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यूपी में 98 दलितों की लिस्ट वायरल, पहले नंबर वाले को मारी गईं 5 गोलियां

पहले लोगों को लगा कि पुलिस ने ये लिस्ट तैयार की है. लेकिन फिर पुलिस की तरफ से इसका खंडन आया. मेरठ में शोभापुर गांव के 83 दलितों का इसमें नाम है. खबर है कि वो सब गांव से भागे हुए हैं.

धांय. धांय. धांय. धांय. धांय.

टोटल पांच गोलियां शरीर में उतर गईं. जिस्म गोपी पारिया का था. उम्र 28 साल. गोपी का नाम एक लिस्ट में था. उसके नाम की एंट्री थी- गोपी पुत्र ताराचंद. गोपी के अलावा इसमें 97 और भी नाम थे. ये सारे नाम तीन भाग में बंटे हैं. सबसे ऊपर 89 लोगों का नाम है. लिस्ट की काउंटिंग 83 तक ही है, लेकिन किसी-किसी जगह एक ही परिवार के दो-दो नाम एक साथ लिखे हैं. ये सारे मेरठ में शोभापुर गांव के रहने वाले हैं. इसके नीचे की तरफ दो और गांवों के लोगों का नाम है. सिंधावली गांव के छह लोग. और लखवाया गांव के तीन लोग. यानी कुल मिलाकर 98 नाम.

ये लिस्ट 2 अप्रैल को हुए ‘भारत बंद’ के बाद तैयार की गई थी. लिस्ट के ऊपर ‘दलित समाज के उपद्रवी आगजनी व लटपाट (लूटपाट) करने वाले लोगों की सूची’ लिखा हुआ है. ये लिस्ट बनी. सोशल मीडिया पर चली. लेकिन इसे किसने बनाया, ये मालूम नहीं चला.

इसमें पहले नंबर पर गोपी का नाम लिखा है. पांचवें नंबर पर गोपी के छोटे भाई प्रशांत का नाम है. गोपी के पिता ताराचंद की अपने पड़ोसी के साथ काफी समय से
इसमें पहले नंबर पर गोपी का नाम लिखा है. पांचवें नंबर पर गोपी के छोटे भाई प्रशांत का नाम है. शोभापुर गांव के कुल 89 लोगों का नाम है. 2 अप्रैल को हुए भारत बंद के दौरान मेरठ जिले में काफी हिंसा हुई. ये शोभापुर गांव मेरठ में ही पड़ता है. यहां सबसे ज्यादा हंगामा हुआ. शोभापुर में सबसे ज्यादा संख्या दलितों की है. इसके बाद गुर्जरों की आबादी है. पिछले काफी समय से गांव में जातियों के बीच तनाव चल रहा है.

पिता BSP नेता, बेटा पार्टी कार्यकर्ता
गोपी BSP कार्यकर्ता था. गोपी के पिता ताराचंद भी BSP के नेता हैं. मेरठ नगर निगम में काउंसिलर के पद के लिए दो बार चुनाव लड़ चुके हैं. लेकिन कामयाबी नहीं मिली. गोपी के छोटे भाई का नाम प्रशांत है. उसका नाम भी है इस लिस्ट में. 5वें नंबर पर. इस लिस्ट की शुरुआत ऐसे थी.

पुलिस ने नहीं तैयार की ऐसी कोई लिस्ट
अब सवाल ये उठता है कि क्या ये लिस्ट कोई हिट-लिस्ट थी? जिन 98 लोगों का इसमें नाम था, क्या उन्हें निशाना बनाया जाना था? क्या गोपी की हत्या भी इसीलिए हुई कि उसका नाम लिस्ट में था? पहले नंबर पर था, तो क्या उसके साथ हत्याओं का सिलसिला शुरू हुआ है? क्या लिस्ट के बाकी लोगों के साथ भी ऐसा कुछ होने वाला है? मेरठ पुलिस इस बात से इनकार करती है. उनका कहना है कि गोपी की हत्या आपसी रंजिश की वजह से हुई. ये पूछे जाने पर कि क्या उन्हें लिस्ट वाली बात मालूम है, ASP अंकित मित्तल ने हामी भरी. लेकिन लिस्ट किसने तैयार की, ये उन्हें नहीं पता. गोपी की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर उसके बारे में काफी लिखा जा रहा है. कई लोग लिख रहे हैं कि उसे धोखे से बुलाकर उसकी हत्या कर दी गई. यही उसके परिवार का भी कहना है. कई पोस्ट्स ऐसी दिखीं, जहां गोपी की काफी तारीफ की गई है. कि वो लोगों की बहुत मदद करता था. लोग उसको बहुत मानते थे.

