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बॉडी में ये फैट ज्यादा है तो कैंसर हो सकता है, जानें वजन घटाने से खतरा जाएगा या नहीं

World Health Organization की एक रिपोर्ट से ये पता चला है. Global Status Report On Cancer 2026 बताती है कि हर 5 में से 1 व्यक्ति को कभी-न-कभी कैंसर हो सकता है और इसका असर लगभग हर व्यक्ति की ज़िंदगी पर पड़ता है.

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कमर का बढ़ता घेरा कैंसर का रिस्क बढ़ाता है

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  • विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, मोटापा शरीर में 13 प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है और यह कैंसर से जुड़ी प्रमुख स्वास्थ्य समस्यों में से एक है।
  • कैंसर की विकास प्रक्रिया में मोटापे से जुड़े हॉर्मोनल असंतुलन, इंसुलिन रेजिस्टेंस और भीतर की सूजन मुख्य कारण हैं, जो कैंसर सेल्स के अनियंत्रित विकास में योगदान देते हैं।
  • मोटापा कम करने से शरीर की सूजन और हॉर्मोन संतुलन में सुधार होता है, जिससे कैंसर का जोखिम 18% से 25% तक घट सकता है, और इससे जुड़ी स्वास्थ्य जटिलताएं भी कम हो सकती हैं।

‘हर साल दुनियाभर में कैंसर के 2 करोड़ से ज़्यादा नए मामले सामने आते हैं और लगभग 1 करोड़ लोगों की जान चली जाती है. कैंसर की वजह से पूरी दुनिया में लाखों लोग शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं.’

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World Health Organization की एक रिपोर्ट से ये पता चला है. Global Status Report On Cancer 2026 बताती है कि हर 5 में से 1 व्यक्ति को कभी-न-कभी कैंसर हो सकता है और इसका असर लगभग हर व्यक्ति की ज़िंदगी पर पड़ता है.

दुनियाभर में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण कैंसर ही है. पर खुद कैंसर होने की कोई एक सटीक वजह नहीं है. हां, कई रिस्क फैक्टर्स हैं, जो इसका जोखिम बढ़ाते हैं. इन्हीं में से एक है ‘मोटापा’. आपकी कमर का बढ़ता हुआ घेरा, हाई बॉडी मास इंडेक्स और शरीर में जमा ज़्यादा फैट कैंसर की वजह बन सकता है.

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मोटापा होने पर कितने तरह के कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है, ये जानेंगे आज. डॉक्टर से ये भी समझेंगे कि मोटापा शरीर में कैंसर का रिस्क क्यों बढ़ाता है. विसरल फैट क्या है, और ये कैंसर से कैसे जुड़ा है. और क्या वज़न कम करने से मोटापे से जुड़े कैंसर का ख़तरा कम किया जा सकता है.

कमर का बढ़ा हुआ घेरा कैंसर का रिस्क बढ़ाता है?

ये हमें बताया डॉक्टर अश्वनी कुमार शर्मा ने. 

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डॉ. अश्वनी कुमार शर्मा, वाईस चेयरमैन, मनिपाल कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर एंड ओंको रोबोटिक्स सर्जरीज़ नॉर्थ-वेस्ट क्लस्टर

कमर का बढ़ा हुआ घेरा, मोटापा और हाई BMI आपकी लाइफस्टाइल से जुड़े ज़रूरी फैक्टर्स हैं. ये कैंसर के साथ-साथ कई दूसरी बीमारियों का रिस्क भी बढ़ाते हैं. जैसे कार्डियोवस्कुलर डिज़ीज़ और टाइप-2 डायबिटीज़. खासकर युवाओं में इनका रिस्क ज़्यादा होता है. कैंसर के रिसर्च से जुड़ी एक इंटरनेशनल एजेंसी है IARC. इसके मुताबिक, मोटापे की वजह से 13 तरह के कैंसर हो सकते हैं. जैसे बच्चेदानी का कैंसर, एसोफैगल कैंसर, पेट का कैंसर, किडनी का कैंसर, मल्टीपल मायलोमा (एक तरह का ब्लड कैंसर), ब्रेस्ट कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर, गॉलब्लैडर और पैंक्रियाज़ का कैंसर.

