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उत्तराखंड में भारत-चीन सीमा पर तबाही, हिमस्खलन की चपेट में आने से आठ लोगों की मौत

उत्तराखंड एक बार फिर हिमस्खलन का शिकार हुआ है. 23 अप्रैल की शाम चमोली ज़िले का वो इलाका जो भारत-चीन बॉर्डर से लगा हुआ है, वहां ग्लेशियर टूटने की वजह से हिमस्खलन हुआ. ‘इंडिया टुडे’ के अभिषेक भल्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, आर्मी ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया है. अभी तक 384 लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है, जिनमें से छह की हालत गंभीर है, और जिनका इलाज चल रहा है. वहीं आठ शव भी बरामद हुए हैं. ये सभी 23 अप्रैल की शाम तक बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइज़ेशन यानी BRO कैम्प में काम कर रहे थे. सभी रेस्क्यू किए गए लोगों को आर्मी कैंप में रखा गया है. आर्मी ने शनिवार यानी 24 अप्रैल को जारी अपने स्टेटमेंट में बताया कि हिमस्खलन की ये घटना 23 अप्रैल यानी शुक्रवार की शाम चार बजे हुई. आर्मी ने कहा-

“सुमना से चार किलोमीटर आगे सुमना-रिमखिम रोड पर शाम करीब 4 बजे हिमस्खलन ने हिट किया. ये रोड जोशीमठ-मलारी-गिरथिडोबला-सुमना-रिमखिम एक्सिस में स्थित है. इस एक्सिस के पास सड़क निर्माण काम के लिए पास में एक BRO की टुकड़ी और दो श्रमिक कैम्प्स मौजूद हैं. सुमना से तीन किलोमीटर की दूरी पर एक आर्मी कैंप भी मौजूद है.”

आर्मी ने आगे बताया कि पिछले करीब पांच दिनों से इस इलाके में तेज़ बर्फबारी हो रही थी और अभी भी हो रही है. आर्मी की तरफ से कहा गया-

“जानकारी मिलने के तुरंत बाद ही इंडियन आर्मी ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया था. श्रमिकों को रेस्क्यू करके आर्मी कैंप में लाया जा रहा है. श्रमिकों के दोनों शिविरों में अभी बाकी श्रमिकों को लोकेट किया जा रहा है.”

सड़क की हालत खराब है

आर्मी ने आगे बताया कि कई सारे भूस्खलन की वजह से सड़क पांच से छह जगहों पर से टूटी हुई है. और बॉर्डर रोड्स टास्क फोर्स भापकुंड से सुमना के बीच की सड़क को क्लीयर करने का काम कर रही है. ऐसी उम्मीद है कि इसे साफ होने में अभी छह से आठ घंटे और लगेंगे.

अभिषेक भल्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, इन इलाकों में रोड कनेक्टिविटी होना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इससे बाराहोटी जैसे फॉर्वर्ड लोकेशन्स का एक्सेस मिलता है. बाराहोटी इलाका लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल से लगा हुआ है, चमोली ज़िले के तहत आता है, और इसका कुल एरिया 80 वर्ग किमी है. ये देहरादून से 400 किलोमीटर दूर है, वहीं जोशीमठ से इसकी दूरी 100 किलोमीटर है. BRO यानी बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइज़ेशन इन्हीं इलाकों में रोड बनाने का काम करता है. सुमना इलाके में भी इस वक्त कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है, इसी वजह से BRO और श्रमिकों के कैम्प वहां स्थित थे.

अलर्ट दिया जा चुका है

शुक्रवार की शाम जब ग्लेशियर फटने की खबर आई तब सीएम तीरथ सिंह रावत ने ट्वीट करके इस बात को कन्फर्म किया था. और अलर्ट जारी करने की जानकारी भी दी थी. उन्होंने बताया था कि वो लगातार ज़िला प्रशासन और BRO (बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइज़ेशन) के संपर्क में हैं. साथ ही रात में ही NTPC समेत बाकी प्रोजेक्ट के काम रोकने के आदेश दे दिए गए थे, ताकि जान-माल का कोई नुकसान न हो. ‘इंडिया टुडे’ के दिलीप सिंह राठौड़ ने बताया कि जिस इलाके में ये घटना हुई है, वहां तक पहुंचने का रास्ता बहुत खराब है, क्योंकि पिछले पांच-छह दिनों से लगातार बर्फबारी हो रही है. इसलिए रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी मिलने में भी वक्त लगा.

उत्तराखंड में इस तरह की घटना पहले भी हो चुकी है. इसी साल 7 फरवरी को नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटा था, जिससे भारी तबाही हुई थी. ये जानने के लिए कि ग्लेशियर टूटना क्या होता है, हिमस्खलन क्या होता है, यहां क्लिक करें.


वीडियो देखें: उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने के लिए क्या हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स जिम्मेदार हैं?

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