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कोर्ट ने भाजपा विधायक को सजा सुनाई, फिर 'अच्छे बर्ताव' के लिए प्रोबेशन पर रिहा कर दिया

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिला कोर्ट ने 11 साल पुराने मामले में आरोपी भाजपा विधायक व एक अन्य को सजा सुनाई. लेकिन हैरानी की बात ये रही कि एक साल की सजा सुनाने के कुछ देर बाद ही दोनों आरोपियों को प्रोबेशन पर रिहा कर दिया. वजह बताई, अच्छा बर्ताव और शांतिपूर्ण व्यवहार.

किस मामले में हुई सजा?

देवेंद्र सिंह राजपूत कासगंज (Kasganj) सदर सीट से विधायक हैं. देवेंद्र और उनके एक सहयोगी को अपर जिला जज गगन कुमार भारती की अदालत ने मंगलवार 1 सितंबर को सजा सुनाई. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, 2010 में देवेंद्र सिंह राजपूत और उनके दो सहयोगियों- ब्रजपाल और कौशल के खिलाफ यह मामला दर्ज हुआ था. एक दुकान के विवाद के चलते चोखेलाल नाम के व्यक्ति के साथ मारपीट का आरोप लगा. तीनों के खिलाफ IPC की धारा 323, 325, 504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया. मुकदमे के मुताबिक, चोखेलाल ने आरोप लगाया था कि देवेंद्र राजपूत और उनके सहयोगियों ने उसे लाठियों से मारा था. चोखेलाल को इतना पीटा गया कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. घटना के बाद आरोपी फरार हो गए थे.

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भाजपा विधायक देवेंद्र सिंह राजपूत को कोर्ट ने 11 साले पुराने मामले में एक साल की सजा सुनाई, फिर उन्हें अच्छे व्यवहार का हवाला देते हुए प्रोबेशन और जमानत दे दी. (फोटो: साभार फेसबुक से)

कोर्ट ने आदेश में क्या कहा?

मुकदमे की सुनवाई के बाद अदालत ने 1 सितंबर को अपना फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष देवेंद्र सिंह राजपूत और कौशल के खिलाफ केस को साबित करने में सफल हुआ है. अदालत ने इसके आधार पर दोषी मानते हुए एक-एक साल की सजा सुनाई. एक आरोपी ब्रजपाल की पहले ही मौत हो चुकी है. हालांकि कोर्ट ने दोनों को अच्छे व्यवहार और शांति बनाए रखने के आधार पर जमानत भी दे दी.

कासगंज के सरकारी वकील एसएस रघुवंशी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा,

“कोर्ट ने यह कहते हुए देवेंद्र सिंह और कौशल को दोषी ठहराया था कि अभियोजन ने मुकदमा साबित कर दिया है. बाद में केस के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए कोर्ट ने दोषियों को प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट के प्रावधानों का लाभ दिया, और प्रोबेशन पर रिहा करने का आदेश दे दिया.”

जिला अदालत ने विधायक और उनके साथी को आदेश देते हुए कहा कि वे अपने व्यवहार में सदाशयता (यानी सिंसियरिटी) रखें. साथ ही पीड़ित पक्ष को 15-15 हजार रुपये भी दें. कोर्ट ने दोनों आरोपियों को जिला प्रोबेशन ऑफिसर के समक्ष 1-1 लाख रुपये का बॉन्ड भरने का निर्देश दिया. आदेश में ये भी कहा कि यदि प्रोबेशन पीरियड की अवधि में आरोपी किसी भी असामाजिक गतिविधियों में शामिल होता है या जमानत की किसी शर्त का उल्लंघन करता है तो उन्हें सजा के लिए कोर्ट में हाजिर होना होगा.

बताते चलें कि इसी कोर्ट ने 7 दिन पहले 25 अगस्त को बसपा के पूर्व विधायक हसरत उल्ला खां शेरवानी को सात साल की सजा सुनाई थी. शेरवानी पर दस साल पहले हवालात में युवक पर जानलेवा हमला करने का आरोप था, जिसमें विधायक सहित नौ लोगों को दोषी करार दिया गया था.

(ये स्टोरी हमारे यहां इंटर्नशिप कर रहे रौनक भैड़ा ने लिखी है)


वीडियो- कासगंज में कॉन्सटेबल की हत्या का आरोपी मोती धीमर कौन है?

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