पड़ोस के दो लड़कों को अरेस्ट किया गया है
ताराचंद ने अपने बेटे की हत्या के बाद चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है. चारों शोभापुर के रहने वाले हैं. मनोज गुर्जर, आशीष गुर्जर, कपिल राणा और गिरिधारी. इनमें से दो- मनोज और कपिल गोपी के पड़ोसी हैं. दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है. FIR के मुताबिक, 4 अप्रैल को शाम करीब चार बजे सुनील नाम का एक लड़का गोपी के पास आया. उसने कहा कि मनोज ने उसे (गोपी को) गांव के मंदिर पर बुलाया है. गोपी अपने दो दोस्तों- विजय और रोहित के साथ एक बाइक पर बैठकर मनोज से मिलने गया. ताराचंद का आरोप है कि गोपी को पहली गोली मनोज ने मारी. फिर कपिल और आशीष ने भी उसके ऊपर गोली चलाई. विजय और रोहित वहां से भाग गए. ताराचंद का कहना है कि अस्पताल में गोपी ने उनसे बात की थी. कहा था कि गोली मारने के अलावा आरोपियों ने जातिगत टिप्पणियां भी की थीं.

पिछले तीन सालों से झगड़ा था
पिछले तीन सालों से ताराचंद और उनके पड़ोसी का झगड़ा चल रहा था. तीन साल पहले होली के मौके पर रंग लगाने को लेकर दोनों परिवारों के बीच झंझट हुआ. ताराचंद परिवार की तरफ से SC/ST ऐक्ट के तहत शिकायत दर्ज कराई गई. फिर बाद में ये मामला सुलझ गया. इसके बाद दोनों परिवारों के बीच फिर से लड़ाई हुई. ताराचंद परिवार ने फिर से शिकायत दर्ज करवाई. और अब ये गोपी की हत्या वाली वारदात हुई है. क्या 2 अप्रैल को हुए बंद के दौरान भी इन दोनों परिवारों के बीच कोई तनातनी हुई, ये फिलहाल मालूम नहीं चल सका है.

2 अप्रैल को शोभापुर में खूब हिंसा हुई थी
शोभापुर गांव मेरठ जिले में पड़ता है. 2 अप्रैल को बंद के दौरान मेरठ में खूब हंगामा हुआ. सबसे ज्यादा हिंसा इसी शोभापुर में हुई. हुड़दंगियों ने पुलिस की एक चौकी को आग लगा दी. ये चौकी शोभापुर चौराहे के पास ही थी. जिस लिस्ट की बात हो रही है, उसमें इस गांव के कई और दलितों का नाम है. मालूम चला है कि उनमें से ज्यादातर फिलहाल गांव छोड़कर भागे हुए हैं. कुछ लोगों का कहना है कि वो इस लिस्ट से डरकर भागे हैं. कई लोगों का ये भी कहना है कि ये सब पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए फरार हैं. पुलिस वीडियो फुटेज देखकर बंद के दौरान हुई हिंसा और हंगामे में शामिल लोगों की शिनाख्त कर रही है. कहा जा रहा है कि दोषियों पर कार्रवाई होगी.

SC/ST ऐक्ट में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ बदलाव किए. इसके विरोध में 2 अप्रैल को एक भारत बंद बुलाया गया. दलित कोर्ट द्वारा किए गए इन बदलावों का विरोध करने के लिए जमा हुए. इस दिन काफी हिंसा भी हुई.
SC/ST ऐक्ट में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ बदलाव किए. इसके विरोध में 2 अप्रैल को एक भारत बंद बुलाया गया. दलित कोर्ट द्वारा किए गए इन बदलावों का विरोध करने के लिए जमा हुए. इस दिन काफी हिंसा भी हुई.

करीब तीन दशक पुराना झगड़ा है यहां जातियों के बीच
शोभापुर गांव में पिछले काफी समय से जातियों का तनाव चल रहा है. यहां सबसे ज्यादा तादाद दलितों की है. उसके बाद गुर्जरों की संख्या है. मुस्लिम भी अच्छी-खासी संख्या में हैं. कहते हैं कि इस गांव में जातियों के आपसी झगड़े की शुरुआत करीब 30 साल पहले 1990 में हुई थी. एक क्रिकेट मैच हो रहा था. उसी दौरान झगड़ा हुआ और एक दलित युवक को गोली मार दी गई. उस दलित युवा का नाम ज्ञान सिंह था. ज्ञान का इलाज हुआ. वो बच गए. उनकी उम्र 50 के पार है अब. तब भी उनका नाम इस लिस्ट में है. उस घटना के बाद शोभापुर में जाति वाला झगड़ा बना रहा.

बातचीत से ऐसा नहीं लगा कि पुलिस इस लिस्ट को गंभीरता से ले रही हो. वो इसे खारिज कर रही है. सवाल यहीं पर उठता है. कि ऐसी किसी ‘हिट लिस्ट’ को नजरंदाज कैसे किया जा सकता है? एहतियातन ही सही, ये तो पता चलना ही चाहिए कि इसे बनाया किसने.


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