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2017 के वो 5 धाकड़ पुलिस अधिकारी जिन्होंने अपराधियों का बाजा बजा दिया

पुलिस अधिकारी माने आईपीएस अफसर. देश में इनकी तादाद ढेरों में हैं. हर जिले में होते हैं. मगर कुछ आईपीएस अलग होते हैं. वो जहां जाते हैं, अपनी छाप छोड़ जाते हैं. लोगों के लिए खास बन जाते हैं. समाज के लिए मिसाल बन जाते हैं. तो ऐसे ही 5 आईपीएस अधिकारियों के बारे में हम आपको बताएंगे जो 2017 में किसी न किसी वजह से चर्चा में रहे-

1. शिवदीप लांडे
बैच – 2006
बिहार कैडर

शिवदीप की कहानी तो एकदम किसी बॉलीवुड फिल्म की तरह है. शिवदीप जब पटना आए थे तब शहर गुंडों और कई अवैध धंधों से त्रस्त था. दस महीनों में शिवदीप ने शहर को रास्ते पर ला दिया. और ये सब कुछ स्टाइल में होता था. ये नहीं कि पुलिस गई और गिरफ्तार कर के लाई. नये तरीके आजमाये जाते थे. कभी शिवदीप बहुरुपिया बन के जाते. कभी लुंगी-गमछा पहन के पहुंच जाते. कभी चलती मोटरसाइकिल से जंप मार देते. कभी चलती मोटरसाइकिल के सामने खड़े हो जाते.

शिवदीप लांडे ने जब बिहार छोड़ा तो लोगों ने उन्हें रोकने का अभियान चलाया था.
शिवदीप लांडे ने जब बिहार छोड़ा तो लोगों ने उन्हें रोकने का अभियान चलाया था.

महाराष्ट्र के अकोला के रहने वाले शिवदीप का शोहदों को पकड़ने के लिए चलाया गया ड्राइव तो बहुत फेमस हुआ था. उन्होंने अपना नंबर पूरे पटना में बांट रखा था. लड़कियों की एक कॉल पर शिवदीप अपनी बाइक से दनदनाते पहुंच जाते थे मजनुओं की धुनाई करने. पटना में लहरिया कट में बाइक चला लड़कियों को परेशान करने वाला गैंग बहुत सक्रिय था. शिवदीप ने सबको रास्ते पर लाया. फिलहाल शिवदीप अपने गृह राज्य वापस जा चुके हैं. मुंबई में भी एंटी नारकोटिक्स सेल और सोशल सर्विस बेंच पर बैठकर वो कमाल कर रहे हैं. कई सेक्स रैकेट और ड्रग डीलर्स को ठिकाने लगा चुके हैं. जब शिवदीप का पटना से ट्रांसफर हुआ तो लड़कियां रास्ता रोके खड़ी थीं. लोग जाने नहीं दे रहे थे.

2. अजय पाल शर्मा
2011 काडर के आईपीएस अधिकारी
शामली के एसपी

वही शामली जो अपनी चीनी और गुड़ के लिए मशहूर है. पर विधानसभा चुनाव से पहले गुंडे-बदमाशों की वजह से चर्चा में आया था. रंगदारी से परेशान लोग पलायन करने को मजबूर थे. पर अब माहौल बदला-बदला सा है. इसके पीछे अजय ही हैं. शामली आते ही उन्होंने अपराधियों को एक-एक कर निपटाना शुरू कर दिया. शुरुआत 29 जुलाई से हुई. उनके नेतृत्व में 60 हजार रुपये के इनामी बदमाश नौशाद उर्फ डैनी और 12 हजार के इनामी बदमाश सरवर को मार गिराया गया. इस एनकाउंटर के बाद लोगों ने उनको घोड़ा बग्गी में बैठाकर बैंड बाजों के साथ घुमाया था और उनका स्वागत किया था. कैराना में पलायन के लिए जिम्मेदार मुकीम काला गैंग की कमर भी अजय ने ही तोड़ी थी. इस गैंग के 50 हजार रुपये के इनामी अपराधी फुरकान को अजय ने ही गिरफ्तार कर जेल भेजा था.

अजय पाल यूपी के धाकड़ इनकाउंटर स्पेशलिस्ट अधिकारी बनकर उभरे हैं.
अजय पाल यूपी के धाकड़ इनकाउंटर स्पेशलिस्ट अधिकारी बनकर उभरे हैं.

अजय की आईपीएस बनने की कहानी भी दिलचस्प है. उन्होंने सिविल की तैयारी से पहले बीडीएस से ग्रैजुएशन किया है. यानी वो डेंटिस्ट बन ही गए थे. पर इंटर्नशिप के दौरान उनका मन बदल गया. अस्पताल में लापरवाही और मरीजों की अनदेखी देख उन्होंने प्रशासनिक अधिकारी बनने की ठानी. 2008 से तैयारी शुरू की और 2011 में आईपीएस बन गए. अजय अपनी फैमिली को इसका क्रेडिट देते हैं. अजय से हमने अपराधियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशंस पर बात की. उनका कहना था कि सरकार और खासकर सीएम की तरफ से अपराधियों को कंट्रोल करने की पूरी छूट है. उन्हें अपनी टीम चुनने की पूरी छूट है. किस थाने में कौन होगा, ये हम ही तय करते हैं वो भी बिना किसी राजनीतिक दबाव के.

