार ने इस विधेयक को पारित कराने के लिए तीन दिनों का विशेष सत्र बुलाया है. बहस के पहले दिन विपक्षी पार्टियों ने महिला आरक्षण पर तो सहमति जताई, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति की. यानी कम से कम महिलाओं की हिस्सेदारी पर सबकी सहमति है. लेकिन बारी टिकट देने की आती है तो इन दलों के कमिटमेंट की हवा निकल जाती है. पश्चिम बंगाल चुनाव इसकी एक बानगी है. यहां केवल तृणमूल कांग्रेस ने 25 फीसदी से ज्यादा महिलाओं को टिकट दिया है.
संसद में महिला आरक्षण पर बहस, लेकिन बंगाल चुनाव में महिलाओं को टिकट देने में फिसड्डी दिख रही BJP
महिला आरक्षण पर देश की सबसे बड़ी पंचायत में चल रही चर्चा के बीच बंगाल चुनाव में महिलाओं की हिस्सेदारी पर नजर डाल लेते हैं. यहां सिर्फ TMC ने ही महिलाओं को सम्माजनक संख्या में टिकट दिया है. हालांकि ये भी एक तिहाई से नीचे है. बीजेपी, लेफ्ट और कांग्रेस की बात करें तो इनका आंकड़ा 15 फीसदी से भी नीचे है.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोटिंग होनी है. इस चुनाव में सभी दलों ने मिलाकर महिलाओं को सिर्फ 11 फीसदी टिकट दिए हैं. महिलाओं को टिकट देने में ममता बनर्जी की पार्टी TMC सबसे आगे है. TMC ने सभी 291 सीटों पर उम्मीदवार दिए हैं. इनमें से 52 टिकट महिलाओं के हिस्से गए हैं. ये सभी उम्मीदवारों का 27.2 फीसदी है.
बाकी बड़े दलों की बात करें तो, CPI(M) लेफ्ट के दूसरे धड़ों के साथ 253 सीटों पर लड़ रही है. इनमें से महिलाओं को 34 सीटें मिली हैं. यानी 13.43 फीसदी सीट. कांग्रेस राज्य की सभी 294 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. इसने कुल 35 महिलाओं को टिकट दिया है. ये सभी उम्मीदवारों का 11.9 फीसदी है. बड़े दलों में महिलाओं को सबसे कम हिस्सेदारी बीजेपी ने दी है. पार्टी सभी 294 सीट लड़ रही है. इसमें महिलाओं को सिर्फ 33 सीट मिला है. यानी 11.2 फीसदी.
TMC ने देशभर की बाकी पार्टियों के मुकाबले में ज्यादा महिला उम्मीदवारों को मौका दिया है. बंगाल की मौजूदा विधानसभा में 41 महिला विधायक हैं. ये सदन की कुल संख्या का 13.94 फीसदी है. ये सभी राज्यों के विधानसभाओं के राष्ट्रीय औसत 8 फीसदी से काफी ज्यादा है. हालांकि ये संख्या संसद में महिलाओं के एवरेज से थोड़ा कम है. संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी 14.6 फीसदी है.
केंद्र सरकार ने साल 2023 में महिला आरक्षण अधिनियम पारित कराया था. अब सरकार ने '131वां संविधान संशोधन बिल' के माध्यम से कई संवैधानिक संशोधनों का प्रस्ताव संसद में रखा है. गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि इन विधेयकों के पास हो जाने के बाद नए सदन में सांसदों की कुल संख्या 816 हो जाएगी. इन संशोधनों के पारित होने के बाद लोकसभा और विधानसभाओं में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू होने का रास्ता भी सा फ हो जाएगा.
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