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वर्ल्ड U-20 सिल्वर मेडलिस्ट शैली सिंह कैसे बनीं ओलंपिक्स मेडल की उम्मीद?

शैली सिंह. लॉन्ग जम्प में भारत की यंग सेंसेशन. 17 वर्षीय शैली ने रविवार, 22 अगस्त को अंडर-20 विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता. शैली ने फाइनल में 6.59 मीटर की लंबी छलांग लगाई और गोल्ड मेडल जीतने से महज़ एक सेंटीमीटर से चूक गईं. हालांकि शैली की कोच और भारत की पूर्व लॉन्ग जम्प स्टार अंजू बॉबी जॉर्ज का कहना है कि शैली में ओलंपिक मेडल जीतने की क्षमता है. साथ ही 2003 की वर्ल्ड चैंपियनशिप ब्रॉन्ज़ मेडलिस्ट अंजू का यह भी मानना है कि शैली उनके नेशनल रिकॉर्ड को भी तोड़ सकती हैं.

अंडर-20 में भारत की नेशनल चैंपियन और नेशनल रिकॉर्ड होल्डर शैली बैंगलोर में स्थित अंजू बॉबी जॉर्ज फाउंडेशन में कोचिंग लेती हैं. जहां वे स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के कोच और अंजू के पति रॉबर्ट बॉबी जॉर्ज के अंडर खुद को निखार रही हैं. शैली की मेंटॉर अंजू ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में कहा,

‘शैली नेशनल रिकॉर्ड तोड़ सकती हैं. हमारा असली टारगेट है कि ओलंपिक्स में शैली पोडियम (टॉप तीन में) पर फिनिश करें. जो हमारे लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है. अगर हमारी ट्रेनिंग का कोई एथलीट मेडल जीतता है तो मुझे लगेगा कि मैंने मेडल जीत लिया है.’

बता दें कि अंजू के कोच भी रॉबर्ट ही थे. और उनकी ही कोचिंग में अंजू ने साल 2004 के एथेंस ओलंपिक्स में 6.83 मीटर की लॉन्ग जम्प लगाकर नेशनल रिकॉर्ड सेट किया था जो अभी तक कायम है. अंजू का मानना है कि शैली काफी छोटी उम्र (14 साल) में ही रॉबर्ट के पास आ गईं थीं जिसकी वजह से उनके खेल में तकनीकी गलतियां नहीं हैं. अंजू ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा,

‘मैंने अपनी लाइफ में जो भी हासिल किया, वह सब रॉबर्ट की वजह से किया. मेरे पास सिर्फ एक किडनी थी और एक पैर में पट्टी. इस हिसाब से अगर आप अंदाजा लगाएं तो शैली के पास बहुत ज्यादा क्षमता है.’

अंजू का कहना है कि जब उन्होंने पहली बार शैली को विशाखापट्टनम में देखा, तो वे 14 साल की थीं. वे तभी समझ गई थीं कि इस एथलीट में मेडल जीतने का हुनर है. इस हुनर को सिर्फ तराशना होगा. अंजू ने कहा,

‘शैली एक कच्चा हीरा थीं. किसी ऐसे एथलीट का मिल जाना जिसके पास मेडल जीतने की क्षमता हो, यह एक बहुत कीमती चीज है. हमें पता था कि अगर हम इसे अच्छे से गाइड करेंगे तो यह जरूर कुछ बड़ा कर सकती है.’

अंजू ने शैली की ट्रेनिंग के शुरुआती दिनों के बारे में भी बताया. उन्होंने बताया कि किस तरह शैली छोटी उम्र से ही तकनीकी चीजों को जल्दी समझ जाती थीं. शुरू में उनकी चाल-ढाल थोड़ी अजीब थी पर शैली ने इसे भी इम्प्रूव किया. अंजू ने बताया,

‘वह लगभग 4.50 मीटर की छलांग लगा रही थी लेकिन उसमे लड़ने की भूख थी. वह दौड़ती थोड़ा अजीब थी लेकिन मुझे उसमे पोटेंशियल दिखता था. जब उसने रॉबर्ट के अंडर ट्रेनिंग करना शुरू किया तो यह तो साफ़ दिखता था कि वह तकनीकी चीजों को पकड़ने के मामले में काफी होशियार थी. उसे अगर एक बार कोई चीज समझा दी तो वह तुरंत उसे अपना लेती थी. सबसे बड़ी बात ये कि वे कभी भी ट्रेनिंग करने से झिझकती नहीं थीं.’

बता दें कि शैली ने फाइनल से पहले हुए क्वॉलिफिकेशन राउंड में 6.40 मीटर की छलांग लगाकर टॉप किया था. इसे बेहतर करते हुए फाइनल में उन्होंने 6.59 मीटर की छलांग लगाई. लेकिन वे स्वीडन की माज़ा अस्काग की 6.60 मीटर की लंबी छलांग से एक सेंटीमीटर पीछे रह गईं.

हालांकि शैली की इस जम्प को रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जाएगा क्यूंकि फाइनल्स के दौरान 2.2 मीटर प्रति सेकंड की हवा चल रही थी. इस जम्प में हवा के योगदान की वजह से इसे काउंट नहीं किया जाएगा. लेकिन शैली की इस 6.59 मीटर की जम्प से उनकी क्षमता का पता लगता है. अगर वे इसी तरह ट्रेनिंग करती रहीं तो निश्चित तौर पर भारत के लिए ओलंपिक्स में मेडल ला सकती हैं.


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