Submit your post

Follow Us

बकरीद पर छूट से खफा SC बोला, लोगों को महामारी में धकेल रही केरल सरकार

पहले यूपी में कांवड़ यात्रा, फिर केरल में बकरीद (Bakrid) पर कोरोना पाबंदियों में छूट का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. सुनवाई हुई तो सर्वोच्च अदालत ने सख्त टिप्पणियां कीं. यहां तक कह दिया कि कुछ समूहों के दवाब में आकर राज्य सरकार लोगों को महामारी में धकेल रही है. यह बेहद खराब स्थिति है. इस तरह लोगों के स्वास्थ्य के अधिकार से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता. हालांकि इतनी सख्त टिप्पणियां करते हुए कोर्ट ने ये भी कहा कि अब हम केरल सरकार की अधिसूचना रद्द भी नहीं कर सकते, घोड़ा अस्तबल से निकल चुका है.

पॉजिटिविटी रेट 15% से ज्यादा, फिर भी दी छूट

सुप्रीम कोर्ट केरल की पी. विजयन सरकार के उस आदेश से काफी नाराज दिखा, जिसके जरिए ज्यादा संक्रमण वाली जगहों पर भी कोरोना प्रतिबंधों में ढील दे दी गई थी. कोर्ट ने 19 जुलाई को डी श्रेणी में चिह्नित इलाकों में दुकानें खोलने की आलोचना की. डी श्रेणी में वो इलाके आते हैं, जहां संक्रमण दर काफी ज्यादा होती है. लाइव लॉ डॉट कॉम के मुताबिक, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा,

बेहद चिंताजनक बात यह है कि डी श्रेणी में, जहां संक्रमण दर 15% से ऊपर है, पूरे दिन के लिए छूट दी गई थी. यह छूट पूरी तरह से गैरजरूरी थी.”

कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में हम केरल को संविधान के अनुच्छेद 141 व अनुच्छेद 21 पर ध्यान देने, और यूपी (कांवड़) के मामले में दिए गए निर्देशों का पालन करने का आदेश देते हैं. बता दें कि 5% से कम संक्रमण दर वाले इलाकों को A श्रेणी में रखा जाता है. 5% से 10% संक्रमण दर वालों को B श्रेणी में, और 10% से 15% संक्रमण दर वाले इलाकों को C श्रेणी में रखा जाता है. इससे ऊपर के इलाके D श्रेणी में आते हैं.

कोर्ट ने आगे कहा कि

“कुछ समूहों की वजह से भारत के नागरिकों को एक महामारी में धकेल दिया गया है. यह दिखाता है कि स्थिति कितनी खराब है.”

कोर्ट का कहना था कि यह स्पष्ट है कि किसी भी तरह के दबाव समूह, चाहें वो धार्मिक हों या कोई और, नागरिकों के मौलिक अधिकार में दखल नहीं दे सकते. केरल सरकार की ओर से चूंकि 19 जुलाई के लिए ये छूट दी गई थी, ऐसे में बेंच ने सरकारी आदेश को रद्द करने की मांग स्वीकार नहीं की. हालांकि, चेतावनी दी कि अगर राज्य के इस कदम की वजह से कोरोना फैलता है तो कोर्ट संज्ञान ले सकता है.

Kozhikode
नजारा सोमवार 19 जुलाई का है, जब केरल के कोझिकोड शहर के बाजार में भीड़ उमड़ पड़ी. (फोटो- पीटीआई)

केरल सरकार ने क्या दलील दी थी?

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 19 जुलाई को सुनवाई करते हुए केरल सरकार से प्रतिबंधों में ढील पर जवाब मांगा था. इस पर केरल सरकार ने व्यापारियों की दिक्कतों का हवाला दिया था. सरकार की ओर से कहा गया कि

“व्यापारियों को राहत प्रदान करने के लिए ये छूट दी गई थी, जो उम्मीद कर रहे थे कि बकरीद पर बिक्री से उनकी परेशानियां कुछ हद तक कम हो सकेंगी. दुकानदारों ने बकरीद को देखते हुए बहुत पहले ही सामान जमा कर लिया था. व्यापारी संगठन कड़े प्रतिबंधों के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे. नियमों के खिलाफ जाकर राज्य में दुकानें खोलने का ऐलान भी कर दिया था.”

कोर्ट ने इस हलफनामे पर भी सख्त टिप्पणी की. इसे ‘बेहद खेदजनक स्थिति’ करार दिया. कोर्ट ने कहा कि

“हम केवल ये इशारा कर सकते हैं कि यह हलफनामा एक खेदजनक स्थिति की तरफ ध्यान दिलाता है. यह किसी भी तरीके से नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार की रक्षा की गारंटी नहीं देता.”

