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सात मुख्यमंत्रियों और सोनिया गांधी के बीच मीटिंग में JEE-NEET को लेकर क्या बात हुई

JEE और NEET परीक्षाएं क्रमश: 1 से 6 सितंबर और 13 सितंबर को तय हैं. सितंबर के पहले हफ्ते में शुरू हो रही परीक्षाओं को लेकर छात्रों की नाराज़गी देखना चाहते हैं, तो एक बार सोशल मीडिया पर जाइए. वहां आपको रोज़ नया ट्रेंड मिलेगा. सबका सार यही कि महामारी के बीच परीक्षाएं न ली जाएं. स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भी कह दिया कि बाढ़ और बीमारी के बीच परीक्षा लेना सही नहीं है. लेकिन मोदी सरकार न छात्रों की सुन रही है, न अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ताओं की. भारत में ममता बनर्जी जैसे विपक्षी नेता काफी समय से परीक्षा का विरोध कर रहे हैं. आज ये विरोध विपक्ष की लामबंदी में बदलता दिखा.

सात मुख्यमंत्रियों की सोनिया के साथ मीटिंग

26 अगस्त को सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ सोनिया गांधी की वर्चुअल मीटिंग हुई. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि सभी राज्य सरकारों से मेरी अपील है कि परीक्षा स्थगित करने के लिए हम सुप्रीम कोर्ट चलें. ममता बनर्जी ने ये भी कहा कि वो इस मुद्दे में हस्तक्षेप करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कई बार लिख चुकी हैं. इस मीटिंग में ममता बनर्जी के अलावा कैप्टन अमरिंदर सिंह, उद्धव ठाकरे, अशोक गहलोत, वी. नारायणसामी, भूपेश बघेल और हेमंत सोरेन शामिल हुए.

हेमंत सोरेन ने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पास जाना चाहिए. 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षाएं टालने से संबंधित 11 छात्रों की याचिका को खारिज कर दिया था.

सोनिया ने शिक्षा नीति का भी ज़िक्र किया

कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि हाल ही में सामने आई राष्ट्रीय शिक्षा नीति धर्मनिरपेक्ष और वैज्ञानिक मूल्यों के लिए आघात थी. छात्रों से संबंधित दूसरे मसलों पर भी लापरवाही बरती जा रही है. मीटिंग के दौरान ही यूथ कांग्रेस ने दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय के दफ्तर के पास विरोध प्रदर्शन किया.

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा –

”दुनियाभर में परीक्षा व्यवस्था विकसित हो रही है. परीक्षा कराने के एक हजार वैकल्पिक तरीके हैं.”

मजबूरी को सहमति मान रही सरकार

ममता बनर्जी और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने परीक्षाएं स्थगित करने को लेकर शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को पत्र भी लिखा है. लेकिन निशंक ने तय समय पर परीक्षा कराने की बात को दोहरा दिया है. उन्होंने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि हमारे ऊपर छात्रों और उनके माता-पिता का दबाव था. डीडी न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा कि 80 फीसदी NEET छात्रों ने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लिए हैं. ये तर्क अटपटा है. क्योंकि अगर परीक्षाएं नहीं ही टलीं, तो छात्र मजबूरी में परीक्षा देंगे, क्योंकि ये उनके भविष्य से जुड़ा है. किसी की मजबूरी को उसकी सहमति की तरह कैसे पेश किया जा सकता है.

वैसे ये भी बता दें कि बकौल निशंक, उनके लिए छात्रों की सुरक्षा सबसे पहले है. परीक्षाएं कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, NTA कह रही है कि उसने प्रोटोकॉल बनाया है. परीक्षा केंद्र बढ़ाए हैं. लेकिन ये इंतज़ाम छात्रों में भरोसा पैदा क्यों नहीं कर पा रहा, ये बात मनीष सिसोदिया ने बताई –

“सेंटर बिल्कुल आंख बंद करके बैठा है कि इस देश की ज़मीनी स्थिति क्या है. वो कह रहे हैं कि हम बहुत अच्छे प्रोटोकॉल फॉलो करेंगे, व्यवस्था करेंगे. गृह मंत्री तो बहुत अच्छी व्यवस्था में रहते हैं, हम सब बहुत अच्छी व्यवस्था में रहते हैं. हमारे स्वास्थ्य मंत्री को कोरोना हुआ, गृह मंत्री जी को हुआ. तमाम राज्यों के राज्यपालों को, मुख्यमंत्रियों को कोविड हो रहा है. ये तो सब व्यवस्था में हो रहा है न. आज आप उसी व्यवस्था के भरोसे 28 लाख बच्चों को स्कूल में भेज दोगे और कहोगे कि हम सब ठीक कर देंगे, तो ये तो हो नहीं सकता.”

जीएसटी पर भी बात

विपक्ष की बैठक में NEET-JEE के अलावा GST पर भी बात हुई. आप जानते ही हैं कि 11 अगस्त को भारत सरकार के वित्त सचिव ने कहा था कि केंद्र इस साल के लिए 14 फीसदी जीएसटी कंपनसेशन राज्यों को देने की स्थिति में नहीं है. जीएसटी लाते वक्त केंद्र ने वादा किया था कि वो राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए ये पैसा उन्हें देगा. सोनिया गांधी ने इसे धोखा कहा. ममता बनर्जी के अलावा कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी जीएसटी का पैसा न मिलने की बात कही.

पिछले छह साल में ये कई बार हुआ कि विपक्ष ने किसी मुद्दे पर इकट्ठा होने की कोशिश की. लेकिन सरकार ने विरले ही कभी ऐसी लामबंदियों की परवाह की है. अमूमन ये लामबंदियां देखते-देखते बिखर भी गई हैं. राहुल गांधी अपने ट्वीट में #AntiStudentModiGovt लिख रहे हैं. सरकार उन्हें कैसे गलत साबित करेगी, या कर भी पाएगी या नहीं, भविष्य के गर्भ में है. लेकिन अतीत की मिसालें ज़्यादा उम्मीद नहीं जगातीं.


NEET-JEE की डेट आगे बढ़ाने की मांग कर रहे छात्रों की क्या समस्या है?

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