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जॉर्जिया मेलोनी इटली के स्कूलों में बुर्का नहीं पहनने देंगी, कहा- 'हमारे नियमों का सम्मान करना होगा'

Burqa, niqabs ban in Italian schools: इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने का ऐलान किया है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इटली में आकर पढ़ने वाले बच्चों को उनकी संस्कृति को समझना चाहिए.

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इटली में अगले साल 2027 में आम चुनाव होने हैं. (कर्टसी-इंडिया टुडे)

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  • इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने का प्रस्ताव संसद में भेजने की तैयारी शुरू कर दी है, जिसे सरकार की मंजूरी के बाद 60 दिनों में कानून बनाया जाएगा।
  • यह प्रस्ताव इस वजह से आया है कि इटली में विदेशी छात्रों की संख्या को सीमित करने और उनकी भाषा व संस्कृति को अपनाने की आवश्यकता मानी जा रही है, साथ ही 1975 के कानून के तहत चेहरे को छिपाने वाले कपड़ों पर प्रतिबंध पहले से मौजूद है।
  • इस कदम से स्कूलों में विदेशी छात्रों की संख्या पर कानूनी सीमा लागू रहेगी और माता-पिता के लिए इटैलियन भाषा सीखना अनिवार्य होगा, जिससे अगले आम चुनाव में आप्रवासन नीति पर राजनीतिक चर्चा और बढ़ सकती है।

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने की तैयारी कर रही हैं. रविवार, 20 सितंबर को रोम में अपनी पार्टी 'ब्रदर्स ऑफ इटली' (FdI) के एक युवा कार्यक्रम में पीएम मेलोनी ने स्कूल और विदेशी छात्रों पर बात की. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जो लोग इटली में आकर अपना फ्यूचर बनाना चाहते हैं उन्हें यहां की संस्कृति को समझना चाहिए, नियमों का सम्मान करना चाहिए और उनकी भाषा सीखनी चाहिए.

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माता-पिता के इटैलियन सीखने पर क्या कहा?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मेलोनी ने कहा कि इटली में कोई भी व्यक्ति यह तय नहीं कर सकता कि किसी युवा महिला को खुद को छिपाकर रखना चाहिए. कार्यक्रम में पीएम मेलोनी ने ये भी कहा कि जो विदेशी छात्र स्कूल सिस्टम में घुलने-मिलने में गंभीर दिक्कतों का सामना कर रहे हैं, उनके माता-पिता के लिए इटैलियन भाषा की क्लास जरूरी की जाएगी. इटैलियन पीएम ने कहा,

“जो भी इटली आता है, यहां अपना भविष्य बनाना चाहता है, उसे हमारी भाषा सीखनी होगी, हमारी संस्कृति को समझना होगा और हमारे नियमों का सम्मान करना होगा.” 

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बुर्के के मुद्दे से अलग मेलोनी ने कहा कि वे हर क्लास में विदेशी छात्रों की संख्या पर कानूनी सीमा लागू करेंगी. इटली के कानून के तहत हर क्लास और स्कूल में विदेशी छात्रों की संख्या पर पहले से ही 30 प्रतिशत की सीमा तय है. पीएम ने यह नहीं बताया कि इसमें क्या बदलाव होगा.

बता दें कि सरकार की मंजूरी के बाद प्रस्ताव को कानून बनाने के लिए संसद में भेजा जाएगा. फिर 60 दिनों के अंदर संसद से मंजूरी लेनी होगी. तब ये नियम लागू होंगे. 

विपक्षी पार्टी की सख्त इमीग्रेशन नीति

इटली में अगले साल यानी 2027 में आम चुनाव होने हैं. इमीग्रेशन का मुद्दा वहां पहले से ही बड़ा राजनीतिक मुद्दा है. मेलोनी की पार्टी को विरोधी नेशनल फ्यूचर (FN) से चुनौती मिल रही है. FN, मेलोनी की पार्टी से भी ज्यादा सख्त इमीग्रेशन नीति की मांग करती है. FN ने इसी साल जुलाई में स्कूलों में बुर्का और नकाब पर रोक लगाने की मांग की थी.

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रिपोर्ट के मुताबिक, इटली में चेहरा ढकने को लेकर 1975 से कानून है. यह कहता है कि ऐसे कपड़ों पर रोक है, जिससे किसी व्यक्ति की पहचान न हो सके. वहीं, 2008 के एक फैसले में धार्मिक और सांस्कृतिक कारणों से पूरा चेहरा ढकने की इजाजत दी गई थी. शर्त बस ये है कि जांच के समय चेहरा खुला रखा जाए.

यूरोप के दूसरे देशों का चेहरा ढकने पर क्या है नियम?

जानते हैं यूरोप के अन्य देशों में चेहरा ढकने पर क्या नियम है.

फ्रांस: टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस पहला यूरोपीय देश था, जिसने 2011 में सार्वजनिक जगहों पर चेहरा ढकने वाले कपड़ों पर राष्ट्रीय स्तर पर रोक लगाई थी. नियम तोड़ने पर जुर्माना हो सकता है.

बुल्गारिया: 2016 से सार्वजनिक जगहों पर पूरा चेहरा ढकने वाले नकाब पर रोक है. इन्हें सिर्फ घरों और पूजा-स्थलों पर ही पहना जा सकता है.

नीदरलैंड्स: नीदरलैंड्स में सार्वजनिक जगहों पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई गई है. लेकिन स्कूलों, अस्पतालों, सरकारी इमारतों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसी जगहों पर चेहरा ढकने पर पाबंदी है.

पुर्तगाल: यहां की सरकार ने अगस्त 2026 में सार्वजनिक जगहों पर चेहरा ढकने पर रोक लगाने वाला कानून पास किया था. इसमें स्वास्थ्य, प्रोफेशनल्स और धार्मिक स्थितियों में छूट दी गई है.

डेनमार्क: इसने 2018 में सार्वजनिक जगहों पर चेहरा ढकने वाले कपड़ों पर राष्ट्रीय स्तर पर रोक लगाई. इसमें बुर्का और नकाब जैसे कपड़े भी शामिल हैं.

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