नरेंद्र मोदी. कुछ भी करें, कहीं भी जाएं, खबर बन जाती है. कुछ न भी करें, कहीं न भी जाएं, तो भी उनका होना, उनका अस्तित्व ही अपने में एक खबर है. खबर नहीं सुर्खी है. अख़बारों का फ्रंट पेज है. न्यूज़ चैनल्स का प्राइम टाइम है. ऑनलाइन पोर्टल का लैंडिंग पेज है. रेडियो का मन की बात है. [रेडियो वाला पॉइंट तो लिट्रली].
पीएम मोदी के तीर को उल्टा पकड़ने की वजह पता चली आपको?
दरअसल मास्टर स्ट्रोक है ये. ऐसा तो किसी ने भी नहीं सोचा था.

चूंकि पाठक मोदी के बारे में पढ़-पढ़ के नहीं अघाते इसलिए मांग और पूर्ती के अर्थशास्त्र के चलते न्यूज़ वाले उनके बारे में लिख-लिख के नहीं अघाते. मोदी के अलावा बाकी न्यूज़ का अकाल पड़ा हुआ है. और अकाल और बाढ़ की न्यूज़ भी बिकती नहीं है. तो ए लो जी सनम हम आ गए फिर वही मोदी लेके. और अबकी बार ख़बरों में है उनका उल्टा तीर. मने धनुष बाण में जो उल्टा बाण उन्होंने पकड़ा है. अब इसको लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा. होने को कुछ लोग कह रहे हैं कि किया नहीं होगा, हो गया होगा. लेकिन सर, मै'म मोदी दी जो कुछ भी करते हैं सोच समझ कर करते हैं, वो 'यूं ही' नहीं हो सकता. हां वो लोगों को 'बड़े आराम से' की तर्ज़ पर 'यूं ही' क्यों न लगे. तो हमने कुछ कारणों की लिस्ट बनाई है, इसके उत्तर में कि मोदी ने ऐसा क्यों किया होगा, मतलब तीर उल्टा क्यों पकड़ा होगा -
# तस्वीर में मोदी जी को देखिए. क्या आपको लगता है कि उनका ध्यान तीर या धनुष की ओर है?
अर्जुन को क्या दिखा था? पेड़? न. चिड़िया? न. चिड़िया की आंख? जी बिलकुल. सिर्फ और सिर्फ चिड़िया की आंख.
और मोदी जी के लिए चिड़िया है कैमरा और चिड़िया की आंख - उस कैमरे का शटर. अर्जुन को चिड़िया की आंख पर निशाना लगाने के लिए धनुष बाण पर भी कंसन्ट्रेट करना पड़ता होगा. इसलिए उन्होंने तीर उल्टा नहीं पकड़ा होगा. इसलिए वो तीर उल्टा पकड़ना एफोर्ड न कर सकते होंगे. लेकिन मोदी जी को कैमरे और उसके शटर के लिए अपनी मुस्कान पर ध्यान देना था. और उन्होंने दिया. बाकी सब, सब कुछ, प्राथमिकता वाली लिस्ट में नीचे, बहुत नीचे आते हैं. धनुष हो बाण हो या प्रत्यन्चा.
# मोदी जी उल्टा तीर पकड़ कर दरअसल दर्शना चाहते हों अपने विरोधियों को. कि जैसे किसी के लिए कोई काम 'बाएं हाथ का खेल' होता है, वैसे ही मोदी जी के लिए अपने विरोधियों को परास्त करना मुश्किल नहीं. उन्हें सीधे तीर की आवश्यकता नहीं. उल्टा तीर ही काफी है. यूं वो एक नई इबारत, एक नया मुहावरा गढ़ रहे हैं. कि 'उन' लोगों को परास्त करना मेरे उल्टे तीर का काम है. और उस इबारत का लोगो, उसकी आइकन रहेगी ये तस्वीर.
# एक और मुहावरा - जब सीधे तीर से काम नहीं चलता तो तीर उल्टा करना पड़ता है.
# आज रात 12:00 बजे के बाद हर उल्टा तीर सीधा कहलाएगा.
[55 साल से या 70 साल से चली आ रही मनमानियों को रोकने के लिए एक ही व्यक्ति पर पूरा दारोमदार है - नरेंद्र दामोदर मोदी. तो ये बुर्जुआ नियम कि तीर सीधा ही चलाना है, इसे भी बदलना होगा.]
# चुनावी माहौल है, ऐसे में विपक्षी पार्टियों को खबरों में सिर्फ उतना ही कवरेज मिलता है जितना मोदी जी में से बचा रह जाता है. उधर गडकरी ने कुछ दिन पहले कहा था कि पाकिस्तान में बह जाने से पहले हम अपनी नदियों का पानी और अधिक यूज़ किया करेंगे और इधर इस तस्वीर के माध्यम से मोदी जी ने बता दिया कि कवरेज की नदी विपक्ष तक जाए उससे पहले ही हम ऐसी तस्वीरों के छोटे-छोटे बांध बना लेंगे.
# मोदी जी की कोई भी चाल सीधी नहीं होती, इसलिए ही तो उनके विरोधी कुछ समझ नहीं पाते, तो तीर भी क्यों ही सीधा हो? इसी बात पर एक शेर -
उल्टे-उल्टे तीर नज़र के चलते हैं, सीधा-सीधा दिल पे निशाना लगता है.
# हो सकता है कि जिसे हम मिसाइल समझ रहे हों वो दरअसल एन्टी मिसाइल है. मतलब मोदी जी तीर चला नहीं रहे, तीर झेल रहे हैं और बड़ी ख़ूबसूरती से उसे डिफेंड कर रहे हैं. ये तीर तो दरअसल बिपक्छियों ने उनकी और मारा है. और यूं मोदी जी, रजनीकांत के रील लाइफ करेक्टर्स को रियल लाइफ में इमीटेट कर रहे हों.
# सबसे इंपोर्टेंट बात. शॉर्ट में - मोदी है तो मुमकिन है.
वीडियो देखें:
मथुरा में साधु क्यों बोला- जनता का शासन होना चाहिए -




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