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आधी रात को क्यों जलाई थी हाथरस विक्टिम की बॉडी, यूपी सरकार ने अब बताया है

हाथरस कथित गैंगरेप मामले में यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दिया है. इसमें बताया है कि विक्टिम की लाश का अंतिम संस्कार आधी रात को क्यों करवाया गया. 131 पन्नों के इस एफिडेविट में ये भी बताया गया है कि 14 सितंबर से लेकर अब तक यूपी सरकार और पुलिस ने इस मामले में क्या-क्या एक्शन लिया. इस हलफनामे में यूपी पुलिस ने बार-बार इस बात को हाईलाइट किया है कि विक्टिम के साथ रेप नहीं हुआ था.

आधी रात अंतिम संस्कार पर क्या सफाई दी?

29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में विक्टिम की मौत हुई. एफिडेविट में लिखा है कि इस दिन अस्पताल के बाहर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता हज़ारों की संख्या में जमा हो गए थे. विक्टिम के परिवार को घेर रखा था. मामले को जातीय/साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही थी. 29 सितंबर की देर रात हाथरस जिला प्रशासन को खुफिया जानकारी मिली कि 30 सितंबर की सुबह हाथरस में बड़े धरने की तैयारी चल रही है. दोनों ही जातियों के लाखों लोगों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के समर्थक और मीडिया के लोग 30 सितंबर की सुबह हाथरस में जुटने वाले हैं. आशंका थी कि इससे हिंसा हो सकती है और कानून व्यवस्था के लिए बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है. अयोध्या-बाबरी के फैसले को लेकर भी ज़िले में अलर्ट घोषित था. इसके साथ ही कोविड काल में प्रशासन को ये भी सुनिश्चित करना था कि बहुत ज्यादा भीड़ इकट्ठी न हो.

ऐसी असाधारण परिस्थिति में प्रशासन ने तय किया कि विक्टिम के परिवार को रात में ही अंतिम संस्कार के लिए राज़ी किया जाए. ताकि सुबह होने वाली संभावित हिंसा से बचा जा सके. यूपी सरकार ने हलफनामे में कहा कि विक्टिम का अंतिम संस्कार सिर्फ और सिर्फ लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन करने के लिए किया गया था.

विक्टिम बार-बार बयान बदल रही थी?

इस हलफनामे में यूपी सरकार ने ये भी कहा कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद विक्टिम और उसका परिवार बार-बार अपना बयान बदल रहे थे. 14 सितंबर को विक्टिम के भाई ने सुबह 10:30 बजे विक्टिम के भाई ने एफआईआर लिखाई कि आरोपी संदीप ने उसे जान से मारने के इरादे से उसका गला दबाया. लड़की ने भी यही कहा कि आरोपी संदीप ने हाथ से उसका गला दबाने की कोशिश की. जिसके चलते उसके गले में दर्द है. यही बात विक्टिम की मां ने भी कही थी कि गर्दन के अलावा उसे कहीं और चोट नहीं लगी है. इस एफिडेविट में विक्टिम और संदीप के परिवार के बीच की पुरानी दुश्मनी का भी जिक्र है. कि संदीप ठाकुर जाति का है और विक्टिम दलित है. 2002-03 में विक्टिम के दादा की शिकायत पर संदीप के परिवार के लोग जेल गए थे.

हाथरस की घटना के बाद देश में जगह-जगह प्रोटेस्ट हुए. पंजाब में भी NSUI के कार्यकर्ताओं ने घटना के विरोध में कैंडल मार्च निकाला (तस्वीर- PTI)
हाथरस की घटना के बाद देश में जगह-जगह प्रोटेस्ट हुए. पंजाब में भी NSUI के कार्यकर्ताओं ने घटना के विरोध में कैंडल मार्च निकाला (तस्वीर- PTI)

एफिडेविट के मुताबिक, विक्टिम ने 19 सितंबर को एक महिला कॉन्स्टेबल के सामने बयान दिया कि संदीप उर्फ चंदू ने उसका यौन शोषण किया और दुपट्टे से गला दबाकर उसकी हत्या करने की कोशिश की. आगे यूपी पुलिस ने बताया कि 22 सितंबर को विक्टिम ने पहली बार बताया कि उसका रेप हुआ है. उसने कहा, “मैं और मां चारा लाने के लिए गए थे. तब मेरे गांव के संदीप, रामू, लवकुश और रवि ने मेरा रेप किया. इसके बाद संदीप ने दुपट्टे से मेरा गला घोंटने की कोशिश की.”

एफिडेविट में लिखा है कि जब महिला कॉन्स्टेबल ने विक्टिम से इस बारे में पूछा कि उसने पहले क्यों नहीं बताया, तो उसने कहा कि वो होश में नहीं थी.

