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अमेरिका-इजरायल के हमले बेअसर, ईरान फिर बना रहा अपना न्यूक्लियर ठिकाना!

Institute for Science and International Security की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान के करीब Parchin Military Complex में स्थित Taleghan 2 को ईरान तेजी से फिर तैयार कर रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों में Construction Vehicles और नई Concrete Reinforcement दिखाई दी है.

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इजरायल ने जिस ठिकाने पर बम गिराए थे, वहां फिर से कंस्ट्रक्शन हो रहा है (COURTSEY- Vantor, X)

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  • अमेरिका और इजरायल ने बताया कि ईरान ने 'तालेघन 2' फैसिलिटी को दोबारा बनाने का काम तेज कर दिया है, जो पहले इजरायल के हमलों में क्षतिग्रस्त हुई थी और न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के लिए उपयोग होती है।
  • ईरान ने लंबे समय से परमाणु हथियार बनाने से इंकार किया है, जबकि अमेरिका और इजरायल ने इस पर संदेह जताते हुए 'तालेघन 2' और अन्य ठिकानों पर बमबारी की, जिससे यह फैसिलिटी नष्ट हुई थी।
  • ईरान द्वारा 'तालेघन 2' को फिर से बनाने से पता चलता है कि वह अपनी न्यूक्लियर गतिविधियों को जारी रखना चाहता है, जिससे क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है और आगे की सैन्य कार्रवाइयों की संभावना बनी रह सकती है।

अमेरिका और इजरायल जंग की शुरुआत से ईरान के खिलाफ एक ही चीज कहते आ रहे हैं कि ईरान न्यूक्लियर हथियार बना रहा है. ईरान ने हमेशा इस बात से इंकार किया है. उसका कहना है कि वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा. उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है. फिर भी, जब जंग शुरू हुई तो अमेरिका-इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर खूब बम बरसाए. अब खबर है कि ईरान अपने नुकसान की भरपाई भी करने लगा है. 

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'इंस्टिट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी' की एक रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा गया कि तेहरान से लगभग 30 किलोमीटर (20 मील) साउथ-ईस्ट में पारचिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स में 'तालेघन 2' फैसिलिटी को फिर से बनाया जा रहा है. इस फैसिलिटी पर पहले इजरायल ने बमबारी की थी.

रिपोर्ट में क्या है?

वॉशिंगटन स्थित इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट कहती है कि ईरान 'तालेघन 2' फैसिलिटी को फिर से बनाने का काम तेजी से कर रहा है. इजरायल ने अक्टूबर 2024 में 'तालेघन 2' पर हमला किया था. फिर मार्च 2026 में इजरायली एयरफोर्स ने इस पर फिर से बमबारी की. इजरायली सेना का कहना था कि पहले हमले के बाद ईरान इस जगह को फिर से तैयार कर रहा था.

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IDF (इजराइली सेना) ने कहा कि बीते कुछ सालों में ईरान ने इस जगह का इस्तेमाल एडवांस्ड विस्फोटक बनाने और AMAD प्रोजेक्ट के तहत संवेदनशील एक्सपेरिमेंट्स करने के लिए किया है. AMAD, ईरान के कथित गुप्त न्यूक्लियर वेपन डेवलपमेंट प्रोग्राम का नाम है. वहीं, पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियों का मानना ​​है कि तेहरान ने दो दशक से भी पहले 'तालेघन 2' में न्यूक्लियर बम विस्फोट से जुड़े टेस्ट किए थे.

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सैटेलाइट तस्वीरों में तालेघन-2 पर कंस्ट्रक्शन का सामान दिख रहा है (Courtsey- Vantor VIA Institute for Science and International Security)

वैंटोर टेक्नोलॉजीज की सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान ने जमीन के नीचे बनी उस मजबूत फैसलिटी के ऊपर एक तिरपाल लगा दिया है. इस जगह को हमले में तबाह कर दिया गया था. इससे सैटेलाइट या हवाई निगरानी से नीचे चल रहा कंस्ट्रक्शन का काम छिप जाता है. रिपोर्ट में कहा गया,

कंस्ट्रक्शन वाली जगह पर काफी हलचल देखी जा सकती है. डंप ट्रक, बुलडोजर, कंक्रीट पंप ट्रक, कंक्रीट मिक्सर और क्रेन जैसी कंस्ट्रक्शन वाली गाड़ियां इस फैसलिटी को दोबारा बनाने के काम में तेजी से जुटी हुई हैं.

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फैसिलिटी में कंक्रीट की मजबूती दी गई है ताकि हवाई हमलों से अतिरिक्त सुरक्षा मिले (Courtsey- Vantor VIA Institute for Science and International Security)
जून 2026 में शुरु हुआ था कंस्ट्रक्शन

इंस्टिट्यूट ने बताया कि जून 2026 में तलेघान 2 में शुरुआती मरम्मत का काम हुआ. इसमें ईरान ने इजरायली एयरफोर्स के कई बंकर-बस्टर हथियारों से हुए छेदों की मरम्मत की गई. इसके बाद उन पर कंक्रीट के कैप लगाए गए. तस्वीरों से पता चलता है कि ईरान ने इस जगह के दाईं ओर एक नया कंक्रीट एप्रन रीइन्फोर्समेंट भी बनाया है. रिपोर्ट में कहा गया कि इससे हवाई हमले से अतिरिक्त सुरक्षा मिलती है. इंस्टिट्यूट ने कहा, 

इस जगह को लेकर ईरान की योजनाओं पर कई अहम सवाल हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान बार-बार इसे क्यों बना रहा है. साफ बात यह है कि ईरान इस जगह को फिर से बनाने के लिए प्रतिबद्ध है. यह बात बहुत चिंताजनक है, क्योंकि यहां न्यूक्लियर हथियारों के रिसर्च और डेवलपमेंट की गतिविधियां होती रही हैं.

(यह भी पढ़ें: ईरान की तरह चीन भी बना रहा अंडरग्राउंड मिसाइल सिटी, सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा)

ईरान के नेता इजरायल को खत्म करने की कसम खा चुके हैं. पर ईरान न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाने का दावा करता है. लेकिन उसने ऐसा यूरेनियम जमा कर लिया है जिसे किसी शांतिपूर्ण काम में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. दूसरी ओर इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को खत्म करने की कसम खाई है.

वीडियो: ईरान ने चीनी सैटेलाइट से अमेरिकी बेस पर सटीक हमला कैसे किया? रिपोर्ट ने बताया

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