Submit your post

Follow Us

क्या है फैविपिराविर टैबलेट, जिसे अब तक कोरोना के लिए सबसे कारगर बताया जा रहा

कोरोना के मरीजों को ठीक करने के लिए मार्केट में आने वाली दवाओं में एक नया नाम जुड़ गया है. इस दवा का नाम है- फैविपिराविर. इसको बनाने वाली कंपनी ग्लेनमार्क फार्मा का दावा है कि उसने 150 मरीजों पर किए ट्रायल में इसे हल्के और मध्यम लक्षण वाले पेशंट्स पर कारगर पाया है. हालांकि इसकी पुष्टि किसी सरकारी एजेंसी ने नहीं की है. लेकिन कोरोना के बढ़ते मरीजों के दबाव के चलते डीसीजीआई यानी ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने इसके इस्तेमाल को लेकर आनन-फानन में अनुमति दे दी है. तो क्या है फैविपिराविर और उससे जुड़ी आशंकाएं, जानेंगे आज ‘आसान भाषा में.’

ये कैसा क्लीनिकल ट्रायल है भाई?

हमने आपको पहले भी बताया था कि इस्तेमाल में लाने के पहले हर दवा का ट्रायल होता है. हम आपको नीचे प्वांइट्स में बता रहे हैं कि कब-कब क्या हुआ.

# ग्लेनमार्क कंपनी ने फैविपिराविर के क्लिनिकल ट्रायल्स मई, 2020 में किए थे, जिसमें ये दवा कोविड-19 के 150 वैसे मरीजों को दी गई, जिन्हें हल्के से मध्यम इंफेक्शन हुआ था.

# मरीजों के इलाज में करीब 14 दिन तक दवा का इस्तेमाल किया गया. लेकिन यह स्टडी करीब एक महीने तक चली. इसमें यह निष्कर्ष निकलकर आया कि फैविपिराविर ने मरीजों में लगभग 88 प्रतिशत क्लीनिकल सुधार दिखा.

# हालांकि स्टडी को अब तक विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा किए गए (पियर रिव्यूड) किसी भी जर्नल में प्रकाशित नहीं किया गया है. अक्सर जब कोई नई दवा आती है, तो उसे इन दवाओं पर काम कर रहे दूसरे वैज्ञानिक भी अपनी कसौटी पर कसते हैं. लेकिन इसके साथ ऐसा नहीं हुआ है.

# फिलहाल कंपनी इस दवा को फैबिफ्लू ब्रांड नाम से बाजार में अगले महीने तक उतारेगी.

क्या यह दवा सिर्फ कोरोना के इलाज के लिए बनी है?

फैविपिराविर एक एंटीवायरल दवा है, जिसे जापान में इन्फ्लूएंजा यानी फ़्लू के इलाज के लिए साल 2014 में लाइसेंस दिया गया था. फ्लू के लिए दवा की खुराक पहले दिन 1600 mg है और उसके बाद दूसरे से पांचवें दिन तक 600 mg. हालांकि कोविड-19 के इलाज के लिए ग्लेनमार्क की स्टडी का सुझाव है कि पहले दिन, दिन में दो बार इस दवा का 1800 mg का डोज दिया जाए और उसके बाद अगले 14 दिन तक 800 mg रोजाना दो बार.

इस दवा की कीमत कितनी है, यह कितने मरीजों को उपलब्ध होगी?

इसकी कीमत 103 रुपये प्रति टैबलेट होगी. ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने कहा है कि यह दवा 200 एमजी के टैबलेट में उपलब्ध होगी. इसके 34 टैबलेट के पत्ते की कीमत 3,500 रुपये होगी. कंपनी ने कहा कि प्रति मरीज कम से कम दो पत्ते की जरूरत के हिसाब से पहले महीने में ही वह 82,500 मरीजों के लिए फैबिफ्लू उपलब्ध करा पाएगी.

फैविपिराविर दवा कैसे काम करती है?

दावा है कि यह दवा कोरोना के लिए जिम्मेदार कोविड 19 वायरस के जेनेटिक मटीरियल आरएनए से जुड़कर, उसे कमजोर करने का काम करती है. वायरस के कमजोर होने से वायरल लोड घटता है. इससे मरीज में ऑक्सीजन की होने वाली कमी रुक जाती है. कोरोना का वायरस एक और वायरस बेस बीमारी सार्स-सीओवी-2 से मिलता-जुलता है. इस समानता के चलते ही ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि फैविपिराविर कोरोना के लिए जिम्मेदार वायरस के खिलाफ भी असरदार साबित हो सकती है. कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि फैविपिराविर वायरल लोड को कम कर देगी, जिससे फेफड़ों की स्थिति में सुधार होने लगेगा.