कोर्ट ने केरल के सीएम पिनराई विजयन के उस बयान का जिक्र भी किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जहां तक ​​संभव हो, सिर्फ वैक्सीन ले चुके लोग ही दुकानों पर जाएं. कोर्ट ने कहा कि “जहां तक ​​संभव हो” की ये बात विश्वास पैदा नहीं कर पा रही हैं.

यूपी को रद्द करनी पड़ी कांवड़ यात्रा

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने यूपी में कांवड़ यात्रा को लेकर भी सख्ती दिखाई थी. योगी आदित्यनाथ सरकार ने 25 जुलाई से होने वाली कांवड़ यात्रा को मंजूरी दे दी थी. कहा था कि कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए यात्रा का आयोजन किया जा सकता है. उत्तराखंड सरकार ने कांवड़ यात्रा रद्द करने का ऐलान कर दिया. उसके बाद भी यूपी सरकार ‘सांकेतिक’ कांवड़ यात्रा के आयोजन पर जोर देती रही. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया. केंद्र और यूपी सरकार से जवाब मांगा. केंद्र सरकार कांवड़ यात्रा के आयोजन के पक्ष में नहीं दिखी. लेकिन यूपी सरकार ने हलफनामे में कहा कि राज्य में कांवड़ यात्रा पर पूरी तरह रोक नहीं रहेगी. ‘सांकेतिक’ यात्रा होगी. मंदिरों में गंगाजल की सप्लाई की जाएगी. इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख दिखाते हुए कहा था कि यूपी सरकार इस बारे में फिर से विचार करे, क्योंकि हर किसी का जीवन महत्वपूर्ण है. धार्मिक और अन्य भावनाएं भी इसी मौलिक अधिकार के तहत ही आती हैं. इसके बाद 17 जुलाई को यूपी सरकार ने कांवड़ संघों से बातचीत के बाद यात्रा न आयोजित करने का ऐलान किया.


वीडियो – कांवड़ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट और केंद्र ने UP सरकार को क्या साफ संकेत दे दिया?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

टॉप खबर

मुंबई में बारिश से बड़ा हादसा, चेंबूर में दीवार गिरने से 17 की मौत

विक्रोली में भी 6 की मौत, पीएम ने दुख जताया, मुआवजे की घोषणा की.

टी-सीरीज़ वाले भूषण कुमार पर रेप का आरोप लगा, मुंबई में रिपोर्ट दर्ज

मुंबई के डीएन थाने में तीस साल की महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई.

अफगानिस्तान में भारतीय पत्रकार दानिश सिद्दीकी की हत्या, तालिबान ने किया था हमला

दानिश सिद्दीकी अपनी तस्वीरों के लिए फेमस थे, 2018 में Pulitzer अवार्ड भी मिला था.

MP के विदिशा में 30 से ज्यादा लोग कुएं में गिरे, 4 की मौत, 13 लापता, 19 बचाए गए

बच्चा कुएं में गिरा, तो बड़ी संख्या में ग्रामीण कुएं की छत पर चढ़ गए थे.

'नदिया के पार' जैसी बड़ी फ़िल्मों में काम कर चुकीं एक्ट्रेस सविता बजाज की हताशा, "मेरा गला घोंट दो"

इलाज के लिए पैसे नहीं हैं.

PM मोदी ने वाराणसी में जिस रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर का उद्घाटन किया, वो है क्या?

योगी सरकार के लिए क्या बोले PM?

कांवड़ यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई सख्ती, लेकिन यूपी सरकार पीछे हटने को तैयार नहीं?

योगी सरकार में स्वास्थ्य मंत्री के बयान से तो कुछ ऐसा ही लग रहा.

पीएम मोदी के मंत्रिमंडल विस्तार में ऐसा क्या हुआ कि महाराष्ट्र बीजेपी में उथल-पुथल मच गई?

क्या पंकजा मुंडे की नाराजगी महाराष्ट्र बीजेपी को भारी पड़ेगी?

पंजाबी सिंगर मनमीत सिंह का शव बरामद हुआ, भारी बारिश के बाद बह गए थे

एक नाला पार करते वक्त गिर गए थे मनमीत सिंह.

कोंगु नाडु: मोदी कैबिनेट का विस्तार तमिलनाडु के विभाजन से जुड़े इस पुराने मुद्दे को कैसे हवा दे गया?

तमिल मीडिया के एक हिस्से में इसे लेकर काफी गर्मजोशी दिखाई जा रही है.