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जवान बिना इजाज़त सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो नहीं करेंगे शेयर

सरकार की तरफ से गाइडलाइन आ गई हैं.

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तेज बहादुर यादव और जीत सिंह.

अभी तक मौजूदा सरकार में हो ये रहा था कि आप किसी बात पर कुछ कहिये देशभक्ति का सर्टिफिकेट तलब कर लिया जा रहा था. सवाल करने पर सोल्जर, सोल्जर चिल्ला दिया जाता था. आर अब जब सोल्जर ने खुद ही बोलना शुरू कर दिया. तो सरकार के देशभक्ति वाले गुब्बारे की हवा निकलनी शुरू हो गई है. गुब्बारे की हवा न निकले इस कोशिश में सरकार जुट गई है. तभी तो जवानों के लिए ऐसी गाइडलाइन जारी की हैं कि सोल्जर खामोश हो जाए और वो खुद सोल्जर सोल्जर चिल्लाकर आपको डरा सके. हालांकि सुरक्षा के लिहाज़ से सोशल मीडिया के इस्तेमाल में एहतियात बरतना बहुत जरूरी है.

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मिनिस्टर किरण रिजिजू का कहना है, 'हमारी सरकार जवानों की परेशानियों को निपटाने के लिए कमिटेड है. आर्मी के अनुशासन में कोई गिरावट नहीं आए, इसके लिए गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं'
होम मिनिस्ट्री के एक अफसर का कहना है, 'ये दोनों वाकये हैरान करने वाले हैं. ​अब बगैर इजाजत के वीडियो और तस्वीरों को शेयर करने पर सर्विस रूल्ज के तहत कार्रवाई की जाएगी. यह सरकार के लिए चुनौती बन गया है. सोशल मीडिया पर गुप्त जानकारी शेयर होने से अनुशासन पर भी आंच आती है.'

पहले BSF जवान, फिर CISF का जवान और इसके बाद आर्मी का जवान. तीनों ने सिस्टम की शिकायत की. और माहौल गरमा गया. अफसरों पर कहीं ये इल्ज़ाम लगा कि जवानों का राशन बेचकर खा जा रहे हैं तो कहीं अफसर जूता पॉलिश करा रहे हैं. जवानों के ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए. जवानों की शिकायतें दूर करने से पहले होम मिनिस्ट्री ने जवानों पर ही पाबंदी लगा दी है. वो पाबंदी ये है कि पैरामिलिटरी जवान सोशल मीडिया पर बगैर इजाज़त तस्वीरें और वीडियो शेयर नहीं करेंगे. एक के बाद एक पैरामिलिटरी जवानों के वीडियो सामने आ रहे थे, उन वीडियो में जवानों ने ड्यूटी के दौरान खराब खाने से लेकर अपने खिलाफ होने वाली ज्यादती की शिकायत कर रहे थे. जिस तरह ये वीडियो सामने आ रहे थे तभी लग रहा था कि कहीं जवानों के मोबाइल रखने पर पाबंदी न लग जाए. कहीं सोशल मीडिया यूज़ करने पर पाबंदी न लग जाए. ऐसा पूरी तरह तो हुआ नहीं, लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो और फोटो अपलोड करने पर पाबंदी लगा दी गई है. खबर ये भी है कि कुछ यूनिट में स्मार्टफोन पर भी पाबंदी लगा दी गई है. आर्मी चीफ ने स्मार्टफ़ोन पर पाबंदी से इंकार किया है. द टेलिग्राफ के मुताबिक, अगर कोई भी जवान ट्विटर, फेसबुक, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम, यू ट्यूब यानी सोशल मीडिया पर तस्वीर या वीडियो पोस्ट करना चाहता है तो उसके लिए अपनी फोर्स के डायरेक्टर जनरल से इसकी इजाजत लेनी होगी. निजी मेसेज पोस्ट करने पर कोई पाबंदी नहीं है. सात सेंटर पैरामिलिटरी फोर्सेज के डायरेक्टर जनरल को ये गाइडलाइंस भेज दी गई हैं कि सर्विस रूल्ज प्रविजन को सख्ती से लागू कराया जाए. इस प्रविजन के तहत किसी भी जवान को ऑफिशियल मामलों पर अपनी राय पब्लिक बीच लाने का कोई हक़ नहीं है. पहले बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने सोशल मीडिया पर कुछ​ वीडियो अपलोड किए. इसमें उन्होंने दिखाया कि जवानों को कितना घटिया खाना दिया जाता है. कई बार तो भूखे पेट ही सोना पड़ जाता है और अफसर सरकार का भेजा हुआ राशन बेचकर खा जाते हैं. इसके बाद सीआरपीएफ के जवान जीत सिंह का वीडियो सामने आया. उन्होंने सैलरी, पेंशन और खाने को लेकर आर्मी और पैरामिलिटरी फोर्सेज में भेदभाव किए जाने की शिकायत की. गाइडलाइंस में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि अगर किसी जवान की कोई शिकायत है तो वह ई-लेटर्स के जरिए कंप्लेन कर सकेगा और इसपर फौरन सुनवाई के साथ ही इसका निपटारा सुनिश्चित किया जाएगा

सेना में स्मार्टफोन पर पाबंदी!

एबीपी का सूत्रों के हवाले से कहना है कि सेना में भी कई यूनिट्स में स्मार्ट फोन पर पाबंदी लगा दी गई है. सरकार ने कहा है कि जवानों को इसका सख्ती से पालन करना होगा. इस आदेश के बाद जवान तस्वीरें खींचकर ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सएप्प, यूट्यूब या इंस्टाग्राम पर नहीं डाल सकते. हालांकि यह नियम पहले से था कि ड्यूटी के समय आप मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर सकते. अब इस नियम को सख्ती के साथ लागू किया जाएगा. आर्मी चीफ बिपिन रावत ने कहा है कि स्मार्टफोन पर बैन की खबर झूठी है. आर्मी ने ऐसी कोई पाबंदी नहीं लगाई है.
 

'आर्मी अफसर जितना प्रताड़ित करते हैं, कोई और होता तो सुसाइड कर लेता'

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