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गांधी परिवार से SPG सुरक्षा साज़िशन छीनने के इल्ज़ाम पर अमित शाह ने धो डाला

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लोकसभा में 27 नवंबर के दिन स्पेशल प्रोटेक्शन (संशोधन) बिल-2019 पास हो गया. इसे गृहमंत्री अमित शाह ने 25 नवंबर के दिन पेश किया था. स्पेशल प्रॉटेक्शन ग्रुप ऐक्ट- 1988 में संशोधन के लिए ये बिल पेश किया गया था. लोकसभा में इस बिल को लेकर काफी बहस हुई. और आखिर में ये पास हो गया.

ये बिल प्रधानमंत्री और उनके परिवार की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है. अगर प्रस्तावित संसोधन के हिसाब से बिल में बदलाव होते हैं, तो

– SPG प्रोटेक्शन प्रधानमंत्री और उनके परिवार के सदस्य जो उनके साथ अधिकृत प्रधानमंत्री निवास में रहते हैं, उनके लिए ही उपलब्ध होगा.
– कोई पूर्व प्रधानमंत्री और उनका परिवार, जो सरकार द्वारा दिए गए सरकारी आवास पर रहते हैं, उनको पांच साल तक के समय के लिए SPG सुरक्षा उपलब्ध होगी.

Manish Tiwari
मनीष तिवारी लोकसभा में बोलते हुए.

अमित शाह ने जब बिल पेश किया, तब कांग्रेसी सांसद मनीष तिवारी ने इसका विरोध किया. 27 नवंबर को बहस की शुरुआत भी मनीष तिवारी ने ही की. कहा कि इसी साल जून के महीने में SPG ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मनमोहन सिंह को जानकारी दी थी कि उन्हें खतरा है और नवंबर में ही उनसे सुरक्षा छीन ली गई. ऐसा क्यों? सवाल किया,

‘मैं सरकार से ये जानना चाहता हूं कि जून 2019 से नवंबर 2019 के बीच ऐसा क्या हो गया कि सरकार ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह और उनके परिवार की सुरक्षा ही छीन ली. सदन को ये जानने का हक है कि ऐसा क्यों किया गया. मैं सरकार से मांग करता हूं कि पूर्व प्रधानमंत्रियों और उनके परिवार को जीवन भर तक सुरक्षा दी जाए.’

इसके जवाब में अमित शाह ने कहा,

‘जनता के सामने ये जा रहा है कि एक्ट में जो बदलाव हो रहे हैं, वो गांधी परिवार की सुरक्षा हटाने के लिए हो रहे हैं. ये सच नहीं है. जो सुरक्षा का बदलाव किया है, वो पुराने एक्ट के तहत ही ईयरली प्रोफेशनल थ्रेट असेसमेंट के आधार पर किया है. ये एक्ट तो अब अस्तित्व में आएगा, जब ये सदन पारित करेगा. जिस एक्ट की दुहाई दे रहे हो, उस एक्ट के तहत ही सुरक्षा का बदलाव किया है. लेकिन ऐसा कहा गया जैसे गांधी परिवार की सुरक्षा की चिंता सरकार को है ही नहीं, इसलिए सुरक्षा हटा ली गई. सुरक्षा हटाई नहीं गई है, बदली गई है. और थ्रेट असेसमेंट के आधार पर बदली गई है. उनकी सुरक्षा ‘Z+ CRPF कवर विद ASL एंड विद एंबुलेंस’ पूरे देशभर में की. ASL का मतलब है कि पहले जाकर स्पॉट का, कार्यक्रम का असेसमेंट किया जाएगा फिर राज्य सरकार से कोऑर्डिनेट किया जाएगा. ऐसा कहा जा रहा है कि सुरक्षा राज्य सरकार के भरोसे छोड़ दी गई है, ऐसा नहीं है. CRPF सेंट्रल एजेंसी है. पूरे देशभर में है. हर राज्य में है. और वही सुरक्षा भी करेगी. एंबुलेंस भी होगी. डॉक्टर होंगे, CRPF के कमांडर भी होंगे.’

Amit Shah 1
अमित शाह ने साफ किया कि सुरक्षा बदलने के पीछे प्रतिशोध कारण नहीं है.

