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गाजियाबाद में दलितों के 'बौद्ध धर्म अपनाने' को लेकर क्यों बवाल मचा है

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले का करहेड़ा गांव. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 14 अक्टूबर को वाल्मीकि समाज के 200 से ज्यादा लोगों ने हिन्दू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया. अब पुलिस ने इस मामले को लेकर केस दर्ज किया है. पुलिस ने धर्म परिवर्तन की अफवाह फैलाने को लेकर केस दर्ज किया है. वहीं वाल्मीकि समाज के लोगों का कहना है कि उनका धर्म परिवर्तन हुआ है. आखिर ये पूरा मामला है क्या? पुलिस ने केस क्यों दर्ज किया है, जानते हैं.

पुलिस ने केस दर्ज क्यों किया

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के मुताबिक, 22 साल के सामाजिक कार्यकर्ता हैं मोंटू चंदेल. साहिबाबाद पुलिस स्टेशन में उन्होंने शिकायत दर्ज कराई थी. उसी के आधार पर पुलिस ने 22 अक्टूबर को केस दर्ज किया. इस एफआईआर में कहा गया है कि कुछ अज्ञात लोगों और संगठनों ने 230 लोगों के धर्म परिवर्तन की झूठी अफवाह फैलाई. धर्म परिवर्तन को लेकर जो सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं, उसमें न तो कोई नाम है और न ही पता. इस सर्टिफिकेट में न डेट, न रजिस्ट्रेशन नंबर और न ही इसे जारी करने वाले का नाम है. यह इलाके में जातीय तनाव भड़काने की अपराधिक साजिश है. पुलिस ने आईपीसी की धारा 153-ए (दो संप्रदाय में दुश्मनी भड़काने) और धारा 505 (अफवाह के प्रसार) के तहत केस दर्ज किया है.

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर के मुताबिक, वाल्मीकि समाज के लोगों का कहना है कि उन्होंने डॉक्टर बीआर अम्बेडकर के परपोते राजरतन अम्बेडकर की मौजूदगी में धर्मांतरण किया. राजरतन अंबेडकर का कहना है-

करहेड़ा गांव के 236 लोगों को बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया की ओर से सर्टिफिकेट जारी किए गए थे. इस संस्था की स्थापना डॉक्टर बीआर आंबेडकर ने 1955 में की थी. मैं इस संस्था का ट्रस्टी प्रबंधक हूं. इस पर मेरे साइन हैं. इसके अलावा बाबासाहेब अम्बेडकर मेमोरियल कमिटी के प्रमुख भदांत आर्य नागार्जुन सुरई ससई के भी साइन हैं.

राजरतन ने कहा-

करहेड़ा गांव में 14 अक्टूबर को धर्म परिवर्तन की बात अफवाह कैसे हो सकती है, जबकि मैं खुद इस कार्यक्रम में मौजूद था. इसका एक फेसबुक लाइव वीडियो भी मौजूद है. कई फोटो भी हैं. आखिर इस एफआईआर का आधार क्या है?

साहिबाबाद के सर्किल ऑफिसर केशव कुमार का कहना है-

हम इन आरोपों की जांच कर रहे हैं. सर्टिफिकेट में सिर्फ धर्मांतरण की तारीख दी गई है. आरोप है कि दस्तावेज असली नहीं है. इसकी जांच की जाएगी. अब तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

ADM की जांच में क्या मिला

वहीं इस मामले की जांच के लिए अपर जिलाधिकारी, नगर (ADM) और SP की टीम बनी थी. ADM की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि जांच में 230 लोगों के धर्म परिवर्तन के साक्ष्य नहीं मिले. जो सर्टिफिकेट देखने को मिले, उनमें से अधिकांश पर न तो किसी का नाम, न सही एड्रेस है और न ही कोई क्रमांक नंबर. प्रमाणपत्र जारी होने की कोई डेट भी नहीं है. कुछ प्रमाण पत्र सादे हैं, जिनमें किसी का भी नाम उनकी सहमति के बगैर लिखवाया जा सकता है. इस क्षेत्र के लोगों ने स्थानीय विषयों के समाधान कराने को लिए ज्ञापन प्रस्तुत किया था, जिसमें धर्मांतरण का कहीं कोई उल्लेख नहीं है.

Adm
ADM की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति

वहीं करहेड़ा गांव के निवासी पवन ने 14 अक्टूबर के कार्यक्रम को को-ऑर्डिनेट किया था. चंदेल की ओर से लगाए गए आरोपों से इनकार करते हुए उन्होंने कहा-

14 अक्टूबर को धर्म परिवर्तन हुआ और हमने धर्मांतरण किया. यह अफवाह नहीं है. हम शिकायतकर्ता को नहीं जानते हैं. वह गांव का निवासी नहीं है. हमें किसी भी राजनीतिक दल की से कोई पेमेंट नहीं किया गया है.

इससे हाथरस केस का क्या कनेक्शन है

‘अमर उजाला’ की खबर के मुताबिक, बौद्ध धर्म अपनाने की स्क्रिप्ट 13 अगस्त को मुंबई में लिखी गई थी. 13 अगस्त को पवन राजरतन से मिले और उसी दिन बौद्ध धर्म अपना लिया. पवन का कहना है कि हाथरस में अनुसूचित जाति की बिटिया का आधी रात में अंतिम संस्कार करने और परिवार को कई दिनों तक घर में रखने के अलावा गांव में पुलिस बल तैनात रहने की तस्वीरों ने उनके बौद्ध धर्म अपनाने के निर्णय को और मजबूत कर दिया. 14 अक्टूबर को कार्यक्रम तय किया गया. इसमें 50 परिवार के 236 लोगों को राजरतन ने 22 प्रतिज्ञाएं कराकर बौद्ध धर्म में शामिल कराया.

सरकार क्या कह रही है

वहीं उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने इस मामले में कहा था कि गाजियाबाद में बड़ी संख्‍या में लोगों के धर्म परिवर्तन की घटना को लेकर यूपी सरकार बेहद गंभीर है. सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं. धर्मांतरण से जुड़े सभी मामलों पर बहुत गंभीरता से जांच होगी. मंत्री ने कहा कि अगर दबाव, धोखे या लालच से धर्मांतरण कराया गया है, तो ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.


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