लेकिन क्या जल्दबाजी ठीक है?

दवाओं के आने से उम्मीदें तो बढ़ती हैं, लेकिन दवा बनाने की जल्दबाजी को लेकर कई एक्सपर्ट्स सवाल भी उठा रहे हैं. एमसीडी में मेडिकल ऑफिसर रहे डॉक्टर अनिल बंसल का कहना है कि वायरस के खिलाफ पिछले कुछ साल में ही दवाएं आई हैं. इन दवाओं के असर को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण भी काफी कम हैं. ऐसे में एंटी वायरस दवाएं इंसान के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम भी कर देती हैं. भारत क्या, दुनियाभर में ऐसी दवाओं की प्रमाणिकता को लेकर अभी कोई पुख्ता फैक्ट नहीं आए हैं.

महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, सेवाग्राम, महाराष्ट्र के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. एस.पी. कलंत्री का कहना है कि सरकार को इतनी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए. जिस टेस्टिंग की बात कंपनियां कर रही हैं, उनमें ज्यादातर मरीज खुद ठीक हो रहे हैं.

फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च सेंटर के डॉक्टर मनोज गोयल का भी मानना है कि कम और मध्यम लक्षण वाले लोगों का शरीर खुद वायरस से लड़ कर ठीक हो रहा होता है. ऐसे में 14 गोलियों का हैवी डोज नुकसानदेह साबित हो सकता है.

कंपनी क्या कह रही है

ग्लेनमार्क कंपनी ने साफ तौर पर कहा-

# जो लोग किडनी या फिर लिवर की किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हों. उन्हें फैविपिराविर दवा नहीं दी जा सकती.

# गर्भवती महिलाएं जिन्हें कोविड-19 का हल्का संक्रमण हो या फिर मध्यम श्रेणी का उन्हें भी फैविपिराविर दवा नहीं दी जा सकती.

# ये दवा किसी भी हाल में बच्चे को अपना दूध पिलाने वाली महिला को नहीं दी जानी चाहिए.

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन, रेमेडिसिवर, डेक्सामेथासोन के बाद अब फैविपिराविर पर चर्चा गरम है. अब ये दवा कारगर होगी या एक ऐसा तुक्का बनकर रह जाएगी जो फेल हो गया. ये तो आने वाला टाइम ही बताएगा.


वीडियो देखें: कोरोना की सस्ती दवा, जो मार्केट में आ गई है, वो कैसे मिलेगी?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

टॉप खबर

इंग्लैंड टूर से पहले पाकिस्तान के तीन क्रिकेटर कोविड पॉज़िटिव

अहम टूर से पहले पाकिस्तान को लगा झटका.

पटना के बैंक में दिन-दहाड़े 52 लाख रुपए की डकैती

अपराधियों ने बैंक में लगे CCTV की हार्ड डिस्क तोड़ दी.

अब लद्दाख की पैंगोंग झील के पास चीन की हरकत, भारतीय क्षेत्र में बना रहा है बंकर

सैटेलाइट इमेज एक्सपर्ट की बातें यही इशारा कर रही हैं.

भारतीय सेना के पूर्व अधिकारियों ने किस बात पर आपस में भयानक झगड़ा फ़ान लिया?

गौरव आर्या ने भीड़ से पिट जाने की बात कह डाली.

रेलवे की नौकरी के भरोसे न बैठें, रेलवे की जेबें खाली हैं!

कोरोना लॉकडाउन ने रेलवे का हाल खस्ता कर दिया है.

गलवान घाटी में भारत से लड़ाई पर चीन के लोग किस-किस तरह के सवाल उठा रहे हैं?

चीनी टि्वटर 'वीबो' पर कई पोस्ट लिखी गई हैं.

Exclusive: गलवान घाटी में 15 जून को तीन बार हुई लड़ाई में क्या-क्या हुआ था, विस्तार से जानिए

तीसरी लड़ाई के बाद भारत ने 16 चीनी सैनिकों के शव सौंपे थे.

राज्यसभा की 18 सीटों में से कांग्रेस और बीजेपी ने कितनी जीतीं?

एक और पार्टी है जिसने कांग्रेस जितनी सीटें जीती हैं.

दिल्ली के हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र जैन ऑक्सीजन सपोर्ट पर, दूसरे अस्पताल में शिफ्ट किए गए

कुछ दिन पहले कोरोना पॉज़िटिव आए थे, अब प्लाज़मा थेरेपी दी जाएगी.

चीनी सेना की यूनिट 61398, जिससे पूरी दुनिया के डेटाबाज़ डरते हैं

बड़ी चालाकी से काम करती है ये यूनिट.