
बच्चे के पिता ने डीएम से मिलकर सवाल उठाए हैं.
ये एनकाउंटर मथुरा में हुआ था. पुलिस का दावा है कि 17 जनवरी को पुलिस को सूचना मिली थी कि हाईवे थाना इलाके में कुछ बदमाश छिपे हैं. पुलिस ने घेराबंदी कर बदमाशों को सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन बदमाश फायरिंग करते हुए फरार हो गए. पीछा करते हुए पुलिस फोर्स मोहनपुरा अडूकी गांव पहुंची, जहां बदमाश छिपे हुए थे. पुलिस फोर्स ने गांव की घेराबंदी कर दी. जब पुलिस ने बदमाशों को सरेंडर करने के लिए कहा, तो बदमाशों ने फायरिंग कर दी. इस दौरान गांव के लोग भी वहां मौजूद थे. बदमाशों को फायर करता देखकर पुलिस ने भी गोलियां चला दीं. इसी दौरान एक गोली 8 साल के बच्चे माधव को भी लग गई. पुलिस ने देखा तो बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. इलाज के दौरान वहां बच्चे की मौत हो गई.
''बच्चे का नाम माधव भारद्वाज था. वो मोहनपुरा अडूकी गांव के ही पीसीपीएस बाल विद्या मंदिर स्कूल में नर्सरी में पढ़ता था. उसके पिता का नाम अमरनाथ भारद्वाज है.''
क्या फर्जी था एनकाउंटर प्रदेश में जब सरकार ने एनकाउंटर के आंकड़े जारी किए थे, तो उसी वक्त मानवाधिकार आयोग ने इस पर सवाल उठाया था. 17 जनवरी को भी पुलिस ने एनकाउंटर करने का दावा किया. पुलिस ने कहा कि उसने बदमाशों को पकड़ने के लिए गोली चलाई है, लेकिन गांव के किसी भी आदमी ने न तो बदमाशों को देखा और न ही किसी ने बदमाशों की ओर से गोली चलने की आवाज सुनी. इसके बाद एक बार फिर से ऑपरेशन ऑल आउट पर सवाल खड़े होने लगे हैं. जब जिला प्रशासन को पता चला कि पुलिस की गोली से बच्चे की मौत हुई है, तो डीएम सर्वज्ञराम मिश्र तुरंत बच्चे के घर पहुंचे. वहीं यूपी पुलिस ने पूरे मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए.
एसएसपी स्वप्निल ममगई ने बताया
इस एनकाउंटर की जांच करवाई जा रही है. इसका सच क्या है ये जानना जरूरी है? उम्मीद है जल्द जांच रिपोर्ट आएगी और सच्चाई का पता चल जाएगा.
ये एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब पुलिस को खोजने पर भी नहीं मिल रहा है. गांववालों का कहना है कि पुलिस जिसे बदमाशों के साथ मुठभेड़ बता रही है, वैसा कुछ हुआ ही नहीं है. गांववालों की मानें तो दोपहर करीब ढाई बजे हाईवे थाने के दो जवान पुलिस की चेतक बाइक से मोहनपुर गांव पहुंचे और करीब दो घंटे तक बैठे रहे. जब गांव के लोगों ने उनसे वजह पूछी तो पुलिसवालों ने उन्हें चुप करा दिया. गांववालों का दावा है कि दोनों पुलिसवालों ने शराब पी रखी थी. उन्होंने गांववालों से झगड़ा किया और फिर गोली चला दी. गोली की आवाज सुनकर और गांव के लोग वहां पहुंचे तो देखा कि माधव को गोली लगी है. जब गांव के लोगों ने शोर मचाया तो पुलिसवाले वहां से भाग गए, लेकिन उनकी बाइक वहीं छूट गई. गांववालों ने बताया कि पुलिसवाले बदमाशों के भागने का शोर कर रहे थे, लेकिन कोई भी बदमाश भागता हुआ नहीं दिखा था. विवाद बढ़ा तो हो गया सस्पेंशन जब गांववालों ने इस एनकाउंटर पर सवाल उठाए, तो पुलिस घिरती हुई नजर आई. इसके बाद आगरा रेंज के आईजी ने यूपी पुलिस के दो दरोगा वीरेंद्र सिंह और सौरभ शर्मा के साथ ही सिपाही उधम सिंह और सुभाष को सस्पेंड कर दिया है. मथुरा के डीएम ने इस पूरे मामले की मैजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी कर दिए हैं.
इससे पहले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी बच्चे के घरवालों को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की थी. साथ ही अखिलेश यादव ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी.
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