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#ByCottNTA और #CancelBHUEntrance क्यों ट्रेंड हुआ?

ट्विटर पर #ByCottNTA और #CancelBHUEntrance ट्रेंड हो रहा है. 150k ट्वीट हो चुके हैं. ये ट्वीट BHU की प्रवेश परीक्षा में हुई अव्यवस्था को लेकर किए जा रहे हैं. ट्वीट करने वाले छात्रों का दावा है कि BHU की प्रवेश परीक्षा कराने में NTA सक्षम नहीं है. इस एंट्रेस एग्जाम में भारी दुर्वव्यस्था और धांधली हुई है. BHU  प्रवेश परीक्षा में ऐसा क्या हुआ कि छात्र ट्विटर पर मोर्चा खोले हैं. जानेंगे, लेकिन इससे पहले जान लेते हैं कि एनटीए क्या है जिसके द्वारा प्रवेश परीक्षा कराए जाने पर इतना बवाल मचा है.

क्या है NTA?

NTA यानी National Testing Agency. एक स्वायत्त एजेंसी, जिसे केंद्रीय मंत्रीपरिषद द्वारा अनुमोदित किया गया है. नवंबर 2017 से उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित कराती है. एनटीए के पास JEE Main, NEET-UG,NET, सामान्य प्रबंधन प्रवेश परीक्षा (CMAT), स्नातक फार्मेसी योग्यता परीक्षा (GPAT), BHU की प्रवेश परीक्षा समेत कई अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों की प्रवेश परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी है.

BHU प्रवेश परीक्षा से छात्रों को क्या शिकायत है?  

अखबारों के आंकड़ों की मानें तो इस बार बीएचयू में 5 लाख से अधिक छात्रों ने फॉर्म भरा. कई छात्रों के आरोप हैं कि कई प्रवेश परीक्षाओं में परीक्षा से ठीक पहले, देर रात को टेस्ट मोड्यूल बदल दिया गया. कई जगह रात 11 बजे नया प्रवेश पत्र डाउनलोड करने की सूचना जारी कर दी गई, तो कई जगहों पर टेस्ट पेपर ही फैली हुई स्याही से भरा हुआ था.

कई छात्रों को देर से एडमिट कार्ड मिलने से उनकी परीक्षा छूट गई. सिवान के पड़ेंजी के रहने वाले रोहित का 6 अक्टूबर को बीएससी एग्रीकल्चर का एंट्रेस एग्जाम था. लेकिन प्रवेश पत्र देर से आने और परीक्षा केंद्र की दूरी के चलते रोहित प्रवेश परीक्षा नहीं दे सके. रोहित ने बताया,

“हमारा 4th प्रिफरेंस पटना था. एडमिट कार्ड एक दिन पहले शाम को 5 बजे आया. हमारे यहां से साधन नहीं था जाने का. बहुत कोशिश किए, लेकिन जा नहीं पाए. ऑनलाइन तैयारी किए थे, दो साल की मेहनत बर्बाद हो गई”

कई छात्रों का यह भी आरोप है कि प्रवेश परीक्षा के दौरान टेस्ट पेपर में लैंग्वेज चेंज नहीं हो सकी. दरअसल बीएचयू, बीएससी समेत कई अन्य विषयों की प्रवेश परीक्षा हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में कराता है. बिहार के औरंगाबाद में रहने वाली अंजलि का परीक्षा केंद्र घर से 100 किलोमीटर दूर डाल्टेनगंज में था. अंजलि का कहना है,

 मैंने हिंदी में इंट्रेंस देना चुना था. लेकिन मेरे डेस्कटॉप में ऑप्शन ही नहीं आया. मैंने उन लोगों को बोला तो कहा गया कि जो चुना है वही पूछा जा रहा है. मेरा साल खराब हो गया.

कमोबेस ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा लखीमपुर के विनय को. विनय को तीसरी प्रिफरेंस पर लखनऊ में परीक्षा केंद्र मिला. यहां उनके नाम में स्पेलिंग की छोटी सी गलती के कारण लगभग 20 मिनट की देरी से परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई. विनय ने हमसे बातचीत में कहा,

“हमको बहुत मुश्किल से बैठने दिया गया और उसके 10 मिनट बाद ही मेरा डेस्कटॉप बंद हो गया. पूरे एग्जाम के दौरान कम से कम 5 बार बंद हुआ” 

BHU प्रशासन का क्या कहना है?

1.5 लाख ट्वीट किए जाने के बाद भी बीएचयू के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से कोई जवाब नहीं आया. वहीं विश्वविद्यालय के पीआरओ का कहना है कि उन्हें इस दुर्वव्यस्थाओं के बारे में कोई जानकारी नहीं है. समाचार पत्रों में दिए गए बयान में बीएचयू के पीआरओ राजेश सिंह ने कहा,

एनटीए परीक्षा को लेकर क्या मनमानी कर रहा है मैं उससे अनिभिज्ञ हूं. इस प्रकरण की मुझे कोई जानकारी नही है”

8 अक्टूबर के ट्विटर ट्रेंड की जानकारी के लिए हमने जब इनसे बात करने की कोशिश की तो उनका फोन नहीं उठा. हमने कार्यालय जाकर भी संपर्क करने की कोशिश की मगर संभव नहीं हो सका.

प्रवेश परीक्षा में हो रही दिक्कतों पर बीएचयू के प्रोफेसर्स और ऑनलाइन कोचिंग चलाने वाले कुछ पूर्व छात्र भी मुखर हैं. हमारी बात फिजिकल एजुकेशन विभाग के सहायक प्रोफेसर अभिमन्यु सिंह से हुई. उनका कहना है,

BHU की ऐसी कभी मंशा नहीं रही है कि बच्चों को समस्या हो, लेकिन हमने सोशल मीडिया पर देखा है कि दिक्कते हों रही हैं. एक नॉन टीचिंग स्टाफ के बच्ची को ही बहुत दिक्कत हुई है. बीएचयू ने एंट्रेस एग्जाम का जिम्मा एक एजेंसी एनटीए को दिया है, लेकिन लोगों को समस्या आ रही है तो इसपर जल्द सुनवाई होनी चाहिए.

एनटीए को लेकर शिकायतों में एक समस्या पूछे जाने वाले सवालों को लेकर भी है. विद्यार्थियों और तैयारी कराने वाली कुछ संस्थाओं का कहना है कि इस बार पूछे गए सवाल सिलेबस से बाहर के थे. महामना एकेडमी में ऑनलाइन कोचिंग पढ़ाने वाले सूरज भारद्वाज का कहना है कि

एक बच्ची रोते हुए फोन करती है कि सर 34 नंबर पर एफिलेटेड कॉलेज मिल जाएगा. तो…हम लोगों को तो यह भी समझना पड़ता है. यहां तो बीएचयू प्रशासन कहता है हमें नहीं पता क्या गड़बड़ी कर रहा है एनटीए. हमारी मांग है कि यह एंट्रेंस परीक्षा रद्द की जाए और बीएचयू फिर से अपने संसाधनों पर इंट्रेंस कराए.

छात्रों ने ट्विटर पर 9 अक्टूबर की देर रात 11 बजे तक 1.70 लाख ट्वीट किया था. जिसमें बीएचयू प्रवेश परीक्षा को रद्द करने और एनटीए को बायकॉट करने की मांग थी. अब छात्र बीएचयू प्रशासन के जवाब का इंतज़ार कर रहे हैं.

                                                                  (ये स्टोरी शाश्वत ने लिखी है)


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