आपको हुआ सीने में दर्द. आपने तुरंत इसकी वजह AI से पूछी. होशियार AI ने जवाब दिया- सीने में दर्द गैस की वजह से भी हो सकता है और हार्ट अटैक की वजह से भी. आप परेशान कि कहीं हार्ट अटैक तो नहीं आ रहा. इस चक्कर में आपकी धड़कनें तेज़ हो गईं. बीपी बढ़ गया. आप तब तक टेंशन में रहे, जब तक दर्द दूर नहीं हो गया.
तबीयत बिगड़ते ही AI से पूछने की आदत साइबरकोंड्रिया का 'मरीज' बना देगी, सही समय और तरीका समझें
इंटरनेट और AI का इस्तेमाल एक जागरूक इंसान की तरह करना चाहिए. लक्षण डालकर खुद बीमारी का पता न लगाएं. इसके बजाय इसे सेहत से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए इस्तेमाल करें. जैसे हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के बारे में जानकारी ली जा सकती है.

अपने लक्षणों को बार-बार इंटरनेट पर सर्च करके खुद को किसी गंभीर बीमारी का मरीज़ मान लेना और फिर उसे लेकर खूब चिंता करना, साइबरकोंड्रिया कहलाता है. आजकल कई लोग इसी साइबरकोंड्रिया का शिकार हो रहे हैं. वो पहले गूगल या किसी AI प्लेटफॉर्म्स पर अपनी दिक्कत डालकर सर्च करेंगे. फिर जो रिज़ल्ट आएगा, उससे परेशान होंगे. इसलिए आज डॉक्टर से जानिए कि मेडिकल सलाह के लिए किस हद तक AI पर भरोसा किया जा सकता है. हर लक्षण ऑनलाइन सर्च करने के क्या नुकसान हैं. इंटरनेट और AI का सही इस्तेमाल कैसे करें. कब AI से पूछें और कब डॉक्टर के पास जाएं.
ऑनलाइन लक्षण सर्च करने का नुकसान
ये हमें बताया डॉक्टर हेमकांत वर्मा ने.

आजकल AI से जुड़े अलग-अलग प्लेटफॉर्म और चैटबॉट्स मौजूद हैं. यहां आप अपने लक्षणों के बारे में जानकारी ले सकते हैं. जैसे अगर किसी को सिरदर्द हो रहा है. वो इंटरनेट या AI प्लेटफॉर्म पर जाकर इसका कारण सर्च करता है. तब सिरदर्द के कई अलग-अलग कारण लिखकर आते हैं. अक्सर सिरदर्द की वजह बहुत सामान्य होती है. जैसे नींद पूरी न होना, चश्मे का नंबर बदल जाना, स्ट्रेस या कोई दूसरी सामान्य वजह. लेकिन जब आप इंटरनेट पर सिरदर्द के कारण सर्च करते हैं. तब कई बार बहुत गंभीर और रेयर बीमारियों के नाम सामने आ जाते हैं. जैसे ब्रेन ट्यूमर या ब्रेन एन्यूरिज़्म वगैरा. इससे कई बार व्यक्ति को बेवजह चिंता और घबराहट होने लगती है.
हर लक्षण ऑनलाइन सर्च करने का एक और नुकसान है. ऐसे लोग लक्षणों के आधार पर खुद ही बीमारी का पता लगाने लगते हैं. जैसे अगर किसी को छाती में दर्द हो रहा है तो वो उसे हार्ट अटैक, गैस या कोई रेयर बीमारी मान सकते हैं. यानी लोग खुद ही किसी बीमारी को अपनी समस्या से जोड़ लेते हैं और अपना डायग्नोसिस तय करने लगते हैं. कई लोग बिना डॉक्टर से पूछे फार्मेसी से दवाइयां लेकर इलाज तक शुरू कर देते हैं.
कई बार लोग ऐसी जांचें भी करा लेते हैं, जिनकी उन्हें कोई ज़रूरत नहीं होती. ये सब मरीज़ के लिए नुकसानदेह हो सकता है. वहीं, डॉक्टर सिर्फ लक्षणों के आधार पर डायग्नोसिस नहीं करते. वो मरीज़ की पूरी मेडिकल हिस्ट्री देखते हैं. जैसे समस्या कब शुरू हुई, कैसे बढ़ी और उसका खान-पान या लाइफस्टाइल से कोई संबंध है या नहीं. इसके बाद मरीज़ का फिज़िकल एग्ज़ामिनेशन किया जाता है. फिर ज़रूरत के हिसाब से डॉक्टर सही टेस्ट कराने की सलाह देते हैं.
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इंटरनेट और AI का सही इस्तेमाल
अगर अपने लक्षणों के बारे में इंटरनेट पर किसी भरोसेमंद सोर्स से जानकारी लें, तो काफ़ी फ़ायदा हो सकता है. इससे आपको सेहत से जुड़ी ज़रूरी जानकारी मिल सकती है. जैसे कैंसर के बारे में जागरूकता और वैक्सीनेशन. हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के तरीके पता किए जा सकते हैं. एक्सरसाइज़, योग और प्राणायाम के बारे में जानकारी ले सकते हैं. कैंसर के स्क्रीनिंग प्रोग्राम्स के बारे में पता किया जा सकता है. ये भी जान सकते हैं कि दिल और किडनी को हेल्दी रखने के लिए क्या करें. क्या खाएं और किस तरह जंक फूड से दूर रहें. यानी इंटरनेट और AI से काफी अच्छी और हेल्दी जानकारी मिल सकती है. लेकिन इसके लिए ज़रूरी है कि किसी भरोसेमंद सोर्स से ही जानकारी लें.
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कब AI से पूछें और कब डॉक्टर के पास जाएं?
इंटरनेट और AI का इस्तेमाल एक जागरूक इंसान की तरह करना चाहिए. लक्षण डालकर खुद बीमारी का पता न लगाएं. इसके बजाय इसे सेहत से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए इस्तेमाल करें. जैसे हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के बारे में जानकारी ली जा सकती है.
अगर किसी व्यक्ति को कोई बीमारी है और उसका इलाज चल रहा है. तब वो उस बीमारी के बारे में भरोसेमंद सोर्स से जानकारी हासिल कर सकता है. आगे बीमारी की स्थिति कैसी रह सकती है, इसके बारे में समझ सकते हैं. अगर सर्जरी हुई है, तो जल्दी रिकवरी के तरीके पता किए जा सकते हैं. यानी AI का इस्तेमाल जानकारी हासिल करने के लिए करें. खुद डायग्नोसिस करने या इलाज शुरू करने के लिए नहीं. बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने या जांच करवाने से बचें. अगर इंटरनेट पर किसी लक्षण के बारे में पढ़कर घबराहट या बेचैनी होने लगे. तब उस लक्षण को बार-बार सर्च न करें और जाकर डॉक्टर से मिलें.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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