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राहुल-प्रियंका को बच्चों जैसा बता नई पार्टी बनाने की बात कह गए कैप्टन अमरिंदर?

पंजाब विधानसभा इलेक्शन 2022 सुपरचार्ज्ड होने वाले हैं. इसका इशारा पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कर दिया है. बुधवार 22 सितंबर को कैप्टन के मीडिया सलाहाकार रवीन ठुकराल ने पूर्व सीएम के हवाले से एक के बाद एक 7 ट्वीट किए हैं. इन ट्वीट्स में कांग्रेस हाईकमान, प्रदेश नेतृत्व और विपक्षी पार्टी- शिरोमणी अकाली दल का ज़िक्र है.

रवीन ठुकराल के इन ट्वीट्स में कैप्टन अमरिंदर सिंह का गुस्सा, नाराज़गी और निराशा साफ देखी जा सकती हैं. ठुकराल के मुताबिक, अमरिंदर ने कहा है कि राहुल गांधी और प्रियंका गांधी उनके बच्चों जैसे हैं, लेकिन अनुभवहीन हैं. वहीं, पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को ‘ड्रामा मास्टर’ बताया है. कैप्टन ने कहा है कि वे 2022 के चुनाव में सिद्धू के खिलाफ एक मज़बूत कैंडीडेट खड़ा करेंगे और इसके लिए कोई भी कुर्बानी दे सकते हैं. अब इससे ये सवाल पैदा हो गया है कि क्या कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस छोड़ने वाले हैं. अगर वे ऐसा करते हैं तो क्या किसी दूसरी पार्टी में जाएंगे या अपनी खुद की पार्टी खड़ी करेंगे?

बहरहाल, उन ट्वीट्स की बात कर लेते हैं जिनकी वजह से ये सवाल पैदा हुए हैं. पहले ट्वीट में कैप्टन अमरिंदर सिंह के हवाले से उनके मीडिया सलाहकार ने लिखा है-

“नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब का CM बनने से रोकने के लिए कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हूं. 2022 के विधानसभा चुनाव में उसकी हार सुनिश्चित करने के लिए एक मज़बूत उम्मीदवार खड़ा करूंगा. अगर नवजोत सिद्धु CM चेहरा हैं तो (चुनाव में) कांग्रेस का दहाई का आंकड़ा छूना भी बड़ी बात होगी.”

दूसरे ट्वीट में कहा गया,

“मैं जीत के बाद राजनीति छोड़ने को तैयार था. पर हार के बाद कभी नहीं. मैंने सोनिया गांधी को 3 हफ़्ते पहले ही इस्तीफा सौंपा था, पर उन्होंने मुझे CM बने रहने को कहा. अगर मुझे पद से हटने को कह दिया होता, मैं हट चुका होता.”

तीसरे ट्वीट में कैप्टन ने राहुल और प्रियंका गांधी पर टिप्पणी की है. कैप्टन ने कहा-

“प्रियंका और राहुल गांधी मेरे बच्चों जैसे हैं… ये इस तरह से ख़त्म नहीं होना चाहिए था. मुझे कष्ट हुआ है. सच ये है कि गांधी भाई-बहन अनुभवी नहीं हैं और उनके सलाहाकार उन्हें सीधे तौर पर गुमराह कर रहे हैं.”

21 सितंबर को पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर रंधावा दिल्ली पहुंचे थे. लेकिन हाईकमान से मिलने की कोई फोटो बाहर नहीं आई थी.

वजह? दरअसल, हाईकमान दिल्ली में थी ही नहीं. गांधी परिवार उस वक्त शिमला में था. इसलिए पंजाब के नेताओं की मुलाकात संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, टीम राहुल के रणदीप सुरजेवाला और बतौर ऑब्ज़र्वर पंजाब गए पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन से हुई. कैप्टन के मुताबिक, इस बार पंजाब के भावी मंत्रियों के नाम और काम दिल्ली से तय हुए हैं.

