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जिसको-जिसको ‘चांद का टुकड़ा’ चाहिए, वो हाथ ऊपर करे

“मुंतज़िर हूं कि सितारों की ज़रा आंख लगे,

चांद को छत पे बुला लूंगा इशारा करके.”

राहत इंदौरी साब ने लिखा है. ख़ूब लिखा है.

लेकिन अब इशारा-विशारा करने की ज़रूरत नहीं है. पइसा खर्च करिए. चांद को छत पर टंकी के बगल में रख लीजिए. कमरे में टीवी के बगल वाली अलमारी में रख लीजिए या बेड के प्लेटफॉर्म पर रख लीजिए. माने जो मन, वो करिए.

कैसे? चांद का टुकड़ा बिक रहा है. ख़रीद लीजिए. 19 करोड़ रुपए में.

महंगा है? हां, तो चांद से जुड़ी बातें सस्ती होती हैं क्या भला?

ये था ख़बर का ‘कला पक्ष’. अब समझिए ‘भाव पक्ष’.

#तेरा मुखड़ा, चांद का टुकड़ा

नो ब्रो. मुखड़ा अलग है. चांद का टुकड़ा अलग है. मुखड़ा इज़ Face. चांद का टुकड़ा इज़ Moon Meteorite.

यस. सही सुने. दरअसल लंदन में एक मून मीटियोराइट नीलाम हो रहा है. मून मीटियोराइट मतलब आसान भाषा में वो टुकड़ा, जो किसी वजह से चांद से टूटकर अलग हो जाता है. जो टुकड़ा अभी नीलाम हो रहा है, वो 2017 में चांद से टूटकर धरती पर आ गिरा था. अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान के आस-पास कहीं.

वैज्ञानिकों को टुकड़ा मिला, तो इस पर लिखा-पढ़ी की गई. माने स्टडी. नाम रखा गया NWA-12691. अनुमान हुआ कि किसी एस्टेरॉयड या धूमकेतु ने चांद पर टक्कर मारी होगी. टक्कर की वजह से ये टुकड़ा चांद से टूटकर अलग हो गया और धरती पर आ गिरा.

#खोया-खोया चांद

अपने गोले से भटककर हमारे गोले पर पहुंचे इस मीटियोराइट का वजन करीब 13.5 किलो है. नीलामी ब्रिटेन का नीलामीघर क्रिस्टी कर रहा है. शुरुआती बिडिंग प्राइज़ है- 2.5 मिलियन डॉलर यानी करीब 19 करोड़ रुपए.

पांचवां सबसे बड़ा टुकड़ा है

1969 से 1972 के बीच नासा ने चांद पर छह अपोलो मिशन लॉन्च किए थे. जब अपोलो यान मिशन पूरा करके लौटा, तो साथ लाया ढेर सारे चांद के टुकड़े. सबका कुल मिलाकर वज़न था- 382 किलोग्राम.

आज तक धरती पर 300 से ज़्यादा मून मीटियोराइट आ चुके हैं और इनका कुल मिलाकर वज़न है करीब 650 किलोग्राम.

इन दोनों बातों से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि एक मीटियोराइट औसतन दो से तीन किलो का ही होता होगा. लेकिन ये NWA-12691 13.5 किलो का है. धरती पर अब तक पाया गया पांचवां सबसे बड़ा चांद का टुकड़ा है.

इसीलिए ये इतना महंगा नीलाम भी हो रहा है. फिर जब 3 लाख, 84 हज़ार किमी की जर्नी करके कोई हमारी धरती पर आया है, तो इतनी आवभगत तो बनती ही है.

वैसे जाते-जाते बता दें कि बहुत सालों तक चांद को देखकर एस्ट्रोनॉमर्स हैरानी ही जताते थे. उनके मन में बहुत सारे सवाल आते थे. मसलन, पृथ्वी के पास ये चांद आया कैसे? या इस चांद पर दाग कैसे बने? जब अपोलो मिशन्स के बाद नासा चांद के टुकड़ों को लाया. तब वैज्ञानिकों ने इन्हें लैब में स्टडी किया. और इन स्टडीज़ से ही चांद की कई सारी गुत्थियां सुलझीं.


कहानी इंसान को चांद पर पहुंचाने वाली NASA की गणितज्ञ कैथरीन जॉनसन की

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