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टिकैत बोले- यहां क्या किम जोंग का राज है कि सरकार ने टीवी पर बोल दिया वो कानून बन गया?

तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा बाद किसानों की आगे की रणनीति क्या है? क्या किसानों का धरना खत्म होगा या चलता रहेगा? खत्म होगा तो कब खत्म होगा? शनिवार, 20 नवंबर को होने वाली संयुक्त किसान मोर्चे की मीटिंग में क्या होगा? इंडिया टुडे के कुमार कुणाल से बातचीत में BKU भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने इन तमाम मुद्दों पर बात की. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा,

घोषणा तो ठीक है, जो किसानों की एक बड़ी डिमांड थी. उस पर काम हुआ है. इसी के साथ MSP भी है. उसका भी बड़ा नुकसान किसानों को हो रहा है. वो और घोषणा करवा दो. आगे कमेटी बन जाएगी. जो भी मामले हैं कमेटी में तय होते रहेंगे.

आंदोलन खत्म करने के सवाल पर राकेश टिकैत ने कहा,

आज सिंघु बॉर्डर पर मीटिंग है संयुक्त किसान मोर्चा की. पीएम की घोषणा पर क्या फैसला लेना है आज की मीटिंग में तय होगा. घर जाना है कि नहीं, संयुक्त किसान मोर्चा फैसला लेगा. अभी घोषणा हुई है और ये एकतरफा घोषणा है. सरकार को चाहिए कि वो किसानों के साथ बैठकर बातचीत करे.

उन्होंने आगे कहा,

पीएम बोल तो रहे हैं, लेकिन कोई कमेटी भी तो होती होगी देश में या यहां किम जोंग का राज है कि सरकार ने टीवी पर जो बोल दिया वो कानून बन गया. किसानों की कमेटियां हैं, उनसे बातचीत करो कि और क्या क्या मसले हैं. एक घोषणा से किसान उठकर नहीं चला जाएगा. बिजली बिल है, पलूशन वाला है, मुकदमें हैं इस पर किससे बात करेंगे.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इतनी मीठी भाषा का उपयोग किया कि शहद को भी फेल कर दिया. हलवाई को तो ततैया भी नहीं काटता. वह ऐसे ही मक्खियों को उड़ाता रहता है. जो मीठी भाषा का इस्तेमाल हो रहा है, उसको बातचीत में डाल दो.

यह पूछने पर कि विपक्ष इस जीत को अपनी जीत बता रहा है, राकेश टिकैत ने कहा कि विपक्ष की जीत होगी. हमें इस विवाद में पड़ना नहीं है. विपक्ष का काम है कि जब अत्याचार हो रहा है तो बोलना. विपक्ष को बोलना चाहिए.

क्या चुनाव की वजह से कानूनों को वापस लिया? इस सवाल के जवाब में राकेश टिकैत ने कहा,

कर दिया होगा. हमारा काम हो गया. चुनाव की वजह से किया या किस वजह से किया क्या फर्क पड़ता है.

राजनीति में आने के सवाल पर उन्होंने कहा,

राजनीति की तरफ तो हम पैर करके भी नहीं सोते. राजनीति में किसान आंदोलन को नहीं जाना चाहिए. देश में आंदोलन और आंदोलनकारी मजबूत रहना चाहिए.

तीनों नए कृषि कानूनों को 17 सितंबर, 2020 को लोकसभा ने मंजूर किए थे. राष्ट्रपति ने तीनों कानूनों के प्रस्ताव पर 27 सिंतबर को दस्तख़त किए थे. इसके बाद से ही किसान संगठनों ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया था. पिछले एक साल से किसान धरना दे रहे हैं. उम्मीद की जा रही थी कि पीएम की घोषणा के बाद किसान आंदोलन खत्म कर देंगे. पीएम मोदी ने भी किसानों से धरना खत्म करने की अपील की है. हालांकि किसानों का कहना है कि जब तक संसद से प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, आंदोलन खत्म नहीं होगा.


नेता नगरी: PM मोदी के कृषि कानूनों को एक साल बाद वापस लेने के पीछे क्या कारण है?

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