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सरकार जानना चाहती है कि आपने किससे कितनी देर बात की, कब बात की, कितनी बार बात की?

दूरसंचार विभाग. अंग्रेज़ी में कहें तो Department of Telecom (DoT) देश के नागरिकों के कॉल डाटा रिकॉर्ड यानी CDR इकट्ठा करना चाह रहा है. CDR मलतब किसी यूज़र ने किस तारीख को किस दिन कहां बात की, इसका समूचा लेखाजोखा. और केंद्र सरकार के अधीन आने वाले दूरसंचार विभाग ने मोबाइल कंपनियों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है, कि वे जनवरी और फरवरी में कुछ तयशुदा समय समा का CDR अपने लोकल दूरसंचार विभाग को सौंपना होगा. इस फैसले को लेकर टेलीकॉम कंपनियों ने आपत्ति दर्ज करवाई है. कहा है कि ऐसा करने का कोई नियम नहीं है. और सरकार दबाव डाल रही है.

भिन्न-भिन्न टेलीकॉम कंपनियों ने इस पर सवाल उठाये हैं. कहा है कि इससे प्राइवेसी का दखल होता है, और ये नियमों के विरुद्ध है.
भिन्न-भिन्न टेलीकॉम कंपनियों ने इस पर सवाल उठाये हैं. कहा है कि इससे प्राइवेसी का दखल होता है, और ये नियमों के विरुद्ध है.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर बताती है कि दिल्ली, आन्ध्र प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, केरल ओडिशा, मध्य प्रदेश और पंजाब के नागरिकों की कॉल रिकॉर्ड मांगी गयी है. इसके पहले बीते हफ्ते भी खबरें आई थीं कि DoT ने टेलीकॉम कंपनियों से दिल्ली के उन इलाकों के CDR मांगे थे, जिनमें जजों, मंत्रियों और सांसदों के आवास हैं.

एक टेलीकॉम कंपनी के अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर मीडिया से बताते हैं,

“ऐसा बहुत महीनों से चल रहा था. लेकिन जनवरी और फरवरी के महीने में CDR मांगने की रिक्वेस्ट में भारी इजाफा हुआ है.”

शायद इन्हीं मांगों के मद्देनज़र 12 फरवरी को Cellular Operators Association of India (COAI) ने टेलीकॉम सचिव अंशु प्रकाश के सामने CDR मांगने को लेकर आपत्ति जताई. अपने लेटर में COAI ने कहा कि CDR जुटाने से हम पर जासूसी करने के आरोप लग सकते हैं.

CDR क्या चिड़िया है?

फुलफॉर्म तो ऊपर बता दिया है. CDR में क्या-क्या होता है? मोबाइल यूज़ करने वाले का नाम होता है. किसी ख़ास समय की बात हो रही है तो यूज़र ने उस दौरान कितने फोन किया और रिसीव किये? कितनी देर बात की? कॉल कैसे कटी? नार्मल तरीके से या कॉल ड्राप हुआ? यूज़र कहां से कॉल कर रहा? और जिसको कॉल किया गया है, उसकी लोकेशन क्या है? इतना डाटा है, इसलिए प्राइवेसी की बात हो रही है.

क्यों मांगे गए CDR?

अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो सका है कि CDR मांगने के पीछे की वजह क्या है. इस बारे में COAI ने भी बताया है कि CDR मांगने के पीछे DoT ने कोई कारण गिनाया, न ही उपभोक्ताओं की पहचान के बारे में कोई ज़िक्र किया, जो कि प्राइवेसी के नियम का उल्लंघन है. इस वजह से कयास ही लगाए जा रहे हैं. अगर केवल दिल्ली की बात करें, तो 2, 3 और 4 फरवरी की तारीख के दौरान के CDR मांगे गए. जिस समयावधि के CDR मांगे जा रहे हैं, उस दौरान दिल्ली में विधानसभा चुनावों के लिए पार्टियां प्रचार कर रही थीं, साथ ही दिल्ली के कई इलाकों में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर प्रदर्शन हो रहे थे.

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CDR में सारी जानकारियां हैं. लेकिन बस ये जानकारी किसी के पास नहीं कि सरकार को CDR क्यों चाहिए.