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मोटापा शरीर में कैंसर का ख़तरा क्यों बढ़ाता है?

हाई BMI और मोटापा, कैंसर के रिस्क फैक्टर्स हैं. मोटापा होने पर शरीर में लंबे वक्त तक अंदरूनी सूजन रहती है. इससे DNA को नुकसान पहुंचता है. सेल्स अनियमित तरीके से बनने लगते हैं, जिससे कैंसर हो सकता है. मोटापे की वजह से इंसुलिन रेज़िस्टेंस और हॉर्मोन्स का असंतुलन भी होता है. ऐसे में जिन महिलाओं का मेनोपॉज़ हो चुका है, उनमें एस्ट्रोजन हॉर्मोन बढ़ जाता है. इससे ब्रेस्ट कैसर और एंडोमेट्रियल कैंसर का ख़तरा बढ़ता है. 

मोटापे की वजह से शरीर का इम्यून सिस्टम भी ठीक से काम नहीं कर पाता. शरीर के T-सेल्स, जो कैंसर सेल्स का पता लगाकर उन्हें खत्म करते हैं. ये T-सेल्स भी अपना काम पूरी तरह नहीं कर पाते. इससे कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है.

अगर मोटापे से जूझ रहे किसी व्यक्ति को कैंसर हो. तब उनमें कैंसर आक्रामक होने और कैंसर से मौत का ख़तरा बढ़ जाता है. कैंसर का इलाज भी ऐसे मरीज़ों पर कम असरदार रहता है. साथ ही, सर्जरी से जुड़ी परेशानियां भी ज़्यादा होती हैं.

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विसरल फैट शरीर के अंगों के आसपास जमा होने वाला फैट है (फोटो: Adobe Stock)
कैंसर से कैसे जुड़ा है विसरल फैट?

विसरल फैट शरीर के अंदर गहराई में जमा होने वाला फैट है. ये स्किन के नीचे जमा होने वाले फैट से अलग होता है. विसरल फैट पेट, छोटी आंत, पैंक्रियाज़ और लिवर के आसपास जमा होता है. इसके बढ़ने से शरीर में लंबे वक्त तक सूजन रहती है. इंसुलिन रेज़िस्टेंस और हॉर्मोन्स का संतुलन भी बिगड़ता है. इन सबसे कैंसर होने का ख़तरा बढ़ जाता है.

कितना BMI या कमर का घेरा कैंसर का रिस्क बढ़ाते हैं?

IARC के मुताबिक, BMI 30 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर से ज़्यादा होने पर शरीर में 13 तरह के कैंसर हो सकते हैं. कमर के घेरे की बात करें, तो अगर पुरुष में ये घेरा 40 इंच से ज़्यादा है. वहीं, महिलाओं में कमर का घेरा 35 इंच से ज़्यादा है, तो उन्हें कैंसर होने जोखिम रहता है.

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वज़न घटाकर मोटापे से जुड़े कैंसर का ख़तरा कम हो सकता है?

कई स्टडीज़ बताती हैं कि मोटापा कम करने से शरीर की अंदरूनी सूजन घटती है. इंसुलिन रेज़िस्टेंस भी कम होता है और हॉर्मोन्स के बीच संतुलन सुधरता है. इससे कैंसर होने का ख़तरा कम हो जाता है. अमेरिका में ऐसी 2 लाख महिलाओं पर एक स्टडी की गई, जिनका मेनोपॉज़ हो चुका था. पता चला कि 2 से साढ़े 4 किलो वज़न कम करने से ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क 18% कम हो जाता है. वहीं, अगर 9 किलो तक वज़न कम कर लिया जाए, तो कैंसर का ख़तरा 25% तक कम हो जाता है.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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