इसके बाद अमित शाह ने SPG के बनने की प्रक्रिया पर बात की. कहा कि SPG के सुरक्षाकर्मी बाहर से नहीं आते, वो या तो CRPF के कुछ जवान होते हैं. या BSF या किसी दूसरी एजेंसी के कोई जवान होते हैं. इस ग्रुप में अनेक सुरक्षाबलों के जवान इकट्ठा होकर काम करते हैं. ये प्रधानमंत्री की रक्षा करने के लिए बना है, इसलिए इसका नाम स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप रखा है. आगे अमित शाह ने जो भी कहा, आप उसे शब्दश: जाने तो अच्छा होगा. कहा,

‘इस एक्ट में पांच बार बदलाव हुए हैं और पांचों बदलाव एक ही परिवार को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं. सुरक्षा खतरों की समीक्षा के बाद मान्यवर चंद्रशेखर जी की सुरक्षा ले ली गई. कोई कांग्रेसी कार्यकर्ता कुछ नहीं बोला. पीएम थे, बहुत बड़ा योगदान था. किसी ने कुछ नहीं बोला. नरसिम्हा राव जी की सुरक्षा चली गई, कोई नहीं बोला. ऐसा क्यों? वो भी तो पूर्व पीएम थे. आई.के. गुजराल जी की सुरक्षा थ्रेट असेसमेंट के बाद में ले ली गई, कोई नहीं बोला. चिंता किसकी है? वीआईपी की है? देश के नेतृत्व की है? या एक परिवार की है? ये स्पष्ट किया जाए. उसके बाद डॉक्टर मनमोहन सिंह, अभी-अभी पीएम रहे, इसी नियम के अंतर्गत उनकी सुरक्षा भी गई. बदली गई, लेकिन शब्द प्रयोग किए कि छीनी गई. लेकिन तब भी किसी ने हो-हल्ला नहीं किया. ये चिंता व्यक्त करने के मापदंड केवल और केवल एक परिवार के लिए है. सुरक्षा की चिंता नहीं है. SPG को स्टेटस सिंबल बनाया गया है. हर किसी को SPG की सुरक्षा नहीं दी जा सकती, वो प्रधानमंत्री के लिए है.’

राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी की सुरक्षा में बदलाव के मुद्दे पर अमित शाह ने कहा कि पूरा थ्रेट असेसमेंट यानी खतरे का आकलन करने के बाद ही बदलाव किए हैं. प्रतिशोध की भावना से नहीं. नरेंद्र मोदी सरकार सुरक्षा से जुड़े फैसले प्रतिशोध की भावना से कभी नहीं ले सकती. थ्रेट असेसमेंट के आधार पर फैसला लिया गया है. फिर गृहमंत्री ने वो सारे आंकड़े रखे, जब-जब बिना जानकारी दिए कांग्रेस के नेता टूर पर चले गए थे. उन्होंने कहा,

‘श्री सोनिया गांधी 2015 से अभी तक 50 से ज्यादा अवसरों में दिल्ली सरकार और देश की सुरक्षा व्यवस्था को जानकारी दिए बिना चली गई हैं. 13 यात्राओं में SPG बुलेट रोधी कार का इस्तेमाल नहीं किया. 2015 के बाद 24 विदेश यात्राओं में SPG के अधिकारियों को न सूचना दी और न साथ में रखा. प्रियंका गांधी वाड्रा 2015 से अब तक 339 अवसरों पर SPG को लिए बिना, जानकारी दिए बिना चली गईं. दिल्ली में 1991 के बाद 99 बार विदेश यात्राओं पर गईं, इनमें से 21 बार ही उन्होंने सुरक्षा कवर लिया और 78 अवसरों पर उन्होंने सुरक्षा कवर नहीं लिया. राहुल गांधी जी 2005 से 2014 के बीच 18 अवसरों पर देश के विभिन्न हिस्सों पर SPG की सुरक्षा और जानकारी के बिना गए. और 2015 के बाद 1892 अवसरों पर दिल्ली में और 247 अवसरों पर बाहर की यात्रा SPG सुरक्षा कवर के बिना की. अगर आपको सुरक्षा दी गई है, तो उसका इस्तेमाल करें. मैं इन तीनों महानुभाव से अनुरोध करता हूं कि CRPF की सुरक्षा अपने साथ रखें.’


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