इसके साथ ही टेलीकॉम कंपनी के लोग ये भी सोच रहे हैं कि कॉल ड्राप (यानी अचानक से फोन कट जाने) की दिक्कत का समाधान ढूंढने की कोशिश DoT कर रहा है, इस वजह से CDR मांगे जा रहे हैं. लेकिन DoT ने कारण नहीं गिनाए हैं, इस वजह से मामला संदेहास्पद होता जा रहा है.

नियम क्या हैं?

टेलीकॉम कंपनियों और DoT के बीच हुए लाइसेंस समझौते के नियम क्रमांक 39.20 के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियों को एक साल तक सारे CDR और IP एड्रेस का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होता है. लाइसेंस देने वाली संस्था DoT इन रिकार्ड्स की जांच कर सकती है, और समय-समय पर इन CDR को लेकर आदेश जारी कर सकता है.

यहां पर ये भी कहा गया है कि टेलीकॉम कंपनियां कानूनी एजेंसियों और अदालतों के रिक्वेस्ट और आदेश पर CDR का डाटा मुहैया करा सकती हैं.

पिक्चर: Reuters
पिक्चर: Reuters

ये तसल्लीबख्श नियम साल 2013 में पुराने नियमों की मरम्मत करने के बाद आए थे. कैसे? क्योंकि उस समय सदन में भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा था कि कुछ नेताओं के अनाधिकारिक रूप से फोन टैप किये जा रहे हैं. इसके बाद यूपीए सरकार ने नये नियमों के लिए कार्य शुरू किया. नए नियम आये. गृह सचिव की सहमति मिलने के बाद एसपी या उससे ऊंची रैंक के पुलिस अधिकारी ही टेलीकॉम कंपनियों से कॉल रिकॉर्ड मांग सकते हैं. हर महीने इस घटना की जानकारी पुलिस अधिकारी को जिले के जिलाधिकारी को देनी होती है.

ये जो CDR मांगने की नयी रिक्वेस्ट आई है, ये किसी नियम के तहत नहीं आता है. ऐसे में अधिकारी क्या कहते हैं? TRAI के पूर्व चेयरपर्सन रहे एक व्यक्ति ने इन्डियन एक्सप्रेस को बताया कि ये एकदम अलग तरीके का मामला है. उनके पास डाटाबेस है, तो वे खुद से जानकारी जुटा सकते हैं. पूछ सकते हैं. लेकिन अगर आप टेलीकॉम कंपनियों से CDR मांग रहे है तो ये प्राइवेसी और नियमों का उल्लंघन है. साथ ही वो लोग ये भी कह रहे हैं कि इस इस दिन का CDR निकालो. इतने ज्यादा डीटेल के लिए उनके पास कोई पुख्ता कारण होना चाहिए.

विपक्ष ने कुछ कहा?

एकदम कहा. क्यों नहीं कहेगा विपक्ष. विपक्ष का काम ही है कहना. कांग्रेस नेता मनीष तिवारी. उन्होंने कहा,

“सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेसी को एक मूलभूत अधिकार ठहराया है. लेकिन बीजेपी की सरकार लगातार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का निरंतर उल्लंघन करती आ रही है. हम कई देर से बात को कह रहे हैं एनडीए और बीजेपी की सरकार एक ऐसा स्टेट बनाने जा रहे हैं जहां पर आम नागरिकों की प्राइवेसी खत्म हो गई है. सरकार ने सारे नागरिकों के कुछ कॉल डिटेल रिकॉर्ड सेलफोन कंपनी से मांगे हैं. हम पूछना चाहते हैं क्या औचित्य है? क्या बीजेपी की सरकार नियमों को तोड़ते हुए आम नागरिक के प्राइवेसी के ऊपर हमला कर रही है?”

विभाग ने क्या कहा?

सवाल तो मीडिया ने भी पूछे हैं. लेकिन अब तक न सरकार की ओर से कोई सफाई आई है, न ही DoT की ओर से. लेकिन Economic Times के मुताबिक़, DoT के एक अधिकारी ने जानकारी दी है कि सरकार केवल कॉल क्वालिटी जांचना चाहती है. इसके लिए सरकार को बहुत सारा आंकड़ा जुटाना है ताकि पता चले कि खराब कॉल क्वालिटी की वजह क्या है?


लल्लनटॉप वीडियो : एयरटेल, वोडाफोन आईडिया और BSNL जैसी टेलीकॉम कंपनियों से क्यों नाराज है सुप्रीम कोर्ट?

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