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नॉर्थ कोरिया ने अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट किया, 18 साल में 1399 भूकंप आए, कैसे?

North Korea में Nuclear Test के बाद करीब 1399 भूकंप के झटके आने की बात सामने आई है. ऐसा एक साइंस जर्नल में बताया गया है. North Korea ने अपना आखिरी और सबसे बड़ा Nuclear Test 2017 में किया था. इसके बाद ‘2025 तक इलाके में छोटे-छोटे भूकंप के झटके आए थे.’

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नॉर्थ कोरिया में न्यूक्लियर टेस्ट के बाद 1399 भूकंप को 'दर्ज' किया गया. (AP/ India today)

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  • नॉर्थ कोरिया के माउंट मंटाप इलाके में साल 2008 से 2025 के बीच 1399 भूकंप के झटके रिकॉर्ड किए गए, जो इलाके में 2017 में हुए अंतिम अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट के बाद बढ़े।
  • इस इलाके में अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्टिंग से जमीन की निचली सतह पर फॉल्ट लाइनें सक्रिय हुईं, जिससे नियमित तेक्टोनिक गतिविधि से अलग भूकंप आने लगे।
  • भूकंपों की संख्या और तीव्रता में वृद्धि के कारण इलाके की सतह में बदलाव देखने को मिले और इससे भूकंपीय गतिविधि पर शोध और निगरानी जारी रहने की संभावना है।

नॉर्थ कोरिया के माउंट मंटाप के इलाके में साल 2008 से लेकर 2025 के बीच में करीब 1399 भूकंप के झटके रिकॉर्ड किए गए. यह वही इलाका है, जहां यह देश अपना न्यूक्लियर टेस्ट करता है. बताया जा रहा है कि अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट करने की वजह से ऐसा हुआ होगा. एक साइंस रिसर्च जर्नल में भूकंप के रिकॉर्ड्स के बारे में एनालिसिस किया गया है. ज्यादातर मामलों में ऐसा होता है कि न्यूक्लियर टेस्ट के बाद भूकंप आने की संभावना ‘बढ़’ जाती है. 

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया ने अपना आखिरी और सबसे बड़ा न्यूक्लियर टेस्ट साल 2017 में किया था. इसी टेस्ट के बाद इलाके में भूकंप के मामले बढ़ गए. माउंट मंटाप एक पहाड़ी इलाका है. ऐसे में न्यूक्लियर टेस्ट से हुए धमाकों का असर जमीन की भीतरी सतह पर लंबे समय तक पड़ता रहा. इसकी वजह से निचली सतह की पुरानी फॉल्ट लाइनें (दरारें) फिर से एक्टिव हो गईं, जिसके बाद छोटे-छोटे भूकंप आने लगे.

फॉल्ट लाइनों के एक्टिव होने की वजह से कुछ ऐसे भी भूकंप आ सकते हैं, जिन्हें नेचुरल टेक्टोनिक एक्टिविटी से अलग करके पहचानना मुश्किल हो सकता है. माउंट मंटाप के इलाके में नॉर्थ कोरिया का ‘पुंग्ये-री’ न्यूक्लियर टेस्टिंग रेंज है. यहां पर साल 2006 से 2017 के बीच 6 अंडरग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट किए गए. साल 2017 में सबसे बड़ा और आखिरी टेस्ट किया गया था. ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि इस न्यूक्लियर बॉम्ब की कैपेसिटी करीब ‘100 से 250 किलोटन’ तक रही होगी. 

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पहाड़ों की चोटी में बदलाव

टेस्ट के बाद भी एक तेज भूकंप आया था, जिसकी तीव्रता US जियोलॉजिकल सर्वे के हिसाब से 6.3 दर्ज की गई थी. इलाके की सैटेलाइट से कई तस्वीरें ली गई थीं. इसमें क्षेत्र में स्थित पहाड़ों की चोटी में काफी बदलाव देखा गया. इसकी जांच के लिए ‘जिंगली फैन और उनके कुछ साथियों’ ने चीन और दक्षिण कोरिया के स्टेशनों से भूकंपीय रिकॉर्ड का एनालिसिस किया. इसमें माउंट मंटाप से 80 से 200 किलोमीटर की रेंज में लगे सभी मशीनों को शामिल किया गया.

3 हफ्ते बाद बढ़ी भूकंपीय एक्टिविटी 

इसी एनालिसिस में 1399 भूकंप आने की बात बताई गई है. जो पिछले रिकॉर्ड्स की तुलना में काफी ज्यादा थे. रिसर्चर को साल 2017 में किए गए न्यूक्लियर टेस्ट के बाद एक अलग और असामान्य पैटर्न नजर आया. आमतौर पर ऐसा होता है कि टेस्ट के बाद भूकंप आते हैं लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे कम हो जाते हैं. पर इस मामले में ऐसा नहीं हुआ. 2017 में हुए न्यूक्लियर टेस्ट के करीब 3 हफ्ते के बाद इलाके के आस-पास भूकंपीय एक्टिविटी बढ़ने लगी.

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साल 2025 में भूकंप के मामलों और उनकी तीव्रता दोनों में काफी बढ़त हुई. भूकंप के बारे पड़ताल करने पर पता चला कि उनके केंद्र इलाके के जमीन के निचली सतह पर स्थित दो फॉल्ट लाइनें थी. रिपोर्ट के मुताबिक, बार-बार न्यूक्लियर टेस्ट करने की वजह से ऊपरी क्रस्ट को काफी नुकसान हुआ. हो सकता है कि इसकी वजह से फॉल्ट लाइनें पहले से टूटने की कगार पर थीं. पर वे धीरे-धीरे कई सालों में फिर से एक्टिव हो गए. 

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