मणिपुर में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने और यौन उत्पीड़न का वीडियो वायरल होने के बाद नस्लीय तनाव और बढ़ गया है. अब मिजोरम में रह रहे मैतेई समुदाय के लोगों के बीच डर का माहौल है. मैतेई लोगों ने मिजोरम छोड़ना शुरू कर दिया है. मिजोरम के पूर्व उग्रवादियों के एक समूह ने मैतेई लोगों को धमकी दी थी कि वे "अपनी सुरक्षा" के लिए राज्य से चले जाएं. इसके बाद अब मणिपुर सरकार ने भी कहा कि वो चार्टर्ड फ्लाइट के जरिये लोगों को मणिपुर लाने के लिए तैयार है. मिजोरम पुलिस ने राजधानी आइजोल के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है.
मणिपुर हिंसा के बीच मिजोरम क्यों छोड़ने को मजबूर हुए मैतेई समुदाय के लोग?
मणिपुर सरकार ने भी कहा कि वो चार्टर्ड फ्लाइट के जरिये लोगों को मणिपुर लाने के लिए तैयार है.
.webp?width=360)
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मिजोरम के मिजो समुदाय के लोगों का मणिपुर के कुकी समुदाय के साथ गहरा नस्लीय संबंध है. 3 मई को मणिपुर में शुरू हुई हिंसा के बाद कुकुी समुदाय के साढ़े 12 हजार लोगों ने मिजोरम में शरण ली है. 21 जुलाई को अंडरग्राउंड मिजो नेशनल फ्रंट उग्रवादियों से जुड़े एक संगठन की धमकी के बाद ये तनाव शुरू हुआ. इस संगठन का नाम पीस अकॉर्ड एमएनएफ रिटर्नीज एसोसिएशन (PAMRA) है. संगठन ने बयान में कहा था कि मणिपुर में कुकी समुदाय के खिलाफ हिंसा से मिजो लोगों की भावनाएं बुरी तरह आहत हुई हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, आइजोल में करीब दो हजार मैतेई समुदाय के लोग रहते हैं. इनमें सरकारी कर्मचारी, छात्र और वर्कर्स हैं. ज्यादातर असम की बराक घाटी के रहने वाले हैं. उग्रवादी समूह की धमकी के बाद मिजोरम के DIG (नॉर्दर्न रेंज) ने मैतेई लोगों की सुरक्षा के लिए एक आदेश जारी किया. आइजोल में चार जगहों पर सुरक्षाबलों को तैनात किया गया. हालांकि 22 जुलाई की दोपहर तक कई मैतेई लोग मिजोरम छोड़कर जाने लगे.
मिजोरम छोड़कर जाने का प्लान बना रहे एक व्यक्ति ने अखबार को बताया,
"वे अपने परिवार के साथ प्राइवेट गाड़ी में असम जाएंगे. मिजो लोग काफी नेक हैं. लेकिन अब कई मैतेई लोग अपने किराये के मकान को छोड़कर जा रहे हैं. बराक घाटी के कई लोग सड़क से ही निकल रहे हैं. कई लोग आइजोल एयरपोर्ट पर रुकने की सोच रहे हैं. लोग डरे हुए हैं."
हालांकि मिजोरम सरकार ने कहा है कि उन्हें कोई खतरा नहीं है. मिजोरम के गृह आयुक्त ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा,
"मैंने PAMRA के साथ बातचीत की है उन्होंने बताया है कि उनके मैसेज को गलत तरीके से लिया गया है. उन्होंने कहा कि ये धमकी नहीं थी बल्कि मैतेई लोगों की सुरक्षा के लिए चिंता जाहिर की थी."
मणिपुर में पिछले ढाई महीने से नस्लीय हिंसा जारी है. हाल में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड कराने का वीडियो आने पर तनाव और बढ़ गया. 22 जुलाई की रात भी चुराचांदपुर और इम्फाल के पास मैतेई और कुकी समुदाय के बीच काफी देर तक फायरिंग होती रही. बिष्णुपर में एक स्कूल में आग लगा दी गई. 3 मई के बाद से हिंसा में 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.
वीडियो: मणिपुर वायरल वीडियो में जहां उत्पीड़न हुआ, वहां से सिर्फ 1 KM दूर है देश का 'बेस्ट' पुलिस स्टेशन













