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मनी लॉन्ड्रिंग केस में नवाज शरीफ दोषी करार, नहीं रहेंगे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री

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पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने वहां के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दोषी करार दिया है. नवाज को प्रधानमंत्री रहते हुए विदेशों में अवैध संपत्ति अर्जित करने का दोषी पाया गया. इससे पहले 2016 में जब पनामा पेपर्स लीक में नवाज का नाम आया था, तो सुप्रीम कोर्ट ने 6 सदस्यों की एक जांच कमेटी बनाई थी. उस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी, जिसके बाद 28 जुलाई को पांच जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से नवाज को दोषी करार दिया.

अप्रैल 2016 में नवाज शरीफ ने कहा था कि अगर उन्हें दोषी पाया गया, तो वो गद्दी छोड़ देंगे. नवाज से न भी कहते, तो नियम-संविधान के मुताबिक कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें गद्दी छोड़नी होगी. यहां तक कि वो अपनी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग के अध्यक्ष पद पर भी नहीं बने रह पाएंगे. इसी के साथ पाकिस्तान में इस बात पर बहस शुरू हो गई है कि अगला वजीर-ए-आजम कौन होगा.

पनामा पेपर्स भ्रष्टाचार के मामले में नवाज के पिता पर भी आरोप थे. नवाज ने प्रधानमंत्री रहते हुए पद का दुरुपयोग किया और ब्रिटेन से लेकर सऊदी अरब तक कई जगहों पर संपत्ति बनाई. इंग्लैंड में उनके घर हैं, तो कतर में उन्होंने निवेश कर रखा है.

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पनामा पेपर्स लीक ने दुनियाभर में हलचल मचाई थी. 70 देशों के 370 रिपोर्टर्स ने पनामा पेपर्स की जांच की थी, जिसमें पता चला कि रसूख वाले लोग अपने देश के अंदर ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में भ्रष्टाचार कर रहे हैं और अवैध तरीकों से पैसा इकट्ठा कर रहे हैं. पनामा पेपर्स भारत या पाकिस्तान ही नहीं, दुनिया का सबसे बड़ा स्कैंडल है. दुनिया के 100 से ज्यादा मुल्कों के हजारों लोगों से जुड़े करीब 1.15 करोड़ दस्तावेज जारी किए गए थे.

वैसे पाकिस्तान में ये कोई पहला मामला नहीं है, जब किसी स्कैंडल ने सत्ता की चूलें हिला दी हों. इससे पहले भी हुकूमत को हिला देने वाले भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए हैं. आइए जानते हैं उनके बारे में:-

1. मेमोगेट

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी थे. ज्यादा टाइम की बात नहीं है. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार थी. नवाज़ शरीफ की हुकूमत से पहले की हुकूमत का किस्सा है. मेमोगेट ने युसूफ रज़ा गिलानी की हुकूमत को हिला दिया था. सरकार और सेना आमने-सामने थी. लग रहा था तख्ता पलट हो जाएगा. वाशिंगटन में तैनात पाक राजूदत हुसैन हक्कानी और अमेरिकी कारोबारी शख्स मंसूर एजाज़ की बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत से ये मामला सामने आया था. नाम दिया गया मेमोगेट स्कैंडल.

युसूफ रज़ा गिलानी (Source : Express Tribune)
युसूफ रज़ा गिलानी (Source : Express Tribune)

मामले की तफ्तीश के लिए कमीशन बना, सुप्रीम कोर्ट में केस चला. इस मामले में हुआ ये था कि हक्कानी ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार का तख्ता पलट न हो, इसके लिए अमेरिका से मदद मांगी थी.

एबटाबाद में ऑपरेशन ओसामा के बाद पाकिस्तान सरकार की तरफ से अमेरिकी सेना चीफ को एक मेमो भेजा गया था, जिसमें सरकार को पाकिस्तानी सेना के जनरलों से बचाने की गुजारिश की गई थी. साथ ही पाक ख़ुफ़िया एजेंसी को खत्म करने की बात कही गई थी. इसके बदले अमेरिका ने दहशतगर्दी की जंग में पाक से मदद करने और एटमी प्रोग्राम को कम करने की बात कही थी. इस मेमो को पाकिस्तानी सेना ने देशद्रोह जैसा करार दिया और पूरे मामले की जांच की मांग की गई.

