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फोन पर पापा को कहा 'बिल्डिंग से कूद रही हूं, कोशिश करूंगी कि बच जाऊं', लेकिन...

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24 मई की तारीख सूरत के लिए एक काले दिन के रूप में याद की जाएगी. शुक्रवार को एक इमारत में आग लगने की वजह से 22 छात्र छात्राओं की मौत हो गई. इस घटना के बाद कोचिंग सेंटर के संचालक और बिल्डर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. वहीं कमर्शियल बिल्डिंग के मालिक हरसुख वेकरिया को पुलिस ढूंढ रही है. प्रदेश के मुखिया विजय रुपाणी ने मामले की जांच के लिए शहरी सचिव को काम पर लगाया है. साथ ही उन्होंने दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा देने की भी बात की है.

दूसरी तरफ इस घटना से सीख लेते हुए गुजरात के कोचिंग इंस्टिट्यूट और हॉस्पिटल्स के लिए नए मानक तय किए जा रहे हैं. पूरे गुजरात की इमारतों का फायर सेफ्टी ऑडिट करने की तैयारी हो रही है. तमाम तरह के नए नियम लाने की तैयारी हो रही है जिस से ये सुनिश्चित हो सके कि ऐसी घटना फिर से न हो पाए. लेकिन इस मामले में गुजरात सरकार कुछ भी करे, कटु सत्य तो यही है कि 22 बच्चे अब इस दुनिया में नहीं रहे.

शुक्रवार को हुए इस हादसे के बाद शनिवार के दिन सभी मृतकों की एक साथ अंतिम यात्रा निकली. इस अंतिम यात्रा में सभी के आंखों में आंसू थे. सभी लोग मृतकों के परिवारों को ढांढस बंधा रहे थे. समझाने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन समझाते-समझाते खुद ही रो पड़ते थे.

घटना के अगले दिन बच्चों की अंतिम यात्रा एक साथ निकाली गई.
घटना के अगले दिन बच्चों की अंतिम यात्रा एक साथ निकाली गई.

मारे गए बच्चों में से एक थी कृष्णा. जिनके पिता ने रोते हुए मीडिया को बताया:

आग लगने के बाद मेरी बेटी का फोन आया. उसने कहा पापा हमारे यहां बिल्डिंग में आग लगी है. लकड़ी की सीढ़ियां भी जलकर खाक हो गई हैं. सभी खिड़की से कूदकर नीचे जाने की कोशिश कर रहे हैं. मैं भी कूद रही हूं. मैं अपनी जान बचाने की कोशिश करूंगी पापा.

कृष्णा के पिता ने रोते हुए बताया कि आखिरी कॉल बेटी ने उन्हें ही किया था. (कृष्णा की फाइल तस्वीर)
कृष्णा के पिता ने रोते हुए बताया कि आखिरी कॉल बेटी ने उन्हें ही किया था. (कृष्णा की फाइल तस्वीर)

इतना बोलकर वो कूद गई. जिसके बाद उन्होंने फिर से फोन किया तो सामने से किसी और ने फोन उठाया. जानकारी मिली कि उनकी बेटी इस दुनिया में नहीं रही.

इस घटना के बाद तमाम तरह की बातें सामने आ रही हैं. कुछ बातें ऐसी हैं जिन्हें सिर्फ सुनकर शरीर में सिहरन पैदा हो जाती है. शनिवार को गुजरात बोर्ड के 12वीं के नतीजे सामने आए. पता चला कि जो बच्चे मारे गए हैं उनसे 5 ऐसे हैं जिन्होंने 12वीं के पेपर्स दिए थे और वे सभी अच्छे नंबर्स से पास हो गए. घरवालों ने कहा कि ऐसे रिज़ल्ट का क्या करेंगे जिसे देखने के लिए बच्चे ही इस दुनिया में नहीं है.

वहीं 12 बच्चों की जान बचाने वाले केतन की लोग तारीफ करते नहीं रुक रहे हैं. जिन्होंने अपनी सूजबूझ से 12 बच्चों की जान बचाई. इन बच्चों के परिवार वालों का मानना है कि केतन भगवान के रूप में ही मौके पर पहुंचे और उन्होंने उनके बच्चों को बचा लिया.

केतन ने इमारत में आग लगने पर 12 बच्चों को बचाया था.
केतन ने इमारत में आग लगने पर 12 बच्चों को बचाया था.

इन्हीं में से एक हैं उर्मी वकारीया. उन्होंने इस घटना पर बात करते हुए आज तक की संवाददाता गोपी मनियर को बताया:

नीचे आग लगी थी, वहां से धुआं ऊपर आ रहा था. धुआं बढ़ गया, और फिर हमारे कोचिंग में भी आग लग गई. कुछ लोग खुद को बचाने के लिए कूद गए. कुछ जल गए. फायर ब्रिगेड वाले पहुंच तो गए थे, लेकिन उनके पास कुछ था ही नहीं कि हमें बचाया जा सके. कुछ कपड़ा, सीढ़ी कुछ भी नहीं था. उनके पास सीढ़ियां नहीं थीं. जो थीं वो केवल एक फ्लोर पर आकर खत्म हो जा रही थीं. मैं बहुत मुश्किल से बच पाई. मुझे भार्गव सर और केतन ने दूसरे लोगों के साथ मिलकर बचाया.

केतन ने जिन बच्चों की जान बचाई उनमें उर्मी वकारिया भी शामिल थीं.
केतन ने जिन बच्चों की जान बचाई उनमें उर्मी वकारीया भी शामिल थीं.

अब इस घटना के बाद सरकार तमाम तरह के नियम लाने की तैयारी कर रही है. दूसरे प्रदेशों में भी इस घटना के बाद लोग डरे हुए हैं. अपने बच्चों को कोचिंग सेंटर भेजने से डर रहे हैं. लेकिन डरने की जगह हमारी उन सभी पैरेंट्स से अपील है कि सरकार जब कदम उठाएगी तो उठाएगी. अपने नौनिहालों की सुरक्षा के लिए वे खुद कोचिंग सेंटर जाकर सुनिश्चित करें. देखें कि उनके बच्चे किन हालात में पढते हैं. देखें कि कोचिंग सेंटर के पास सुरक्षा के उपकरण मौजूद हैं या नहीं. ये तमाम काम आप खुद कर लें. सरकार के भरोसे न रहें, क्योंकि सरकारें हमेशा दुर्घटना के बाद ही जागती हैं.


 

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Surat fire tragedy different emotional stories of parents after death of 22 students

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