3. अनंत देव तिवारी
1986 पीपीएस बैंच के अधिकारी
2006 में आईपीएस का तमगा मिला
अपराधियों का ‘यमराज’ कहते हैं इन्हें

इन्हें उत्तर प्रदेश का दया नाइक या प्रदीप शर्मा समझिए. एनकाउंटर स्पेशलिस्ट. अगर कहें कि ये आदमी कई अपराधियों के सपने में आता होगा तो गलत नहीं होगा. 2007 में एक बड़ा डकैत मार गिराया गया था. नाम था ददुआ. चित्रकूट या उससे पहले पड़ने वाले बांदा इलाके में इस आदमी का आतंक था. इसको मार गिराने वाली एसटीएफ की टीम में अनंत देव सबसे मजबूत कड़ी थे.

अनंत देव
अनंत देव 100 से ज्यादा अपराधियों को निपटा चुके हैं.

अपराधियों के खिलाफ उनका अभियान यहीं नहीं रुका. वो 100 से ज्यादा अपराधियों को ठिकाने लगा चुके हैं. कहते हैं इनको साथी पुलिस वाले अपराधियों का ‘यमराज’ बुलाते हैं. इसे लोगों की किस्मत कहिए या अपराधियों की बदकिस्मती की अनंत देव मुजफ्फरनगर पहुंच गए. जब से पहुंचे हैं, तीन अपराधियों को ठिकाने लगा चुके हैं. इससे पहले वो 6 जिलों फैजाबाद, गोरखपुर, बुलंदशहर, प्रतापगढ़, आजमगढ़, सिद्धार्थनगर आदि जनपदों में वह कप्तान रह चुके हैं. सभी जगह उनका ऐसा ही जलजला रहा है. सभी जगह अपराधियों में उनका खौफ रह है. उन्हें वीरता के लिए राष्ट्रपति पदक भी मिल चुका है. अनंतदेव ने एसटीएफ में लंबी पारी खेली है. कुख्यात ददुआ और कई आतंकियों का एनकाउंटर उन्होंने एसटीएफ में रहते हुए ही किया.

4. रूपा डी मुद्गिल
2000 बैच की आईपीएस
43वीं रैंक लाकर इन्होंने IPS चुना

सीनियर्स से पंगा लेना हो या फिर बड़े नेताओं से. रूपा बिल्कुल नहीं घबरातीं. 2017 में वो चर्चा में आईं कर्नाटक में अपने एक खुलासे के लिए. उन्होंने बताया कि वो बीती 10 जुलाई को उस जेल में गई थीं जहां शशिकला को रखा गया है. शशिकला को उनके बंदीघर से अटैच एक किचन दिया गया है जिसमें उन्हें ख़ास खाना दिया जाता है. ये भी बताया कि ये किचन बनवाने के लिए जेल वालों ने 2 करोड़ रुपये लिए थे. इसके अलावा उन्होंने कई अवैध गतिविधियां होते देखीं. उनके मुताबिक़ उन्होंने 25 कैदियों का ड्रग टेस्ट किया जिसमें 18 को ड्रग पॉजिटिव पाया गया. ये सब DGP के ऑफिस में CCTV की बदौलत देखा जा सकता है. मगर फिर भी इसपर कोई एक्शन नहीं लिया गया. ऐसा रूपा ने दावा किया. तमाम विवादों के बाद डी रूपा का ट्रांसफर कर दिया गया. उन्हें परिवहन विभाग में शिफ्ट कर दिया गया है. कर्नाटक में उनका ये विद्रोह काफी चर्चा में रहा.

रूपा मुद्गिल
रूपा मुद्गिल का बड़े-बड़े लोगों से पुराना पंगा रहा है.

2016 में इन्हें राष्ट्रपति से मेडल मिला था. अपने अच्छे काम के लिए. जब इनकी मध्य प्रदेश में SP के तौर पर पोस्टिंग थी, इन्होंने उस समय की मुख्यमंत्री उमा भारती को धार्मिक दंगों के चलते गिरफ्तार किया था. जब ये बेंगलुरु में DCP के तौर पर पोस्टेड थीं, इन्होंने तमाम पुलिस वालों को VVIP लोगों की सेवा से हटा लिया था. इन लोगों में उस समय के मुख्यमंत्री भी शामिल थे. इसके अलावा कर्नाटक के चीफ मिनिस्टर बीएस येदियुरप्पा के काफिलों में गैर सरकारी ढंग से शामिल होने वाली पुलिस की गाड़ियों को निकलवा लिया था.

5.आर श्रीलेखा
1987 बैच की आईपीएस
केरल की पहली महिला आईपीएस अधिकारी

आर श्रीलेखा. 1987 बैच की आईपीएस. तब इनकी उम्र महज 26 थी. घर से काफी दबाव था कि शादी नहीं हो पाएगी. आईपीएस की तैयारी मत करो. मगर श्रीलेखा ने किसी की एक ना सुनी. 2017 में केरल की पहली महिला डीजीपी बनकर इन्होंने रुढ़ियों को तोड़ा और एक बार फिर साबित कर दिया कि महिलाएं किसी से कम नहीं.

श्रीलेखा
श्रीलेखा को रेड श्रीलेखा भी कहा जाता है.

श्रीलेखा की नौकरी का इतिहास भी उनके जज्बे को दिखाता है. वो नौकरी के दौरान कई बड़ी सीबीआई रेड्स में शामिल रहीं हैं. रेड्स भी एक से बढ़कर एक ऊंचे नेताओं और अधिकारियों के घर पर. एक से एक पहुंच वाले लोगों के घर पर. इसकी वजह से श्रीलेखा को एक नाम भी मिल गया था. ‘रेड श्रीलेखा’. एक बार इन्होंने शराब माफिया का रैकेट पकड़ा था, जिसमें इन्हें माफियाओं ने 1 करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी, लेकिन श्रीलेखा ने इसे ठुकराते हुए मिसाल पेश की थी. श्रीलेखा बहुत अच्छी राइटर भी हैं. क्राइम इंवेस्टिगेशन पर वो तीन किताबें लिख चुकी हैं.


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