कमीशन ने मेमोगेट के लिए हक्कानी को दोषी माना. हुसैन हक्कानी को इस्तीफ़ा देना पड़ा. और वो भी वक़्त आया जब आसिफ अली जरदारी को तख्ता पलट का अंदेशा हुआ. वो ख़ामोशी से इलाज के बहाने दुबई चले गए. और फिर ये केस भी बाकी केसेस की तरह भुला दिया गया.

2 स्विस स्कैंडल केस

ये मामला पाकिस्तान की पहली महिला प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो और उनके शौहर आसिफ अली जरदारी पर करप्शन का केस था. 1998 के बाद जब नवाज़ शरीफ की सरकार आई तो उसने स्विटज़रलैंड की सरकार से प्रधानमंत्री रह चुकीं बेनज़ीर के खिलाफ करप्शन केस की जांच करने की बात कही.

बेनज़ीर भुट्टो और आसिफ अली जरदारी (Source : Daily Pakistan)
बेनज़ीर भुट्टो और आसिफ अली जरदारी (Source : Daily Pakistan)

इस मामले में बेनजीर और उनके शौहर पर कम से कम 6 करोड़ रुपए बटोरने का इल्ज़ाम लगा. जब जांच हुई तो ऐसे 7 अकाउंट पाए गए, जिनतक सिर्फ बेनजीर और उनके शौहर की पहुंच थी. स्विटज़रलैंड में केस चला. जहां बेनज़ीर पर जुर्माना भी लगा. मगर बाद में इस फैसले को रद्द कर दिया गया. तकरीबन 15 साल तक चलने वाले इस केस को तब बंद कर दिया गया जब नवाज़ शरीफ की हालिया हुकूमत ने फिर से स्विस मामले को खुलवाने के लिए लेटर लिखा. स्विस जज ने कहा, अब इस केस को नहीं खोला जा सकता.

3. स्विस केस में युसूफ रज़ा गिलानी की कुर्सी गई

पीपुल्स पार्टी ने पहली बार पाकिस्तान में पूरे टाइम सरकार चलाई. मगर इस दौरान दो प्रधानमंत्री बने. पीपुल्स पार्टी के पहले प्रधानमंत्री युसूफ रज़ा गिलानी को सुप्रीम कोर्ट ने जून 2012 में अयोग्य ठहरा दिया था. जिसके बाद राजा परवेज़ अशरफ पीएम बने. अयोग्य ठहराने से गिलानी की कुर्सी तो गई, साथ ही पांच साल तक चुनाव में भी शामिल नहीं हो सकते थे. बैन लगा दिया गया था. ये मामला आसिफ अली जरदारी के स्विस केस से ही जुड़ा था. सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें स्विस सरकार को खत लिखने को कहा था. लेकिन गिलानी ने ऐसा नहीं किया. ये कोर्ट की अवमानना थी. कोर्ट की अवमानना करने का दोषी ठहराकर उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया गया.

गिलानी के बाद राजा परवेज़ अशरफ को नया प्रधानमंत्री बनाया गया था. राजा परवेज़ अशरफ भी आसिफ अली जरदारी के नजदीकी थे. गिलानी की पांच साल की मुद्दत अप्रैल में पूरी हो गई है. अब वो चुनाव में भाग ले सकते हैं.

4. रेंटल पॉवर केस

पाकिस्तान में बिजली की कमी को पूरा करने के लिए साल 2008 में पाकिस्तान सरकार ने किराये के बिजलीघर लेने की योजना तैयार की. इसमें देश के तकरीबन 60 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. इस मामले में पांच लोग नामज़द हुए. जिसमें एक नाम राजा परवेज़ अशरफ का था, वो उस वक़्त मिनिस्टर फॉर वाटर एंड पॉवर थे. जो 2012 में प्रधानमंत्री भी बने. राजा परवेज़ अशरफ की गिरफ्तारी के वारंट जारी हुए. सुप्रीम कोर्ट में केस चला. बिजलीघर मुहैया कराने वाली कंपनियों ने हुकूमत को अरबों रुपए वापस किए.

परवेज़ अशरफ का कहना था कि रेंटल पॉवर की योजना परवेज़ मुशर्रफ की सरकार ने साल 2006 में तैयार की थी. जिसकी मंज़ूरी साल 2008 में दी गई.

