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'रात में भोपाल में दंगे' की असल कहानी

30 मई की रात को भोपाल के पुराने इलाकों में बवाल कट गया. भोपाल के हमीदिया अस्पताल में खुदाई में मिले अवशेष को लेकर हिंदू और मुसलमान एक दूसरे से भिड़ लिए. पत्थरबाज़ी और तोड़-फोड़ भी हुई. कुछ गाड़ियों में आग भी लगा दी गई. पुलिस को हालात काबू करने में कुछ घंटे लगे. लेकिन रात में ही मामला शांत भी हो गया. इस दौरान एक बार फिर माहौल बिगाड़ने में सोशल मीडिया आगे रहा.

झगड़ा यूं समझें

हमीदिया अस्पताल पर मरीज़ों का बहुत दबाव रहता है. इसलिए यहां 1200 बेड का एक नया विंग बनाया जा रहा है. इसकी इमारत के लिए खुदाई चल रही थी. चार दिन पहले खुदाई के दौरान एक पुरानी इमारत के अवशेष मिले थे. स्थानीय मीडिया के मुताबिक पहले विश्वयुद्ध के कुछ शिलालेख भी मिले हैं. इसके बाद हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय उसे अपना धर्मस्थल बताने लगे. लेकिन प्रशासन ने वहां अब तक पूजा या नमाज़ नहीं होने दी है. जहां वो सब मिला, उसके ठीक सामने हनुमान मंदिर है. मंगलवार सुबह प्रशासन ने मंदिर पर से एहतियातन लाउडस्पीकर हटवा दिया था. भोपाल के कलेक्टर निशांत वरवड़े ने पत्रिका को दिए बयान में कहा,

”वो जगह सरकारी सम्पत्ति है, उस जगह धार्मिक गतिविधियां न हों. दस्तावेज़ों में भी वहां धार्मिक स्थल होने के सबूत नहीं मिले हैं. प्रथम विश्व युद्ध के समय के कुछ प्रमाण ज़रूर मिले हैं.”

पूरे मामले पर दी लल्लनटॉप न्यूज़रूम में हुई चर्चा यहां देखेंः

फिर बलवा कैसे हो गया

प्रशासन के रुख के बावजूद दोनों पक्ष अपनी ज़िद पर अड़े थे. मंगलवार शाम 8.30 के करीब इफ्तार के बाद लोग हमीदिया के बाहर जमा होने लगे. उतने में ही एक भीड़ उन लोगों की भी जमा हो गई, जो अस्पताल के अंदर बने मंदिर में जाना चाहते थे. लेकिन अस्पताल का गेट पहले ही बंद कर दिया गया था. तो बाहर जमा भीड़ ने एक दूसरे पर पत्थर चलाने शुरू कर दिए. पुलिस ने आंसू-गैस और लाठीचार्ज से एक बार ये सब बंद करा दिया.

 

देर रात सड़कों पर जमा पुलिस फोर्स
देर रात सड़कों पर जमा पुलिस फोर्स

 

दो घंटे बाद दोनों तरफ से और बड़ी भीड़ लौटी और दोबारा पत्थरबाज़ी शुरू हो गई. स्थानीय मीडिया के मुताबिक पीरगेट जैसे कुछ इलाकों में भीड़ इतनी ज़्यादा थी कि पुलिस को और फोर्स आने का इंतज़ार करना पड़ा. इस तरह की खबरें भी हैं कि  भीड़ में कुछ लोग तलवार और लाठियां लिए हुए थे और कुछ जगह पेट्रोल बम भी फेंके गए. पुलिस की भी एक गाड़ी में तोड़-फोड़ हुई. लेकिन इसके बाद रैपिड एक्शन फोर्स बुला ली गई और कुछ देर में स्थिति फिर काबू में आ गई.

इस दौरान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी लगातार ट्वीट कर के भोपाल के लोगों से शांति की अपील कीः

 

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लेकिन असली बवाल कटा सोशल मीडिया पर

जितनी रफ्तार से खबर नहीं चल पाती, उतनी रफ्तार से अफवाहें चलती हैं. और अफवाह को आज कर वॉट्सऐप-ट्विटर-फेसबुक नाम के पुष्पक विमान मिले हुए हैं. लोगों ने पहली फुर्सत में इस तरह के वीडियो शेयर किएः

 

 

ये वीडियो दिन का है और भोपाल में शाम आठ बजे से पहले किसी गड़बड़ की खबर नहीं थी. लेकिन इसे यही बता कर शेयर किया जा रहा था कि ये भोपाल में हुए दंगों का ‘शर्मनाक’ वीडियो है. जिन लोगों का ट्विटर अकाउंट था,  वो वहां व्यस्त थेः

 

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एक अकाउंट ने तो दंगे की भविष्यवाणी तक कीः

 

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इन ट्वीट्स और फेसबुक पोस्ट्स से इस बात का अंदाज़ा लगता है कि बलवा करने के लिए भीड़ इकट्ठा कैसे होती है. अफवाह एक बार चल देती है तो लोग बिना सही बात जाने उसे आगे बढ़ा देते हैं जिस से माहौल और खराब होता है. भोपाल में यही हुआ. दूसरी बार बलवे के लिए जो भीड़ जमा हुई, वो पहले से बड़ी थी.

जब कि भोपाल के किसी भी इलाके में रात 12 बजे तक न तो कर्फ्यू लगाया गया था, न ही उस तरह का कोई दंगा हुआ था जिसमें लोगों की जान चली जाए. टाइम्स ऑफ इंडिया  से भोपाल के कलेक्टर ने ये कहा भी,

” पूजा के लिए अस्पताल से बड़ी कोई जगह नहीं हो सकती. हमें विश्वास है कि लोग कानून व्यवस्था बनाए रखेंगे. फिलहाल कर्फ्यू नहीं लगाया गया है ”

भोपाल में पत्थरबाज़ी और तोड़-फोड़ ज़रूर हुई थी, जिसके बाद से हमीदिया अस्पताल के इर्द-गिर्द भारी फोर्स तैनात कर दी गई थी. एहतियात के तौर पर रैपिड एक्शन फोर्स को बलवा काबू होने के बाद भी रोक कर रखा गया है. असल असुविधा हमीदिया आने वाले मरीज़ों को हुई जिन्हें भोपाल एम्स और दूसरे अस्पतालों में भेजा गया.

ये जानें कि भोपाल के एक इलाके में कुछ गड़बड़ ज़रूर हुई है लेकिन ऐसा कोई दंगा नहीं हुआ है जिसमें लोगों को मार दिया गया हो. इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी किसी अफवाह पर यकीन न करें और ऐसे मैसेज आगे बढ़ाने से बचें.


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