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कोरोना संकट पर खरी-खरी सुनाने वाले नामी वायरोलॉजिस्ट ने सरकारी ग्रुप से इस्तीफा क्यों दे दिया?

शाहिद जमील. भारत के नामी वायरोलॉजिस्ट हैं. इन्होंने सरकार की ओर से बनाए गए वैज्ञानिकों के उस खास सलाहकार ग्रुप से इस्तीफा दे दिया है, जिस पर वायरस के जीनोम स्ट्रक्चर की पहचान करने की जिम्मेदारी है.

शाहिद जमील ने हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स में एक लेख लिखा था. इसमें विस्तार से बताया था कि कोरोना से भारत में जो हालात पैदा हुए हैं, उनसे भारत किस तरह निपट सकता है. उन्होंने कोरोना संकट से निपटने के सरकार के उपायों पर कुछ सवाल भी उठाए थे. सरकार को पॉलिसी बनाने में अड़ियल रवैया छोड़ने की सलाह भी दी थी.

शाहिद जमील INSACOG यानी इंडियन SARS-COV-2 जीनोमिक्स कंसोर्टिया नाम के वैज्ञानिक सलाहकार ग्रुप के अध्यक्ष थे. इस ग्रुप का गठन जनवरी में किया गया था. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, INSACOG ने मार्च की शुरुआत में ही सरकारी अधिकारियों को कोरोना वायरस के वैरियंट B.1.617 के प्रति आगाह किया था. भारत के मौजूदा कोरोना संकट के पीछे इसी वैरियंट का बड़ा हाथ माना जा रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी कह चुका है कि ये वैरियंट 44 से ज्यादा देशों में फैल चुका है.

अशोका यूनिवर्सिटी में त्रिवेदी स्कूल ऑफ बायोसाइंस के डायरेक्टर जमील ने इस ग्रुप से इस्तीफा क्यों दिया, इसका कारण नहीं बताया है. सरकार की ओर से शाहिद जमील के इस्तीफे पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.

बता दें, न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखे लेख में डॉ. जमील ने भारत में पॉलिसी बनाने के तरीके पर भी सवाल उठाए थे. आरोप लगाया था कि वैज्ञानिकों की डाटा आधारित बातें नहीं सुनी जाती. उन्होंने लिखा था-

कोरोना से लड़ने के सभी उपायों का हमारे साथी वैज्ञानिकों ने बहुत सहयोग किया है. लेकिन उन्हें साक्ष्य आधारित नीति निर्माण को लेकर बहुत अड़ियल प्रतिरोध झेलना पड़ रहा है. 30 अप्रैल को भारत के वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री से अपील की थी कि उन्हें डाटा उपलब्ध कराया जाए, ताकि वो आगे की स्टडी, अनुमान और इस वायरस से निपटने के उपाय बता सकें. भारत में जब से महामारी बेकाबू हुई है, डाटा के आधार पर फैसला लेना भी इसकी बलि चढ़ गया है.

डॉ. जमील ने लेख में लिखा था कि एक वायरोलॉजिस्ट के तौर पर मैं पिछले साल से ही संक्रमण और वैक्सीनेशन पर नजर बनाए हुए हूं. मेरा ऑब्जर्वेशन है कि कई वैरिएंट्स फैल रहे हैं. ये कोरोना की अगली लहर के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं. जमील ने ये भी कहा था कि भारत धीमी वैक्सीनेशन को सहन नहीं कर सकता. ये समय भारी संख्या में वैक्सीनेट करने का है. तेजी से वैक्सीनेशन के जरिए ही कोरोना संक्रमण को रोका जा सकता है.

उन्होंने कहा था कि शुरू में सरकार का 60 साल या 45 साल से ऊपर के गंभीर बीमारी वाले लोगों को वैक्सीनेट करने का प्लान समझदारी भरा था. सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक कंपनियां वैक्सीन सप्लाई करने में सक्षम थीं. लेकिन मार्च के मध्य में सिर्फ 1.5 करोड़ डोज़ ही डिलीवर हुईं. इससे सिर्फ 1 फीसदी जनसंख्या को ही वैक्सीनेट किया जा सकता था. वैक्सीनेशन की ड्राइव भारतीय नेतृत्व के उस मेसेज से लड़खड़ा गई, जिसमें कहा गया था कि भारत ने कोरोना पर विजय पा ली है. पूरा लेख यहां पढ़ सकते हैं.


वीडियो: लॉकडाउन लगाए बिना संक्रमण से बचने का तरीका इस डॉक्टर ने बताया

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