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उत्तर बिहार में हर साल क्यों आती है बाढ़, अभी कैसे हैं हालात

गंगा नदी बिहार को दो भाग में बांटती है. गंगा से उत्तर का भाग उत्तर बिहार और उसके दक्षिण का भाग दक्षिण बिहार कहा जाता है. अभी बात उत्तर बिहार की, क्योंकि इस क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात हैं.

अभी नदियों का हाल क्या है?

राज्य सरकार के मुताबिक़, प्रदेश में गंगा हर जगह खतरे के निशान से नीचे बह रही है. बागमती नदी सीतामढ़ी, मुज़फ्फरपुर और दरभंगा में खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. अधवारा समूह की नदियां खतरे के निशान के पार हैं. पूर्णिया में महानंदा, समस्तीपुर में बूढी गंडक, मधुबनी में कमला बलान, दरभंगा में खिरोई भी खतरे के निशान के ऊपर हैं. इसमें से अधिकतर नदियां स्टेबल हैं या फिर बढ़ रही हैं. बहुत कम नदियों के ट्रेंड में पानी कम होती दिख रही हैं, क्योंकि उत्तर बिहार और नेपाल में लगातार बारिश हो रही है.

22 जुलाई तक राज्य के उत्तर-पूर्व इलाके में भारी बारिश होने का अनुमान है. लगातार हो रहे बारिश के बाद सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि पोखर (तालाब) और खेतों में कुछ ख़ास अंतर नहीं नज़र आ रहा है.

कौन-सा इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित है?

सुपौल में कोसी के साथ ही तिलयुगा नदी में पानी बढ़ता जा रहा है. कई जगहों पर सड़कें पानी में बह गई हैं. कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है.

गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सुपौल और किशनगंज का सबसे बुरा हाल है. मुंगेर, मधेपुरा, खगड़िया और सहरसा में भी बाढ़ जैसे हालात हैं. दरभंगा की बात करें, तो कुशेश्वरस्थान इलाके का बुरा हाल है. सिर्फ दरभंगा में करीब 1.6 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. मुज़फ्फरपुर में लगातार बारिश से पूरे शहर में पानी भरा हुआ है.

Bihar Floods
बिहार में बाढ़ से घिरा एक गांव (फोटो: एएनआई)

सरकार क्या कह रही है?

बिहार के जल संसाधन मंत्री संजय झा ने कहा है कि बीते 24 घंटों के दौरान बिहार के कुछ जिलों में भारी वर्षा हुई है. सभी अधिकारी अलर्ट पर हैं. सभी नदियों के जलस्तर और तटबंधों की निगरानी की जा रही है. सरकार ने लोगों से अपील की है कि तटबंध को कहीं भी ख़तरा दिखता है, तो 18003456145 पर कॉल करके जानकारी दें.

आपदा प्रबंधन विभाग ने स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया हुआ है कि सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन किया जाए, ताकि बाढ़ से घिरे लोगों के बीच कोरोना न फैले.

सीएम नीतीश कुमार ने लोगों से अपील है कि वे खराब मौसम में सतर्क रहें और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए सुझावों का पालन करें.

पीएम मोदी ने 19 जुलाई को बिहार में बाढ़ की स्थिति को लेकर सीएम नीतीश कुमार से चर्चा की है और केंद्र से हर जरूरी मदद का भरोसा दिलाया.

डीडी न्यूज़ के मुताबिक़, राज्य के कम से कम 153 पंचायत और तीन लाख से ज्यादा की आबादी प्रभावित है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में पीड़ितों के लिए सामुदायिक रसोईघर चलाए जा रहे हैं. 12 हज़ार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया है. तीन हज़ार से अधिक लोगों को 7 राहत शिविरों में रखा गया है. सुपौल में दो, दरभंगा में दो और गोपालगंज में तीन राहत शिविर बनाए गए हैं.

राज्य सरकार फसल, घर आदि को हुए नुकसान के आकलन में लगी हुई है.

बिहार में हर साल बाढ़ आती क्यों है?

आसान भाषा और एक लाइन में इसका जवाब है- भौगोलिक परिस्थिति. बिहार की भौगोलिक परिस्थिति को समझने के लिए नेपाल की भौगोलिक परिस्थिति को समझना होगा. क्योंकि बिहार में सात जिले ऐसे हैं, जो नेपाल से सटे हैं. ये जिले हैं– पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज. नेपाल पहाड़ी इलाका वाला देश है. जब पहाड़ों पर बारिश होती है, तो उसका पानी नदियों के ज़रिए नीचे आता है और नेपाल के तराई इलाकों में भर जाता है. इन इलाकों को इनर तराई कहा जाता है. भारत के जिन जिलों का नाम ऊपर बताया, उन्हें आउटर तराई में गिना जाता है. नेपाल में कई ऐसी नदियां हैं, जो नेपाल के पहाड़ी इलाकों से निकलकर मैदानी इलाकों में आती हैं. फिर वहां से और नीचे बिहार में दाखिल हो जाती हैं.

Bihar Nepal
नेपाल से सटे बिहार के इलाके. (फोटो: गूगल मैप्स)

बिहार में बाढ़ का सबसे ज्यादा पानी नेपाल से आता है. नेपाल में पानी इसलिए नहीं टिकता, क्योंकि वो पहाड़ी इलाका है. ऊंचा इलाका है. तराई का इलाका निचला इलाका है. हालिया साल में नेपाल में खेती और उद्योग-धंधे को लेकर जंगल काटे जा रहे हैं. जंगल मिट्टी को अपनी जड़ों से पकड़कर रखते हैं और बाढ़ के तेज बहाव में भी कटाव कम होता है. लेकिन जंगल के कटने से मिट्टी का कटाव बढ़ता गया है.

सालों-साल से नदियों में बहुत सारा सिल्ट जमा हो गया है. माने बालू या गाद का जमा होना. और इन सिल्ट की सही से सफाई भी नहीं की जा रही है. ऐसे में सिल्ट जमा होते जाने के कारण नदी का तल ऊंचा होता जाता है. इससे नदी का बहाव प्रभावित होता है. नदियां कई बार रास्ता बदल लेती हैं. ज्यादा पानी हो, तो कई बार बांध भी तोड़ देती है.

एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि जब तक फरक्का का बांध नहीं बना था, तब तक सारा सिल्ट और बालू बहकर बंगाल की खाड़ी में चला जाता था. लेकिन फरक्का में बांध बनने के कारण नदियों में गाद बढ़ती जा रही है.


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