इस पर कैप्टन ने चौथे ट्वीट में सवाल उठाया

“केसी वेणुगोपाल या रणदीप सुरजेवाला या अजय माकन कैसे तय कर सकते हैं कि कौन किस मंत्रालय के लिए सही है? जब मैं CM था, तब मैंने चुना और मेरे मंत्री नियुक्त किए. उनकी जाति देखकर नहीं, उनकी कार्यक्षमता देखकर.”

मुख्य विपक्षी पार्टी शिरोमणी अकाली दल के नेताओं पर नरम रुख रखने का आरोप भी कैप्टन पर लगता रहा है. सिद्धू तो खुलेआम उन पर ’75:25′ की सरकार चलाने का आरोप लगाते थे. माने, कैप्टन और बादल परिवार की सरकार. जो CM, वो 75 फीसदी, जो विपक्ष वो 25 फीसदी.

इस बारे में कैप्टन ने पांचवें ट्वीट में लिखा-

“सिद्धू जैसे लोगों ने मेरे खिलाफ मनमानी कार्रवाई शिकायत की कि मैं बादलों और मजीठिया के खिलाफ मनमानी कार्रवाई नहीं करता और कानून के मुताबिक नहीं चल रहा था. अब वो सत्ता में हैं, अकाली दल के नेताओं को जेल में डाल दें अगर डाल सकें तो”

कैप्टन के कार्यकाल में कुछ मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. मंत्री साधु सिंह धर्मसोत पर अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को मिलने वाले वज़ीफे में घोटाले का आरोप लगा, वहीं राणा गुरमीत सिंह सोढी जैसे मंत्रियों को खनन माफिया बताया गया.

इस पर कैप्टन ने छठे ट्वीट में कहा

“मेरे ऊपर खनन माफिया में कथित तौर पर शामिल मंत्रियों पर एक्शन ना लेने के लिए हमला किया गया. वही मंत्री अब नई पंजाब कांग्रेस के साथ हैं और पंजाब सरकार में हैं.”

आखिरी ट्वीट में सिद्धू को नया नाम दिया- ड्रामा मास्टर

“अगर नवजोत सिंह सिद्धू सुपर CM की तरह काम करता है तो पंजाब कांग्रेस काम नहीं कर पाएगी. इस ड्रामा मास्टर के नेतृत्व में बड़ी बात हो जाएगी अगर कांग्रेस पार्टी दहाई का आंकड़ा पंजाब विधानसभा चुनाव में छू पाए.”

तो कुल मिलाकर क्या सार समझा जाए?

कैप्टन की बातें सीधे तौर पर इशारा करती हैं कि आने वाले दिनों में उनके तेवर और बगावती होने वाले हैं. वो कांग्रेस छोड़ कर दूसरी पार्टी जॉइन कर सकते हैं या अपनी नई पार्टी भी बना सकते हैं. संभावनाएं और भी हो सकती हैं. जैसे चुनाव में कुछ चुनिंदा सीटों पर अपने मज़बूत समर्थकों को बतौर निर्दलीय या स्वतंत्र उम्मीदवार लड़ाएं. हालांकि इन सब संभावनाओं में कांग्रेस की भूमिका भी अहम होने वाली है. हो सकता है कि कैप्टन के सियासी कद के मद्देनजर कांग्रेस पार्टी उन्हें मना ही ले. हालांकि कोई हैरानी नहीं होगी अगर कांग्रेस नेतृत्व पंजाब के नेताओं और जनता के बीच मज़बूत संदेश देने के लिए कैप्टन को पार्टी से बाहर निकाल दे.

बहरहाल, ये सब आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा. इस सबके बीच एक बात और काबिल-ए-ज़िक्र है. कैप्टन ने पिछले पंजाब विधानसभा चुनाव यानी 2017 में कई जगह कहा था कि ये मेरा आखिरी चुनाव है. यानी उन्होंने 2022 में चुनाव ना लड़ने की बात कही थी. खूब जोर-शोर से.

लेकिन बीते एक साल से ऐसे सियासत कर रहे थे, मानो कह रहे हों- Once more, once more.


पंजाब के नए CM चरणजीत सिंह चन्नी अपने ऊपर लगे यौन शोषण के आरोपों पर जवाब देगें?

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