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सऊदी जेल से छूटा, एंबेसी की 'लापरवाही' से 15 महीने और जेल हो गई, लौटकर बताई कहानी

Punjab के Rajinderpal Singh Saudi Arabia में 18 महीने की सजा पूरी करने के बाद भी करीब 15 महीने तक भारत नहीं लौट सके. उन्होंने Indian Embassy पर मदद में लापरवाही और पैसे मांगे जाने के आरोप लगाए हैं.

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राजिंदरपाल ने सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास पर मामले को हल्के में लेने के आरोप लगाए हैं (COURTSEY- Indian Embassy Saudi Arabia)

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  • राजिंदरपाल सिंह को सऊदी अरब में ड्रग्स रखने के आरोप में तीन साल जेल की सजा हुई, जिसके बाद 31 अगस्त को वे भारत वापस लौटे।
  • राजिंदरपाल ने भारतीय दूतावास से मदद मांगने के बावजूद रिहाई के रिकॉर्ड में देरी और दूतावास के उदासीन रवैये के कारण 15 महीने अतिरिक्त जेल में बिताए।
  • राजिंदरपाल की वापसी के लिए राज्यसभा सांसद बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल ने विदेश मंत्रालय में मामला उठाया, जिससे उनकी और अमृतसर के अन्य युवाओं की वापसी संभव हुई।

विदेश की जेल में लगभग तीन साल बिताने के वापस लौटना कैसा लगता है? इसका जवाब पंजाब के राजिंदरपाल सिंह से बेहतर कोई नहीं दे सकता. राजिंदरपाल की ये कहानी उस लंबे संघर्ष का नतीजा है, जो उन्होंने भारतीय अधिकारियों से मदद पाने के लिए किया था. उनकी कहानी बेबसी और अकेलेपन के इंतहां तक जाती है. राजिंदरपाल ने सऊदी अरब में कुल 10 साल बिताए. इस दौरान वह तीन साल तक सऊदी की जेल में रहे. उनका आरोप है कि भारतीय दूतावास से बार-बार मदद मांगने के बावजूद उन्हें बहुत कम मदद मिली. 18 महीने की सजा पूरी होने के बाद भी उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा.

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ट्रक में ड्रग्स मिलने का आरोप

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राजिंदरपाल ने बताया कि उन्हें ड्रग्स रखने के आरोप में सजा दी गई थी. उनके ट्रक के साथ चल रहे एक दूसरे ट्रक में लदे सामान से अवैध ड्रग्स मिलने का आरोप था. उन्होंने कहा कि वो तीन अलग-अलग ट्रक चलाने वाले ड्राइवर थे. लेकिन वो और अमृतसर का एक दूसरा ट्रक ड्राइवर इस मामले में फंस गए. क्योंकि तीनों ड्राइवर सामान पहुंचाने का काम कर रहे थे. कंसाइनमेंट यानी ट्रक में लदे माल के जो कागजात थे, वो एक ही सेट में तीनों ट्रकों के लिए थे. लिहाजा सऊदी अरब पुलिस ने राजिंदरपाल को हिरासत में ले लिया.

पुलिस ने दोबारा एयरपोर्ट से उठा लिया

राजिंदरपाल के अनुसार, भारत लौटने से 15 महीने पहले ही उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया था लेकिन, जब वो घर जाने वाली फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे तो उन्हें वापस जेल भेज दिया गया. क्योंकि एयरपोर्ट के रिकॉर्ड में उनकी रिहाई की जानकारी अपडेट नहीं की गई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय दूतावास को रिकॉर्ड अपडेट करना चाहिए था. ऐसा न होने की वजह से इस मामले को सुलझाने में लगभग 15 महीने लग गए. इसके बाद वो 31 अगस्त को घर लौट पाए. 

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उन्होंने बताया कि महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. आखिरकार उनके परिवार ने 8 दिसंबर, 2025 को राज्यसभा सांसद बाबा बलबीर सिंह सीचेवाल से संपर्क किया और उनकी वापसी के लिए मदद मांगी. सीचेवाल ने विदेश मंत्रालय के सामने यह मामला उठाया और उनकी और अमृतसर के बाकी युवाओं की वापसी करवाई.

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दूतावास के अधिकारियों का रवैया उदासीन

राजिंदरपाल ने दावा किया कि सजा पूरी होने के बाद भी उन्हें लगभग 15 महीने और जेल में बिताने पड़े. कागजी कार्रवाई से जुड़ी दिक्कतों की वजह से वो वापस नहीं लौट पाए. उनका कहना है कि मदद के लिए उन्होंने बार-बार गुहार लगाई. लेकिन अधिकारियों ने उनकी रिक्वेस्ट पर ठीक से ध्यान नहीं दिया गया. दूतावास के अधिकारियों का रवैया भी उदासीन रहा.

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उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सऊदी में भारतीयों को कभी-कभी बिना सिफारिश के मदद नहीं मिल पाती थी. उन्होंने दावा किया कि भारतीय कामगारों की भारत वापसी से जुड़े जायज कामों को पूरा करने के लिए भी पैसे मांगे जाते हैं. इसमें ऐसे मामले भी शामिल थे, जिन्हें दूतावास की कॉन्सुलर जिम्मेदारियों के तहत निपटाया जाना चाहिए था. राजिंदरपाल अब घर आ चुके हैं. लेकिन उन्होंने सऊदी अरब में भारतीय दूतावास के कामकाज और उनके मामले को जिस तरह से निपटाया गया, उसकी जांच की मांग की है.

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