नवजात बच्चों का खास ख्याल रखना बहुत ज़रूरी होता है. क्यों? क्योंकि वो नाजुक होते हैं. उनकी इम्यूनिटी कमज़ोर होती है. उन्हें इंफेक्शन का रिस्क ज़्यादा होता है. अगर बच्चों का ठीक से ध्यान न रखा जाए, तो उनके विकास पर असर पड़ सकता है. इसलिए चाहें डॉक्टर हों या परिवारवाले, अक्सर नवजात बच्चों की बहुत ज़्यादा केयर करते हैं. उनको बहुत ध्यान से रखते हैं.
नवजात बच्चों को खून के इंफेक्शन से कैसे बचाएं? इसके लक्षण भी समझ लीजिए
नवजात बच्चों में होने वाली एक-तिहाई मौतें सेप्सिस की वजह से होती हैं. इसका ख़तरा समय से पहले पैदा होने वाले और कम वज़न वाले बच्चों में ज़्यादा होता है.

कई बार इतना सब करने के बावजूद बच्चे को खून का इंफेक्शन हो जाता है. ऐसा खासकर एक महीने से कम उम्र के बच्चों में ज़्यादा होता है. जब बच्चे के खून में बैक्टीरिया या दूसरे कीटाणु फैल जाएं, तो इसे नियोनेटल सेप्सिस कहते हैं. ये एक गंभीर और जानलेवा कंडीशन है. इसी के बारे में आज हम सबकुछ पता करेंगे.
नियोनेटल सेप्सिस क्यों होता है?ये हमें बताया डॉक्टर राजीव कुमार थापर ने.

जन्म के 28 दिन के भीतर बच्चे में होने वाले गंभीर इंफेक्शन को नियोनेटल सेप्सिस कहते हैं. ये नवजात बच्चों की मौत का एक बड़ा कारण है. नवजात बच्चों में होने वाली एक-तिहाई मौतें सेप्सिस की वजह से होती हैं. इसका ख़तरा समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों में ज़्यादा होता है. कम वज़न वाले नवजात बच्चों में भी इसका ख़तरा ज़्यादा होता है.
नियोनेटल सेप्सिस दो तरह का होता है. पहला अर्ली-ऑनसेट नियोनेटल सेप्सिस है. ये आमतौर पर जन्म के पहले 3 दिनों के भीतर होता है. इसमें माना जाता है कि बच्चे को मां से इंफेक्शन मिला है. जैसे डिलीवरी से पहले मां की पानी की थैली फट गई हो. मां खुद बीमार हो, उसे UTI या कोई दूसरा इंफेक्शन हो. ऐसे बच्चों में सांस लेने में परेशानी, दूध पीने में दिक्कत या बहुत ज़्यादा सुस्ती जैसे लक्षण हो सकते हैं.
दूसरा लेट-ऑनसेट नियोनेटल सेप्सिस है, ये जन्म के 3 दिन के बाद होता है. इसमें बच्चे को इंफेक्शन आसपास के वातावरण से हो सकता है. लेट-ऑनसेट सेप्सिस में ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया भी इंफेक्शन की एक वजह हो सकते हैं.
ये भी पढ़ें: आपकी ही कुछ गलतियों से लिवर सूज रहा, हेपेटाइटिस से बचने के लिए डॉक्टर की ये बातें मानें
नियोनेटल सेप्सिस के लक्षण- नवजात बच्चों में इसके लक्षण बहुत सामान्य होते हैं.
- इसमें बच्चा अचानक सुस्त हो सकता है.
- बच्चा सामान्य से कम दूध पीने लगता है.
- बच्चा पहले की तरह एक्टिव नहीं रहता.
- वो अपने हाथ-पैर भी सामान्य से कम चलाता है.
- बच्चे के सिर के ऊपर का नरम हिस्सा सामान्य से उभरा हुआ या भरा हुआ लग सकता है.

बच्चे का कंप्लीट ब्लड काउंट (CBC) किया जा सकता है. CRP और प्रोकैल्सिटोनिन टेस्ट भी किए जा सकते हैं. ब्लड कल्चर को सेप्सिस की जांच के लिए एक अहम टेस्ट माना जाता है. आमतौर पर एंटीबायोटिक शुरू करने से पहले ब्लड कल्चर टेस्ट ज़रूरी होता है. इससे ये तय करने में मदद मिलती है कि कौन-सी एंटीबायोटिक बेहतर काम करेगी. अगर लेट-ऑनसेट सेप्सिस का शक हो, तो बच्चे की कमर से स्पाइनल फ्लूइड यानी CSF का सैंपल लिया जा सकता है. इससे पता लगाया जाता है कि इंफेक्शन कहीं दिमाग तक तो नहीं पहुंचा है.
अगर दिमाग में इंफेक्शन पाया जाता है, तो करीब 3 हफ्ते तक एंटीबायोटिक्स देनी पड़ती हैं. अगर ब्लड कल्चर पॉज़िटिव आता है, तो करीब 14 दिन तक एंटीबायोटिक्स दी जा सकती हैं. वहीं, अगर ब्लड कल्चर निगेटिव हो, तो सिर्फ़ 7 दिन तक एंटीबायोटिक्स की ज़रूरत पड़ती है.
ये भी पढ़ें: धड़कता रहता है दिल, फिर भी हो जाती है बाईपास सर्जरी, पता है कैसे?
कुछ बच्चों को सांस लेने में मदद के लिए रेस्पिरेटरी सपोर्ट देना पड़ सकता है. ज़रूरत के मुताबिक, बच्चे को ऑक्सीजन, CPAP या वेंटिलेटर पर रखा जा सकता है. बच्चे का ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर सामान्य रखने के लिए भी ज़रूरी सपोर्ट दिया जाता है. इन सबका मकसद बच्चे को संभालकर रखना है, ताकि एंटीबायोटिक अपना काम कर सके और बच्चा धीरे-धीरे इंफेक्शन से ठीक हो सके.
बच्चे को नियोनेटल सेप्सिस से बचाना है, तो प्रेग्नेंसी के दौरान ज़रूरी वैक्सीन समय पर लगवाएं. अगर प्रेग्नेंसी में कोई इंफेक्शन हो, तो अपना इलाज ज़रूर करवाएं. बच्चे का जन्म हमेशा अस्पताल में साफ-सुथरी जगह पर हो. जन्म के शुरुआती दिनों में बच्चे को छूने या संभालने से पहले हाथ हमेशा साबुन से धोएं. जन्म के तुरंत बाद उसे सिर्फ मां का दूध पिलाएं, और अगर घर में कोई सदस्य बीमार हो, तो कुछ वक्त के लिए उसे बच्चे के पास न आने दें.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
वीडियो: सेहत: क्या आपका लिवर धीरे-धीरे सूज रहा है?









