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सड़क पर चलते हुए महिला की डिलीवरी हुई, तस्वीर देखकर कलेजा कांप जाएगा

31 जुलाई को मध्यप्रदेश के कतनी ज़िले में एक महिला की रोड पर ही डिलीवरी हो गई. महिला को बेटी हुई थी. लेकिन डिलीवरी के समय ही ज़मीन पर गिरने से बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई.

महिला का नाम बीना बाई है और वो बरमानी गांव की रहने वाली है. बीना का पति देढ़ घंटे तक एंबुलेंस के लिए फ़रयाद करता रहा. जब एंबुलेंस नहीं मिली तब दर्द में ही महिला अपने पति के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरही की ओर चल पड़ी. गांव से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बरही की दूरी लगभग 20 किलोमीटर है. 15 किलोमीटर चलने के बाद रास्ते में ही बीना की डिलीवरी हो गई.

मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी अशोक अवधिया का कहना है कि बीना की डिलीवरी समय ये पहले सातवें महीने में ही हो गई. बीना के परिवार वालों ने एंबुलेंस न मिलने का आरोप लगाया है. इस पर अशोक अवधिया ने सफ़ाई दी कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरही में एंबुलेंस ही नहीं है. ये कहकर उन्होंने पल्ला झाड़ लिया कि जननी एक्सप्रेस नाम से चलने वाली 108 एंबुलेंस उनके अधिकार में नहीं है. ये एंबुलेंस भोपाल से मिलती है. साथ ही उन्होंने कहा कि इस पूरी घटना के जांच के आदेश दे दिए गए हैं. अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ़ कार्रवाई की जाएगी.

मध्यप्रदेश में साल 2015 में 113 प्रेगनेंट महिलाओं की जाने गईं

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो(NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2015 में प्रेगनेंसी के दौरान मध्यप्रदेश में 113 महिलाओं की जानें चली गईं. प्रेगनेंट महिलाओं की सबसे ज़्यादा जानें महाराष्ट्र में जाती हैं. इसके बाद मध्यप्रदेश आता है. साल 2015 में महाराष्ट्र ऐसे 633 मामले सामने आए थे. मेडिकल एक्सपर्ट्स इसकी वजह राज्य में मिलने वाली खराब स्वास्थ्य सेवाओं को बताते हैं. जननी सुरक्षा योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना जैसी स्कीम्स इन आकड़ों को कम कर पाने में नाकाम हैं क्योंकि 2014 में भी मध्यप्रदेश में 109 प्रेगनेंट महिलाओं की जानें गई थीं. ये दोनों ही योजनाएं गरीब महिलाओं की प्रेगनेंसी के दौरान मदद के लिए बनाई गई हैं.

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हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक भोपाल के गाइनोकॉलजिस्ट विराज जैसवाल बताते हैं कि सरकार ने आशा कार्यकर्ता के नाम से प्रगनेंट महिलाओं की देख-रेख करने के लिए लोग रखे हुए हैं. लेकिन उन्हें प्रेगनेंट महिला का ख्याल रखना तक नहीं आता. ज़्यादातर सरकारी चिकित्सालयों में प्रेगनेंसी के समय या अबॉर्शन के लिए जो दवाइयां लेनी चाहिए वो भी उपलब्ध नहीं है.

योजनाओं के होते हुए भी प्रेगनेंट महिलाएं सुविधाओं के अभाव में हैं

अगर महिलाओं को प्रेगनेंसी के समय सही खानपान नहीं मिलता तो वो उनके और बच्चे के स्वास्थ्य पर बहुत प्रभाव डालता है. समय पर एंबुलेंस का न मिलना ,दवाइयों का न होना और चिकित्यालयों में सेवाओं का अभाव होना दिखाता है कि हमारा देश कितना पिछड़ा है. जहां सरकार की बनाई योजनाओं के फ़ायदे इन पिछड़े और आदिवासी लोगों को नहीं मिल पाते. 2016 में ऐसे कितने मामले सामने आए जहां प्रेगनेंट महिला को अस्पताल ले जाने के लिए या तो एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंची या तो पहुंची ही नहीं.

बरमानी गांव की तरह एक केस 2016 की जुलाई में भी हुआ था. मध्य प्रदेश में ही. ज़िला था खरगोन. चूंकि एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंच पा रही थी इसलिए प्रेगनेंट महिला को अस्पताल तक तांगे पर बैठाकर ले जाया गया. लेकिन महिला की डिलीवरी अस्पताल के बाहर साड़ियों का टेंट बनाकर की गई. अस्पताल के बाहर इसलिए क्योंकि डॉक्टर अंदर मीटिंग करनें में बिज़ी थे.


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