“RIL ने अपने एजेंट्स के साथ मिलकर ये योजना तैयार की कि किस तरह से RPL के शेयर्स बेचकर ग़लत तरीके से लाभ कमाया जा सके.”बताते चलें कि SEBI ने 24 मार्च 2017 को इसी केस में RIL और अन्य संस्थाओं को आदेश दिया था कि वो निवेशकों के 447 करोड़ रुपए लौटाएं. SEBI के इस आदेश के ख़िलाफ RIL ने सिक्योरिटीज़ अपील ट्रिब्यूनल (सैट) में अपील की थी. सैट ने RIL की अपील ख़ारिज कर दी थी. तब RIL ने ट्रिब्यूनल के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात कही थी.
मुकेश अंबानी के लिए अच्छी नहीं रही 2021 की शुरुआत, SEBI ने जुर्माना ठोक दिया है
मामला 2007 का है, जुर्माना 2021 में लगा है.
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मुकेश अंबानी की फाइल फोटो.
बाज़ार नियामक सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया. छोटा नाम- SEBI, जिसने मुकेश अंबानी के नए साल के जश्न में ख़लल डाल दिया है. SEBI ने रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (RIL) पर 25 करोड़ और मुकेश अंबानी पर 15 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है. SEBI ने जुर्माने की यह कार्रवाई RIL के शेयरों में नवंबर-2007 में किए गए कथित हेर-फेर के लिए की है. SEBI ने अपने 95 पेज के आदेश में कहा है कि मुकेश अंबानी RIL के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. इस नाते किसी भी हेर-फेर के लिए वो भी ज़िम्मेदार हैं. इसके अलावा दो और कंपनियों पर जुर्माना लगाया गया है. नवी मुंबई SEZ प्राइवेट लिमिटेड पर 20 करोड़, मुंबई SEZ लिमिटेड पर 10 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है. क्यों लगा जुर्माना? मार्च-2007 में RIL ने रिलायंस प्राइवेट लिमिटे (RPL) में अपनी 4.1 फीसदी हिस्सेदारी बेचने का निर्णय लिया था. बाद में लिस्टेड सहयोगी कंपनी का RPL में विलय कर दिया गया. इसी मामले की सुनवाई करते हुए SEBI के सहायक अधिकारी बीजे दिलीप ने कहा कि आम निवेशक को यह सारी बातें नहीं पता थीं. जो कि ग़लत था. उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का हेरफेर निवेशकों के विश्वास को हमेशा के लिए ख़त्म कर देता है. इसलिए मनी मार्केट में जोड़तोड़ के ऐसे मामलों से सख़्ती से निपटा जाना चाहिए. SEBI का कहना है कि –
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