5. मेहरानगेट स्कैंडल

इस स्कैंडल में न सिर्फ राजनेता शामिल थे, बल्कि सेना के ऊंचे पदों पर बैठे लोग भी शामिल थे. इसमें 1990 में पूर्व प्रेसिडेंट गुलाम इसहाक खान ने चुनाव में पीपुल्स पार्टी को शिकस्त देने के लिए फ़ौज की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के ज़रिए राजनेताओं में पैसा बंटवाया था.

गुलाम इसहाक अली खान
गुलाम इसहाक खान

राजनेताओं तक पैसा पहुंचाने में ‘मेहरान बैंक’ के अध्यक्ष यूनुस हबीब ने मदद की. बाद में यूनुस ने ही सुप्रीम कोर्ट में मेहरान बैंक के पैसे वापस दिलाने की दरख्वास्त लगाई. इस मामले में आर्मी चीफ जरनल असलम बेग, आईएसआई चीफ जनरल असलम दुर्रानी और एडमिरल असगर खान के नाम सामने आये. जिन राजनेताओं ने पैसे लिए उनमें मौजूदा प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ का नाम भी था. 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि 1990 के चुनाव में धांधली हुई. तय हुआ कि जिन्होंने पैसा लिया उनसे मुनाफे के साथ पैसा वसूला जाए. आईएसआई में सियासी सेल खत्म हो. फैसले में ये भी कहा गया कि आर्मी चीफ और आईएसआई चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकते.

अब पनामा गेट

यह खुलासा इंटरनेशनल कन्सोर्टियम ऑफ इन्वेस्टीगेटिव जर्नलिस्ट नाम के एनजीओ ने किया था. पनामा उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका को ज़मीनी रास्ते से जोड़ने वाला देश है. इसकी एक कानूनी फर्म मोसेक फोंसेका के सर्वर को 2013 में हैक करने के बाद मिले दस्तावेज 100 मीडिया ग्रुपों के पत्रकारों को दिखाए गए थे. जिसमें भ्रष्टाचार के बड़े मामले सामने आए. दस्तावेज बताते हैं कि किस तरह पैसे वाले लोग ऐसी जगह पर अपना पैसा लगाते हैं जहां टैक्स का कोई चक्कर नहीं हो. दस्तावेजों में 143 राजनेताओं के नाम सामने आए. पनामा की यह कम्पनी लोगों के पैसे का प्रबन्धन करती है. यदि आपके पास बहुत धन है और आप सुरक्षित रूप से ठिकाने लगाना चाहते हैं तो यह आपके नाम से फर्जी कम्पनी खोलती है और कागजों का हिसाब-किताब रखती है.

पनामा पेपर्स लीक में भारतीयों के नाम भी सामने आए थे, लेकिन आगे कोई मामला नहीं बढ़ा. जिनके नाम सामने आए, इनमें एक्टर अमिताभ बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन, अजय देवगन के अलावा कई राजनेताओं और उद्योगपतियों के नाम शामिल थे. विदेशी हस्तियों में जिनके नाम सामने आए वो भी चौंकाने वाले थे, आइलैंड के प्रधानमंत्री, यूक्रेन के राष्ट्रपति, सउदी अरब के शाह और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के पिता का नाम, रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के करीबी व्यापारी, अभिनेता जैकी चैन और फुटबालर लियोनेल मेसी का नाम भी शामिल था.

नवाज़ शरीफ पर ये हैं आरोप

पनामा पेपर्स लीक के जरिये खुलासा हुआ था कि प्रधानमंत्री शरीफ के दो बेटों हसन और हुसैन के अलावा उनकी एक बेटी मरियम ने विदेश में खाते खोले और कंपनियां बनाई हैं, जिसमें 2.5 करोड़ रुपये का निवेश किया. कर चोरी का ये बड़ा मामला पनामा पेपर्स से सामने आया.

मरियम नवाज़ (Source: Aaj TV)
मरियम नवाज़ (Source: Aaj TV)

इसके अलावा नवाज शरीफ पर पाक सरकार के एक हजार करोड़ रुपये के हेर-फेर करने का भी आरोप है और शरीफ फैमिली की कुल जायदाद चार हजार करोड़ रुपये है. बताया जाता है कि नवाज ने गलत तरीके से ये रकम जुटाई थी. पाकिस्तान के कई बड़े शहरों में भी उनकी गैर कानूनी प्रॉपर्टी है.


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