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यूपीः चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना से मौत पर 30 लाख मुआवजा मिलेगा, लेकिन ये शर्त है

यूपी सरकार ने कोरोना काल में पंचायत चुनाव के दौरान जान गंवाने वाले सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों के लिए बड़ा फैसला किया है. सरकार इन कर्मचारियों के परिजनों को 30-30 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगी. इसके लिए सरकार ने नियमों में बदलाव किया है. इसके मुताबिक, अगर चुनाव ड्यूटी के 30 दिन के अंदर किसी कर्मचारी की मृत्यु हुई होगी, तो उसके परिजन मुआवजे के पात्र होंगे. इस नियम का असर ये होगा कि पहले जहां महज 74 परिवार ही मुआवजे के दायरे में आ रहे थे, अब तकरीबन 1000 कर्मचारियों के आश्रित ये मुआवजा पा सकेंगे.

लाभार्थियों की नई लिस्ट बनेगी

योगी आदित्यनाथ सरकार की सोमवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में इस बारे में प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. चुनाव ड्यूटी की तारीख से 30 दिन की समयसीमा किस आधार पर तय की गई, इसके बारे में यूपी सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने जानकारी दी. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस अखबार को बताया कि संजय गांधी पोस्टग्रैजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (SGPGIMS) की सलाह लेकर ये समय तय किया गया है.

एडिशनल सेक्रेटरी मनोज कुमार सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस अखबार को बताया कि

इलेक्शन ड्यूटी से 30 दिन का पैमाना इस लिहाज से तय किया गया है कि ज्यादा से ज्यादा प्रभावित परिवार इसके दायरे में आ जाएं. इसका अप्रूवल प्रदेश की कोविड-19 सलाहकार परिषद और SGPGI के डायरेक्टर ने भी किया है.

नियमों में बदलाव के बाद अब सरकार हर जिले से लाभार्थियों की जानकारी जुटाएगी. मृतक कर्मचारी के परिवार का कोई भी सदस्य इस अनुग्रह राशि के लिए आवेदन कर सकेगा. जिला प्रशासन की ओर से उसे सत्यापित किया जाएगा.

कर्मचारी, शिक्षक संगठन ने लड़ी लड़ाई

योगी सरकार का ये फैसला चुनाव ड्यूटी में मरने वालों की सही संख्या को लेकर विवाद के बाद आया है. शिक्षक संगठनों ने दावा किया था कि चुनाव ड्यूटी के दौरान 1600 से ज्यादा शिक्षकों की मौत हुई. जबकि सरकार ने कहा था कि उसे सिर्फ 3 की ही मौत की रिपोर्ट मिली है. ऐसे में इन्हीं के परिजन मुआवजे के पात्र हैं.

इसे लेकर विवाद ज्यादा बढ़ा तो सरकार ने अपने आदेश को बदल दिया. इसमें उन कर्मचारियों को भी शामिल किया गया, जिनकी मौत चुनाव ड्यूटी शुरू होने से खत्म होने के बीच कोरोना संक्रमण से हुई थी. सरकार ने चुनाव आयोग की पोल ड्यूटी की परिभाषा को स्वीकार किया. इसके आधार पर कर्मचारी के घर से जाने और चुनाव ड्यूटी पर पूरी करके घर वापस आने तक के समय को मुआवजे का आधार माना गया.

हालांकि इसके बाद भी सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के संगठन नियमों में बदलाव की मांग कर रहे थे. उनका कहना था कि चुनाव ड्यूटी करने वाले कर्मचारी की मौत कोरोना संक्रमण की चपेट में आने के हफ्तों बाद भी हो सकती है. ऐसे में उसके परिवार को भी मुआवजे का हकदार माना जाए. इसी के बाद 30 दिन वाला नियम लाया गया है.

Up Election Duty

यूपी में हुए पंचायत चुनाव के दौरान तमाम कर्मचारियों और शिक्षकों की कोरोना संक्रमण से मौत हुई थी. (फोटो-पीटीआई)

मुआवजे के लिए क्या करना होगा?

सरकार ने मुआवजा पाने के हकदार लोगों के लिए आवेदन करने के नियम-कायदे भी बना दिए हैं. इंडिया टुडे के अनुसार,

# मुआवजा पाने के लिए लाभार्थी को मृतक कर्मचारी की एंटीजन या RT-PCR टेस्ट की रिपोर्ट सबमिट करनी होगी.

# खून की जांच या सीटी स्कैन को भी संक्रमण के प्रमाण के तौर पर स्वीकार किया जाएगा.

# जिन कर्मचारियों की मौत कोरोना संक्रमण खत्म होने के बाद, स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से हुई है, उनके परिवार भी मुआवजा पाने के अधिकारी होंगे. मतलब अगर ड्यूटी के बाद किसी की कोरोना संक्रमण रिपोर्ट निगेटिव आई हो, लेकिन फिर भी तय 30 दिन के भीतर उसकी मौत हुई हो, तो उसका परिवार भी मुआवजा क्लेम कर सकेगा.


वीडियो – यूपी पंचायत चुनाव की ड्यूटी में लगे शिक्षकों की मौत में योगी सरकार सिर्फ 3 मौतें क्यों मान रही?

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