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पीएम मोदी ने जिस Y2K क्राइसिस का ज़िक्र किया, वो क्या था?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई को देश को संबोधित किया. आर्थिक पैकेज का ऐलान किया. ये भी कहा कि लॉकडाउन-4 नए रूप-रंग में, नए नियमों के साथ आएगा, ताकि देश को वापस एक्शन मोड में लाया जा सके. इन सबकी जानकारी जल्द साझा की जाएगी.

इस बीच पीएम ने एक और बात कही..

“आज पूरी दुनिया को भरोसा है कि भारत मानव जाति के लिए कुछ अच्छा कर सकता है. इस सदी की शुरुआत में जब Y2K क्राइसिस सामने आया था, तब भी भारत के रिसर्चर्स ने ही दुनिया को इससे निकालने में मदद की थी.”

ये Y2K का तो मतलब है Year 2000. तो कौन-सा संकट आया था साल 2000 में, जिसका हल भारत ने दिया था. वो Y2K क्राइसिस था क्या?

कंप्यूटर 100 साल पीछे पहुंच जा रहे थे

साल 2000 शुरू होते ही पूरे देश ने 20वीं सदी से 21वीं सदी में कदम रखा. लेकिन दुनियाभर के कंप्यूटर ये मानने को तैयार नहीं थे. कंप्यूटर्स ये पूरी तरह बदला हुआ साल शो ही नहीं कर पा रहे थे. क्योंकि ‘इनको आता ही नहीं था’.

इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटिंग की शुरुआत 19वीं सदी में हुई. कंप्यूटर को सिखाया गया कि जब भी साल बदले, तो बस आखिरी दो डिजिट बदलनी है. पहली वाली दोनों वहीं रहेंगी. सेम.

जैसे- 1989 से 1990 में आए, तो पहले की दो डिजिट तो वही रहीं- ‘19’. बाद की दो डिजिट बदल दो- ‘89’ से ‘90’.

लेकिन साल 2000 लगने के साथ ये मुमकिन नहीं था. सिस्टम अगले साल के लिए तारीख और महीना बदल सकते थे, लेकिन साल के दो आखिरी अंकों को छोड़कर पहले दो अंक नहीं बदले जा सकते थे. इस तरह से 1 जनवरी, 2000 को कंप्यूटरों में दिखने वाली तारीख 01/01/1900 ही लिखती.

यहां बच्चन साब के कंप्यूटर जी की तारीख़ हमें समय से 100 साल पीछे पहुंचा देते.

फिर भारत ने क्या किया?

भारत में उस समय इंफोसिस, विप्रो जैसी IT कंपनियों की शुरुआत भर ही हुई थी. भारत में काफी आईटी टैलेंट तैयार हो रहा था. वो बाकी देशों की तुलना में बेहतर जानकारी वाला था और सस्ते दाम में काम करने को तैयार. भारत के IT टैलेंट ने इस Y2K क्राइसिस को सुलझाने में अमेरिका के प्रोग्रामरों की काफी मदद की और यहां से ही भारत की पहचान IT पावर के तौर पर बननी शुरू हुई.


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