यूपी सरकार ने पूरी क्रोनोलॉजी बताई है

– 14 सितंबर को घटना हुई. सुबह 10:30 बजे विक्टिम अपने भाई और मां के साथ बाइक पर चांदपा पुलिस थाने पहुंची. उसके भाई ने एफआईआर लिखवाई. तुरंत एफआईआर दर्ज की गई. आईपीसी की धारा 307 के तहत केस दर्ज किया गया. साथ ही एससी/एसटी एक्ट की धाराएं भी लगाई गईं. विक्टिम को मेडिकल के लिए हाथरस के सरकारी अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टरों ने पाया कि विक्टिम को गंभीर नेक इंजरी हुई है. एमएलसी तैयार नहीं किया गया, उसे तुरंत अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज रिफर किया गया.

– 14 सितंबर को दोपहर 2 बजे तक विक्टिम का इलाज अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में शुरू हो चुका था. डॉक्टरों ने जांच में पाया कि विक्टिम के C6 बोन (गर्दन के पीछे की हड्डी) में डिस्प्लेस्ड फ्रैक्चर है. इसके चलते रीड़ की हड्डी में चोट आई है और शरीर में ऑक्सीजन सप्लाई प्रभावित हो रही है.

– 19 सितंबर को विक्टिम के बयान के बाद संदीप के खिलाफ एफआईआर में यौन शोषण की धाराएं भी जोड़ी गईं.

– 20 सितंबर को संदीप को गिरफ्तार कर लिया गया. वो फिलहाल अलीगढ़ जेल में बंद है.

– 22 सितंबर को विक्टिम के बयान के बाद एफआईआर में धारा 376 डी (गैंगरेप) जोड़ी गई. तीन अन्य आरोपियों का नाम भी एफआईआर में जोड़ा गया. 23 सितंबर को आरोपी लवकुश की गिरफ्तारी हुई, 25 सितंबर को आरोपी रवि गिरफ्तार हुआ और 26 सितंबर को रामू गिरफ्तार किया गया. ये तीनों भी अलीगढ़ जेल में हैं.

सुप्रीम कोर्ट. (PTI)
सुप्रीम कोर्ट. (PTI)

– 22 सितंबर को विक्टिम के गैंगरेप वाले आरोप के बाद विक्टिम का सेक्सुअल असॉल्ट फॉरेंसिक एग्ज़ामिनेशन किया गया. अलीगढ़ जेएन मेडिकल कॉलेज ने जो रिपोर्ट सबमिट की उसके मुताबिक, विक्टिम के प्राइवेट पार्ट में रेप की कोई चोट नहीं मिली. फॉरेंसिक जांच में भी यही सामने आया कि रेप का कोई साइन नज़र नहीं आया.
– 28 सितंबर को विक्टिम के पिता ने उसे इलाज के लिए दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाने की सहमति दी. विक्टिम को अस्पताल के न्यूरो आईसीयू में भर्ती किया गया.
– 29 सितंबर की सुबह विक्टिम की मौत हुई और अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में नेता, उनके समर्थक और मीडिया जुट गई. मुर्दाघर के बाहर धरना दिया गया और इंसाफ की मांग करते हुए नारे लगाए गए. पुलिस के समझाने के बाद भी लोग नारेबाजी करते रहे. वो विक्टिम के परिवार को भड़काते रहे कि जब तक मांग पूरी न हो तब तक बॉडी न लें.

– 29 सितंबर को सफदरजंग अस्पताल में विक्टिम का पोस्टमॉर्टम हुआ. इसमें सामने आया कि उसकी मौत सर्वाइकल स्पाइन की वजह से हुई. गला घोंटने की वजह से नहीं.

– 29 तारीख की रात को पुलिस और परिवार डेडबॉडी लेकर गांव पहुंचा. लॉ एंड ऑर्डर की सिचुएशन को देखते हुए आधी रात को अंतिम संस्कार कर दिया गया.

– विक्टिम की मौत के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर में आईपीसी की धारा 302 (हत्या) भी जोड़ी गई.

– 1 अक्टूबर को FSL आगरा की मेडिकल रिपोर्ट आई, उसके मुताबिक, विक्टिम के कपड़ों में खून के दाग मिले थे.

– 3 अक्टूबर को केस की जांच के लिए यूपी सरकार ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया. इस SIT में होम सेक्रेटरी भगवान स्वरूप, उन्नाव पीटीएस के डीआईजी चंद्र प्रकाश और आगरा PAC बटालियन में कमांडेंट पूनम शामिल हैं.

इसके अलावा इस एफिडेविट में यूपी सरकार ने कहा है कि कुछ नेता, मीडिया का एक तबका और सोशल मीडिया ग्रुप इस मामले को सेंसेशनलाइज़ करने की कोशिश कर रहे हैं. यूपी सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की अनुशंसा की है. ताकि जांच निष्पक्ष हो सके.

इस मामले में 6 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई. सीजेआई एसए बोबड़े ने कहा कि ये मामला शॉकिंग है इस वजह से इसकी सुनवाई हो रही है. सीजेआई ने यूपी सरकार को निर्देश दिए हैं कि वो अपना विटनेस प्रोटेक्शन प्रोग्राम कोर्ट में सबमिट करे.


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