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यूपी में योगी सरकार यहां बुरी तरह फेल हुई है

उत्तर प्रदेश में 75 जिले हैं. चुनाव हो या न हो, कोई न कोई जिला दंगे की आग में झुलसा रहता है. गोया चुनाव और दंगे एक साथ ज्यादा सुनाई देते हैं. इन दिनों सहारनपुर जल रहा है. 5 मई को सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में कुछ राजपूत लड़के महाराणा प्रताप की जयंती पर जुलूस निकाल रहे थे. दलित लड़कों ने जुलूस और DJ पर आपत्ति जताई, तो दोनों पक्षों में झड़प हो गई. इस हिंसा में एक राजपूत लड़के सुमित की मौत हो गई और दलितों के घर फूंक दिए गए. हालत ये है कि 9 FIR दर्ज हो चुकी हैं, 17 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, 60 लोग फरार हैं और थाने में सैकड़ों अज्ञात नामजद हैं.

महज 20 दिनों के भीतर सहारनपुर में हुई इस दूसरी हिंसा ने योगी आदित्यनाथ की सरकार पर सवाल उठाया है. इससे पहले अंबेडकर जयंती पर शोभायात्रा निकालने पर हिंसा हुई थी.

पथराव और आगजनी के बाद की एक तस्वीर
पथराव और आगजनी के बाद की एक तस्वीर

शब्बीरपुर में हिंसा की वजह नहीं, त्रासदी दिखती है. सन्नाटे के बीच बहुत कम लोग काम कर रहे हैं और घरों का सामान सुलग रहा है. गांव का पहला घर जल चुका है. इसमें रहने वाली कुसुम बताती हैं कि DJ लेकर आ रहे राजपूत महाराणा प्रताप जिंदाबाद और अंबेडकर मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे. मना करने पर वो झगड़ा करने लगे. गांव के दलित यहां बने रविदास मंदिर के पास डॉ. अंबेडकर की मूर्ति लगाना चाहते हैं और वो मानते हैं कि राजपूत इसमें अड़ंगा लगा रहे हैं. इसी के पीछे दलित और राजपूत सालों से अदावत निभा रहे हैं.

शब्बीरपुर में जला हुआ घर
शब्बीरपुर में जला हुआ घर

राजपूतों से बात करके पता चलता है कि हाथापाई दलितों ने शुरू की थी. हाथ में प्लास्टर बांधे अरविंद के मुताबिक दलितों ने उनके ट्रैक्टर के अलावा पुलिस पर भी पथराव किया. पुलिस ने भी पथराव की पुष्टि की है. अंबेडकर की मूर्ति के विवाद पर अरविंद कहते हैं कि राजपूतों को अंबेडकर की मूर्ति लगने से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन ऐसा प्रशासन के आदेश से होना चाहिए. दलित बिना इजाजत मूर्ति लगाना चाहते हैं.

आगजनी के बाद की एक तस्वीर
आगजनी के बाद की एक तस्वीर

सालों की खुन्नस ठिकाने लगाने के बाद लोगों को प्रशासन याद आता है. प्रशासन का भी अपना वर्जन है. हिंसा के बाद लाइन हाजिर हो चुके इलाके के थाना इंचार्ज का कहना है कि विवाद की वजह अंबेडकर की मूर्ति है. गांव के प्रधान शिवकुमार मूर्ति लगाने की जिद पर अड़े हैं और राजपूत न लगाने देने की जिद पर. रिपोर्ट्स ये भी हैं कि महाराणा प्रताप की जयंती मनाने के लिए बगल के शिमलाना गांव में इकट्ठा हुए राजपूतों ने दलितों के घरों में आग लगाई, जिनमें से कई हरियाणा से आए थे. इस मामले में एसपी (सिटी) और एसपी (रूरल) को डिसमिस किया जा चुका है.

शब्बीरपुर में गश्त लगाती पुलिस
शब्बीरपुर में गश्त लगाती पुलिस

दोनों ही पक्षों से बात करने पर एक जैसी कहानियां सुनने को मिलती हैं. दलितों के पास बयान करने को जले घर हैं और राजपूतों के पास मरा हुआ सुमित. सबके चेहरों पर पीड़ित भाव है. कुरेदने पर दोनों खेमों से अजीबोगरीब बयान भी सामने आते हैं. मसलन, ‘गांव के राजपूत हरिजन के प्रधान बनने से नाराज हैं’, ‘राजपूत तो अंबेडकर जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे’, ‘दलितों ने खुद ही अपने घरों में आग लगाई थी’. दोनों ही तरफ की महिलाएं अपने बच्चों को सही और दूसरों को गलत बताती हैं.

इस पूरे विवाद में ‘भीम आर्मी’ का नाम खूब आ रहा है, जो एक दलित संगठन है. जुलाई 2015 में वकील चंद्रशेखर आजाद ने ये दलितों के सम्मान में यह संगठन बनाया था. दलितों का नेतृत्व करने वाले चंद्रशेखर का दावा है कि उनकी भीम आर्मी सात राज्यों तक फैली है और इसके 40 हजार से ज्यादा सदस्य हैं. इनके पास कई गांवों के ऐसे किस्से हैं, जहां बवाल होने के बाद दलित इनके संगठन से जुड़ गए. शब्बीरपुर की हिंसा में भी जो नामजद हैं, उनमें से कुछ भीम आर्मी से जुड़े बताए जा रहे हैं.

भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर
भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर

हिंसा की वजह जो भी हो, लेकिन सहारनपुर का यह गांव खंडहर दिखने लगा है. यहां रहने वाली हर जिंदा चीज डरी हुई है. पिछले कई दिनों से यहां हो रही हिंसा से लगता है कि सरकार बदलने का कोई असर कानून व्यवस्था पर नहीं पड़ा है. यूपी के एक बड़े अधिकारी बेनामी की शर्त पर बताते हैं कि पिछले चुनावों से उलट इस बार सहारनपुर में बसपा को एक भी सीट नहीं मिली. इस वजह से दलितों और मुस्लिमों में असुरक्षा का भाव है. उधर सरकार ने कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही को हालात काबू करने की कवायद में लगा दिया है. शाही योगी कैबिनेट में कृषिमंत्री हैं.


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