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मिडिल आर्डर के बल्लेबाजों पर क्या बोले कोच रवि शास्त्री?

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बुधवार को आइसीसी वर्ल्ड कप 2019 टूर्नामेंट का पहला सेमीफाइनल. न्यूजीलैंड बनाम टीम इंडिया. बैटिंग ऑर्डर में हुए बदलावों को लेकर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं. इंडियन क्रिकेट फैंस के लिए धोनी का सातवें नंबर पर आना उनकी नाराजगी का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है. टीम इंडिया के कई पूर्व क्रिकेट दिग्गज भी टीम मैनेजमेंट के इस फैसले पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर कर चुके हैं. बाहर लोग ये भी जानना चाहते थे कि मिडिल ऑर्डर के लिए कोच और टीम की तरफ़ से कोई सॉलिड प्लानिंग क्यों नहीं की गई.

लोग इस मसले पर कोच रवि शास्त्री की राय जानना चाहते थे कि इतने बड़े मैच में ये रणनीति क्यों बनाई गई. अगर ये किसी तरह का एक्सपेरिमेंट था. तो सेमीफाइनल में ही क्यों किया गया. किस्म-किस्म केसवाल इंडियन कोच का मुंह ताक रहे थे. सेमीफाइनल में हार के बाद पहली बार मिडिल ऑर्डर पर कोच रवि शास्त्री ने अब चुप्पी तोड़ी है. शास्त्री ने बताया है कि मिडिल ऑर्डर के बारे में उनकी क्या रणनीति थी.

# क्या कहा शास्त्री ने

मिडिल ऑर्डर काम नहीं कर सका, ख़ासतौर पर नंबर 4. इसका गेम पर बुरा असर हुआ. हां, हमें 4 नंबर पर एक टिकाऊ और ठोस बैट्समैन चाहिए. लेकिन अब ये भविष्य की बात है. ये वो पोज़ीशन है, जिसकी वजह से हमेशा दिक्कतें हुई हैं. लेकिन हम अब तक इसका समाधान नहीं निकाल सके. के.एल राहुल वहां थे, लेकिन शिखर धवन चोटिल हो बैठे. फिर हम विजयशंकर को लाए और वो भी चोट खा गए. इस पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं था. यही खेल है. अनिश्चितता ही नियम है. 

# धोनी पर क्या बोले कोच-

शास्त्री ने धोनी को सातवें नंबर पर भेजने के फैसले का भी बचाव किया है. शास्त्री का कहना है कि अगर धोनी पहले आउट हो जाते तो टीम के लिए लक्ष्य का पीछा करना मुश्किल हो जाता.

ये फैसला पूरी टीम का था और एक आसान फैसला था. अगर धोनी पहले बैटिंग के लिए आते और वो जल्दी आउट हो जाते तो फिर लक्ष्य का पीछा करने का सारा खेल ही बिगड़ जाता. हमें उनके अनुभव की बाद में जरूरत थी. वो दुनिया के सबसे बड़े फिनिशनर हैं. अगर हम उनका इस्तेमाल सही समय पर नहीं करते तो फिर उनके साथ और टीम के साथ न्याय नहीं होता.

धोनी शानदार खिलाड़ी है और वे सही तरीके से लक्ष्य की तरफ बढ़ रहे थे. उन्हें पता था कि अंतिम ओवर जिमी नीशम डालेंगे और वे उसी हिसाब से मैच में बल्लेबाजी कर रहे थे. वे दुर्भाग्य से गुप्टिल की डायरेक्ट थ्रो पर रन आउट हो गए. जब वो पवेलियन की ओर लौट रहे थो तो इसकी निराशा उनके चेहरे पर साफ देखी जा सकती थी.

हालांकि मैच देखने वाले बड़े-बड़े दिक्खाड़ ये सब बातें कबकी करके खा-पचा चुके हैं. भारतीय जनता ऑफ़ दी ग्राउंड कितनी बड़ी ‘रायचंद’ है ये सब जानते हैं. अब जो होना था सो हो चुका. सांप निकल गया. अब लक़ीर पीटने का क्या फ़ायदा. कप जहां जाना है वहां जाएगा ही. आप तो चाय पियो.

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