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पीएम केयर्स फंड को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस लोकुर ने सरकार पर क्या सवाल उठा दिए?

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस मदन लोकुर ने पीएम केयर्स फंड (PM CARES) पर बड़ा सवाल उठाया है. इस फंड में आने वाले पैसे कहां कहां पर खर्च किए जा रहे हैं, इसकी जानकारी न मिलने पर सवाल किया है. सूचना के अधिकार पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए रिटायर्ड जस्टिस लोकुर ने फंड के हिसाब-किताब को लेकर अपारदर्शिता के भी आरोप लगाए.

‘हम नहीं जानते, पीएम केयर्स फंड कहां जा रहा है’

लाइव लॉ वेबसाइट के मुताबिक, रिटायर्ड जस्टिस लोकुर ने पीएम केयर्स फंड के पैसों को खर्च करने में पारदर्शिता न होने के आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि,

“इस बात की कोई जानकारी पब्लिक डोमेन में नहीं है कि तमाम लोगों और बड़ी बिजनेस कंपनियों से जमा किए करोड़ों करोड़ रुपए खर्च कैसे किए जा रहे हैं. हम नहीं जानते कि पीएम केयर्स फंड में जमा पैसा कहां जा रहा है.”

उन्होंने आगे कहा कि,

“पीएम केयर्स फंड. इसमें करोड़ों रुपए हैं. हम जानते हैं कि इसमें सरकारी कर्मचारियों ने पैसा डोनेट किया है. CSR (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) को भी पीएम-केयर में डायवर्ट किया गया. लेकिन इस फंड में कितना पैसा है, ये हम नहीं जानते. ये कैसे खर्च किया गया, हम नहीं जानते. हमें बताया गया कि इसका इस्तेमाल कोविड 19 से निपटने के लिए किया जाएगा. लेकिन असल में हुआ क्या, हम नहीं जानते.”

रिटायर्ड जस्टिस लोकुर ने बाकायदा पीएम-केयर्स वेबसाइट पर दिए हुए डेटा का उदाहरण देकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि,

“अगर आप पीएम केयर्स वेबसाइट पर जाते हैं तो आपको वहां पर 28-03-2020 से 31-3-2020 तक की एक ऑडिट रिपोर्ट दिखेगी. ये बताती है कि 4 दिन में 3000 करोड़ रुपए जमा हुए. अगर आप औसत के हिसाब से भी गिनें तो ये हजारों करोड़ होंगे. लेकिन ये सारा पैसा कहां जा रहा है, हमको नहीं पता. साल 2020-21 की ऑडिट रिपोर्ट अभी तक तैयार नहीं है. एक साल बीत गया है. 12 अक्टूबर की तारीख आ चुकी है और किसी को भी पता नहीं है कि ऑडिट रिपोर्ट कहां है.”

रिटायर्ड जस्टिस मदन बी. लोकुर ने ये बातें आरटीआई एक्ट पर आयोजित एक कार्यक्रम में कहीं. कार्यक्रम का आयोजन RTI के 16 साल पूरे होने की उपलक्ष्य में नेशनल कैंपेन फॉर पीपल्स राइट टु इंफॉर्मेशन की तरफ से किया गया था. जस्टिस लोकुर ने अपने लेक्चर की शुरुआत हाल ही में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित फिलीपींस की पत्रकार मारिया रेसा के एक कोट से किया, जो कहता है कि,

“बिना तथ्यों के आप सच तक नहीं पहुंच सकते. बिना सच के आप भरोसा हासिल नहीं कर सकते. और इस सबके बिना लोकतंत्र हासिल नहीं कर सकते.”

इसके बाद जस्टिस लोकुर ने साल 2005 में बने आरटीआई एक्ट की धार कमजोर करने के तरह-तरह के कदमों के बारे में बात की. उन्होंने आरटीआई के भविष्य और इसमें आम लोगों की भूमिका का भी जिक्र किया.

बता दें कि पीएमओ ने पीएम केयर्स के बारे में जानकारी मांगने वाली आरटीआई कुछ समय पहले रिजेक्ट कर दी थी. दलील ये दी गई थी कि पीएम केयर्स फंड आरटीआई एक्ट के तहत आने वाली ‘पब्लिक अथॉरिटी’ के दायरे में नहीं आता. फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट में पीएम केयर्स की जानकारी को लेकर मामले की सुनवाई चल रही है. वहां सरकार की तरफ से हलफनामा दिया गया है कि पीएम केयर्स से भारत सरकार का कुछ लेना-देना नहीं है. ये यह एक चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़ा हुआ है. इस फंड में आने वाली रकम भारत सरकार की संचित निधि में नहीं जाती है.


वीडियो – जस्टिस लोकुर ने रंजन गोगोई के राज्यसभा जाने पर जो कहा वो सबको सुनना चाहिए

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