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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ट्रायल कोर्ट में दोषी साबित होने के बाद बेगुनाही की कोई कल्पना नहीं

भारत की अदालतों ने यह सिद्धांत अपनाया हुआ है कि जब तक आरोपी का जुर्म साबित नहीं होता, तब तक उसे दोषी करार नहीं दिया जाना चाहिए. लेकिन क्या दोषी करार दिए गए किसी व्यक्ति को विशेष कारणों या परिस्थितयों मे बेगुनाह माना जा सकता है? जवाब है, नहीं. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उस व्यक्ति की बेगुनाही की कल्पना नहीं की जाएगी, जिसको निचली अदालत ने दोषी ठहराया हुआ है.

क्या कहा अदालत ने?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने मंगलवार 7 सितंबर को कहा,

“एक बार जब आरोपी को निचली अदालत ने दोषी ठहराया है तो उसके बाद बेगुनाही की कोई कल्पना नहीं की जाएगी.”

दरअसल, उत्तर प्रदेश की एक महिला शकुंतला शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. मामला उनके पति की हत्या के दोषियों को दी गई जमानत से जुड़ा था. इन लोगों ने सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील की थी. कोर्ट ने अपील लंबित रहने के दौरान उन्हें जमानत दे दी थी. इसी के खिलाफ शकुंतला शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय द्वारा जमानत देने वाले आदेश को रद्द कर दिया और दोषियों को आत्मसमर्पण करने को कहा. फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति एमआर शाह ने यह भी कहा,

“लंबित अपील के चलते अभियुक्त को जमानत देने के आदेश में पूर्ण स्पष्टता का अभाव है. इसमें यह बात स्पष्ट नहीं है कि निर्णय के किस भाग को सबमिशन (न्यायालय में वकील का निवेदन) कहा जा सकता है और किस भाग को निष्कर्ष कहा जाए.”

पीठ ने आगे बताया कि हर फैसले में 4 बुनियादी बातें होती हैं. सामग्री (प्रसंग) मतलब तथ्यों का विवरण, कानूनी मुद्दे या सवाल, किसी फैसले पर पहुंचने के लिए विचार-विमर्श और फिर आख़िरी फैसला.

न्यायमूर्ति शाह ने कहा,

“कोई भी फैसला तथ्य के निष्कर्षों से तैयार होता है. वो फैसला तय करता है कि प्रासंगिक कानूनी सिद्धांत क्या हैं और उन कानूनी सिद्धांतों को तथ्यों पर लागू भी करना होता है. कोई भी फैसला न्यायधीश के व्यक्तित्व को दर्शाता है, इसलिए फैसलों को बहुत सावधानी के साथ लिया जाना चाहिए.”

पीठ ने इस ओर भी इशारा किया कि फैसले में दिए गए तर्क समझने योग्य और तार्किक होने चाहिए. उसमें सटीकता और स्पष्टता होनी चाहिए. सभी निष्कर्षों के पीछे उचित कारण भी होने चाहिए.

(आपके लिए ये स्टोरी हमारे साथी साजिद खान ने की है.)


वीडियो- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नोएडा का सुपरटेक टावर इस तरह गिराया जाएगा? 

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