पंजाब से आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) को दिल्ली में मिला अपना सरकारी बंगला खाली करना पड़ सकता है. दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने राघव चड्ढा के बंगला खाली करने के मामले में लगाई गई अपनी अंतिम रोक हटा ली है. कोर्ट राघव चड्ढा और राज्यसभा सचिवालय के बीच टाइप-7 बंगले के आवंटन को लेकर एक मामले की सुनवाई कर रहा था.
AAP सांसद राघव चड्ढा को कोर्ट से झटका, सरकारी बंगला खाली करना पड़ सकता है
दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने राघव चड्ढा के बंगला खाली करने के मामले में लगाई गई अपनी अंतिम रोक हटा ली है.


राघव चड्ढा को पिछले साल दिल्ली के पंडारा रोड पर टाइप-7 बंगला आवंटित हुआ था. इसी बंगले का आवंटन इस साल मार्च में राज्यसभा सचिवालय ने रद्द कर दिया था. इंडिया टुडे की सृष्टि ओझा और संजय शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक राघव चड्ढा को बताया गया था कि पहली बार के सांसद के तौर पर उन्हें टाइप-7 बंगला आवंटित नहीं किया जा सकता है और उन्हें एक फ्लैट आवंटित किया गया. इसके बाद, राघव चड्ढा राज्यसभा सचिवालय के पत्र के खिलाफ दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट पहुंचे. कोर्ट ने 18 अप्रैल को राज्यसभा सचिवालय के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें चड्ढा को अपना टाइप-7 आवास खाली करने को कहा गया था. उस आदेश को राज्यसभा सचिवालय ने चुनौती दी.
अब, 6 अक्टूबर को पटियाला हाउस कोर्ट ने राघव चड्ढा के टाइप-7 बंगला खाली करने के मामले में लगाए गई अंतरिम रोक हटा दी है. साथ ही कोर्ट ने राज्यसभा सचिवालय के बंगला खाली करने के नोटिस को सही ठहराया है. कोर्ट का कहना है कि राघव चड्ढा का आवंटन 3 मार्च, 2023 को रद्द कर दिया गया था, इसलिए वो ये दावा नहीं कर सकते कि आवंटन रद्द होने के बाद भी राज्यसभा सदस्य के तौर पर अपने पूरे कार्यकाल के दौरान उन्हें सरकारी आवास पर रहने का अधिकार है. सरकारी आवास का आवंटन केवल उन्हें दिया गया विशेषाधिकार है.
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रिपोर्ट के मुताबिक राघव चड्ढा को जुलाई 2022 में टाइप-6 बंगला आवंटित किया गया था. अगस्त 2022 में उन्होंने राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ से टाइप-7 बंगला आवंटित करने का अनुरोध किया. इसके बाद उन्हें दिल्ली के पंडारा रोड पर टाइप-7 बंगला आवंटित कर दिया गया था.
राज्यसभा के सदस्यों के लिए बनाए गए हैंडबुक (Handbook for Members of Rajya Sabha) में नियम कहते हैं कि पहली बार सांसद बने नेताओं, जैसे राघव चड्ढा, को आधिकारिक आवास के तौर पर टाइप-5 आवास या सिंगल फ्लैट मिल सकता है.
अगली कैटेगरी, टाइप-6 बंगले या ट्विन फ्लैट, उन सांसदों के लिए होते हैं जो केंद्रीय कैबिनेट में पूर्व राज्य मंत्री, लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष, राज्यसभा के पूर्व उपसभापति, पूर्व उप मुख्यमंत्रियों, राज्य की कैबिनेट में पूर्व मंत्री, लोकसभा या राज्यसभा में एक टर्म पूरा कर चुके सदस्य, मनोनीत सदस्य, राज्यसभा में राष्ट्रीय पार्टियों के फ्लोर लीडर वगैरह के लिए होते हैं.
वहीं टाइप-7 बंगले उन सांसदों को आवंटित किए जाते हैं जो पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, पूर्व राज्यपाल या पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष होते हैं. हालांकि, हैंडबुक में कहा गया है कि हाउस कमिटी के अध्यक्ष को हर मामले के आधार पर अपवाद का अधिकार है.






















