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पुलवामा में 37 शहीद: अब तक क्या-क्या पता चला

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14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में CRPF के काफिले पर हुए फिदायीन अटैक में 37 जवान शहीद हो गए. शहीदों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स हैं. कहीं-कहीं शहीदों की संख्या 42 और 44 भी बताई जा रही है. CRPF ने आधिकारिक तौर पर 37  जवानों के शहीद होने की बात कही है. कूटनीति और सेना की कार्रवाई के स्तर पर आगे क्या किया जाए, इस बात का फैसला 15 फरवरी को हो रही एक स्पेशल कैबिनेट मीटिंग में हो सकता है. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) मौजूद हैं. हमले के बाद विदेश मंत्रालय एक प्रेस रिलीज जारी कर चुका है. इसमें पाकिस्तान के नाम मेसेज है कि वो अपनी जमीन पर पल रहे आतंकवादियों को सपोर्ट करना बंद करे.

अटैक कैसे हुआ?
14 फरवरी को CRPF के 2,547 जवानों को जम्मू से श्रीनगर ले जाया जा रहा था. काफिले में 78 गाड़ियां थीं. ये सभी जम्मू-श्रीनगर हाई वे के रास्ते आगे बढ़ रहे थे. दोपहर बाद तकरीबन साढ़े तीन बजे काफिला अवंतिपोरा में था. श्रीनगर लगभग 30 किलोमीटर दूर था. तभी एक SUV ने बगल से आकर काफिले को ओवरटेक किया. फिर इस गाड़ी ने जाकर काफिले के एक बस में टक्कर मार दी. उस कार के अंदर विस्फोटक भरा था. जबर्दस्त धमाका हुआ. जिस बस में टक्कर मारी गई, उसके परखच्चे उड़ गए. इसके ठीक पीछे जो बस थी, उस पर भी असर हुआ धमाके का. उसमें बैठे जवान भी घायल हुए.

इससे पहले जम्मू-कश्मीर में CRPF पर बड़ा हमला जून 2016 में हुआ था. उनकी एक गाड़ी पर आतंकियों ने हमला कर दिया था. उस हमले में आठ जवान शहीद हुए थे और 22 घायल हुए थे. वो हमला लश्कर-ए-तैयबा ने करवाया था.

फिदायीन हमलावर कौन था? हमला किसने किया?
मौलाना मसूद अज़हर के आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. मौलाना मसूद अजहर वही है, जिसे कंधार विमान अपहरण के बाद बंधकों की रिहाई के बदले छोड़ना पड़ा था. उसी ने सूइसाइड बॉम्बर का भी नाम बताया. उसका नाम था आदिल अहमद डार. 20 साल का लड़का था. पुलवामा के एक गांव गुंडीबाग का रहने वाला था. पहले किसी आरा मशीन में काम करता था. खबरों के मुताबिक, 2018 के मार्च महीने में आदिल घर छोड़कर चला गया था. उसने जैश जॉइन कर लिया था.

गृहमंत्री राजनाथ सिंह का ट्वीट.
गृहमंत्री राजनाथ सिंह का ट्वीट.

इस तरह का हमला हो सकता है, इसकी सूचना दी गई थी!
जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक का कहना है कि ये हमला इंटेलिजेंस फेलियर का नतीजा है. विस्फोटकों से भरी कार कश्मीर को भारत से जोड़ने वाली हाई-वे पर चलती रही. उसकी मूवमेंट, कार में विस्फोटकों की लोडिंग जैसी तमाम चीजें सेना और सुरक्षाबलों की नज़र में नहीं आई. इंडिया टुडे के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों ने इस तरह के हमले की आशंका के मद्देनजर सावधान किया था. खबर मिली थी कि कार में बैठकर कोई फिदायीन अटैक कर सकता है. इस तरह के हमलों से कैसे निपटा जाए, इस बारे में उच्च-स्तरीय मीटिंग्स भी हुईं. मगर कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका.

इंडिया टुडे में छपी अभिषेक भल्ला की खबर के मुताबिक, इस अलर्ट के बाद कारों की तलाशी भी ली जा रही थी. मगर कार बॉम्बर से निपटने के लिए ये तरीका कारगर नहीं था. फिर ये हुआ कि सेना और सुरक्षाबलों के काफिले को देर रात लाया-ले जाया जाए. चूंकि ऐसे टाइम ट्रैफिक कम होता है और इस वजह से उसे मैनेज करना आसान होता है. दिन के वक्त इतनी सारी गाड़ियां चलती हैं कि सबकी चेकिंग करना और उन्हें मैनेज करना बहुत मुश्किल है. चूंकि ये काफिला दिन के वक्त चल रहा था, तो लगता है कि इस विकल्प पर भी अमल नहीं किया गया था अभी तक.


पुलवामा में उड़ी से भी बड़ा आतंकी हमला, CRPF के 42 जवान शहीद

पुलवामा में आतंकी आदिल अहमद डार की वजह से शहीद हुए सीआरपीएफ के 42 जवान

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