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अयोध्या : रिव्यू पिटीशन दायर करने से सुन्नी वक्फ बोर्ड का इंकार

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बाबरी मस्जिद और राम मंदिर का मामला. सुप्रीम कोर्ट ने निर्णय दिया. 9 नवम्बर को. कहा कि मंदिर वाली पूरी ज़मीन रामलला विराजमान को देंगे. और आदेश दिया गया कि मुस्लिम पक्ष को पांच एकड़ की ज़मीन दी जाए. मुस्लिम पक्ष में इस मामले को लेकर अभी भी कन्फ्यूज़न है. रिव्यू पिटीशन फ़ाइल करेंगे या नहीं? इस पर कन्फ्यूज़न.

अब आज यानी 26 नवंबर को सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड की मीटिंग हुई. इस मीटिंग में बोर्ड के आठ लोगों में से 7 लोग मौजूद थे. इनमें से 6 लोगों ने कहा कि वे इस मामले में कोई पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करना चाहते हैं. हालांकि बोर्ड ने ये साफ़ नहीं किया है कि वे पांच एकड़ की ज़मीन से जुड़े निर्णय का क्या करेंगे?

मीटिंग के बाद जारी किया गया सुन्नी वक्फ बोर्ड का लेटर, जिसमें बोर्ड ने साफ़ किया है कि वो पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करने वाले है.
मीटिंग के बाद जारी किया गया सुन्नी वक्फ बोर्ड का लेटर, जिसमें बोर्ड ने साफ़ किया है कि वो पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करने वाले है.

मीटिंग में अधिवक्ता इमरान मबूद खान नहीं मौजूद थे. और छः के अलावा जिस बोर्ड सदस्य ने मीटिंग में रिव्यू पिटीशन फ़ाइल करने की वकालत की, वो थे अधिवक्ता अब्दुल रज्ज़ाक खान. मीटिंग में उन्होंने मांग रखी की कि बोर्ड को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए. मबूद खान और रज्ज़ाक खान ने पहले भी कहा है कि वे चाहते हैं कि बोर्ड पुनर्विचार याचिका दायर करे.


भले ही सुन्नी वक्फ बोर्ड पुनर्विचार याचिका दायर न कर रहा हो, लेकिन आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पूरा मन बनाया है कि वो इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करेगा. “दी लल्लनटॉप” से बात करते हुए सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील और AIMPLB के सदस्य ज़फ़रयाब जीलानी ने साफ़ किया था कि अगर सुन्नी वक्फ बोर्ड पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करना चाहता है, तो ये इसका चुनाव है. लेकिन आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपना रुख स्पष्ट किया है कि वो पुनर्विचार याचिका दायर करेगा.


लल्लनटॉप वीडियो : अयोध्या: सुन्नी वक्फ बोर्ड और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बीच क्या चल रहा है?

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