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आपके पास पुरानी गाड़ी या बाइक है तो सरकार के नए नियमों को समझ लीजिए

अगर आपके पास पुरानी गाड़ी या बाइक है, तो इनके इस्तेमाल को लेकर सरकार के कुछ नियम आए हैं, वो समझ लीजिए. इन नए नियमों का सूत्र ये है कि सरकार पुराने वाहनों को जितनी जल्दी हो सके हटाना चाहती है, सड़क पर चलते नहीं देखना चाहती. कई मौकों पर कई तरीकों से सरकार ये बात कह चुकी है. बजट में भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई वाहन स्क्रैपिंग पॉलिसी का ऐलान किया था. सरकार इस पर इतना ज़ोर क्यों दे रही है? सरकार की इस पॉलिसी से उन पर क्या असर पड़ेगा जो 15 साल पुरानी गाड़ी इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन नई गाड़़ी नहीं खरीद सकते हैं? इसमें बुजुर्ग हो सकते हैं, मध्यवर्ग के तबके के लोग हो सकते हैं, इन सब पर बात करेंगे. लेकिन पहले वाहनों के रजिस्ट्रेशन को लेकर आए कुछ नए नियमों की बात कर लेते हैं.

Nirmala Sitharaman
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण. (तस्वीर: पीटीआई)

परिवहन मंत्रालय ने वाहनों के रजिस्ट्रेशन को लेकर नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है. नियम ऐसे बनाए हैं कि अब पुराने वाहनों को चलाना महंगा पड़ने लगेगा. ये नए नियम इस साल 1 अक्टूबर से लागू होंगे.

इन नए नियमों को बिंदुवार समझते हैं

#1
15 साल से पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराने की फीस बढ़ा दी गई है. अभी जितना देना पड़ रहा है, उसका 8 गुना ज्यादा अक्टूबर से देना पड़ेगा.

#2
बाइक, स्कूटर जैसे दो पहिया वाहनों के भी रि-रजिस्ट्रेशन चार्ज बढ़ा दिए गए हैं. अभी अगर 300 रुपये देने पड़ रहे हैं तो नया नियम लागू होने के बाद 1000 रुपए देने पड़ेंगे.

#3
अगर कोई बाहर से इम्पॉर्टेड वाहन है, तो उसका रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराने के लिए 40 हज़ार रुपए देने होंगे.

#4
15 साल से पुराने इम्पॉर्टेड वाहनों के रजिस्ट्रेशन का रिन्यू फीस 40 हजार रुपए हो जाएंगे.

#5
कॉमर्शियल गाड़ियों के फिटनेस सर्टिफिकेट और रिन्यूअल के लिए 10 हजार रुपये देने पड़ेंगे.

#6
ट्रक और बस जैसे बड़े वाहनों के रिन्यू सर्टिफिकेट के लिए साढ़े 12 हजार तक देने पड़ सकते हैं.

इसके अलावा, अगर 15 साल से पुराने वाहन का रजिस्ट्रेशन खत्म होते ही आपने उसका रजिस्ट्रेशन तुरंत रिन्यू नहीं कराया, तो हर महीने के हिसाब से पेनाल्टी भी शुरू हो जाएगी. यानी करीब 500 रुपए आपको हर महीना देना पड़ सकता है.

सर्टिफिकेट ज़रूरी हो जाएगा?

और जैसा नई स्क्रैपिंग पॉलिसी में ऐलान हुआ था, 20 साल से पुराने वाहनों के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट ज़रूरी हो जाएगा. कॉमर्शियल वाहनों के लिए 15 साल पर फिटनेस सर्टिफिकेट लेना होगा. और यहां समझने वाली बात ये है कि फिटनेस का मतलब सिर्फ कम प्रदूषण से ही नहींं है. यानी अगर 15 साल पुरानी गाड़ी पेट्रोल गाड़ी में सीएनजी लगवा ली तो उससे प्रदूषण सर्टिफिकेट तो मिल सकता है, लेकिन फिटनेस सर्टिफिकेट में गाड़ी के मेकेनिकल पार्ट की भी जांच होगी. जैसे कि ब्रेक्स, इंजन या बाकी कुलपुर्जे फिटनेस के पैमानों पर खरे उतरते हैं कि नहीं. परिवहन मंत्री ने बताया है कि विदेश से मशीनें मंगवाई जा रही हैं जिनसे वाहनों के फिटनेस की जांच होगी.

तो जो वाहन पुराने हो जाएं, और जिनको फिटनेस सर्टिफिकेट ना मिले उनका क्या होगा. सरकार चाहती है कि उन्हें आप स्क्रैपिंग सेंटर्स यानी तय कबाड़खानों में भेज दें. सरकार देशभर में इस तरह के स्क्रैपिंग सेंटर्स शुरू करने जा रही है. और आप अपने पुराने वाहनों को इन स्क्रैपिंग सेंटर्स में ही ले जाएं, उन्हें घर पर न खड़े रहने दें, इसके लिए भी सरकार ने थोड़ा लालच दिया है. गाड़ी को स्क्रैपिंग सेंटर ले जाने के बाद उसके मालिक की पहचान होगी और उसे एक सर्टिफिकेट दिया जाएगा. सर्टिफिकेट इस बात का कि अमुक गाड़ी अमुक सेंटर में स्क्रैपिंग के लिए आ चुकी है. और इस सर्टिफिकेट से क्या होगा कि नई गाड़ी खरीदने पर 5 पर्सेंट की छूट मिलेगी. परिवहन मंत्रालय ने नई कार बेचने वाले डीलर्स से कहा है कि सर्टिफिकेट दिखाने पर 5 फीसदी की छूट दी जाए.

पुरानी गाड़ियों को लेकर सरकार ये तर्क देती रही है कि इनसे प्रदूषण के साथ साथ ईंधन की भी ज्यादा खपत होती है. पेट्रोल-डीज़ल के बढ़ते दामों के पक्ष में भी सरकार से ये कह दिया जाता है कि अब दूसरे विकल्पों की तरफ जाना चाहिए. लेकिन दूसरे विकल्प हैं कितने. इक्की दुक्की कार कंपनियां अभी बैटरी से चलने वाले गाड़ियां बाज़ार में लेकर आई हैं. वो भी पेट्रोल-डीज़ल वाली कारों के मुकाबले महंगी हैं. चार्जिंग स्टेशन का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है. हालांकि परिवहन मंत्री ने आज संसद में कहा है कि अगले दो साल में 100 फीसदी मेड इन इंडिया लिथियम बैटरी वाली कारें आ जाएंगी और इनकी कीमत भी पेट्रोल-डीज़ल कारों के बराबर हो जाएगी. दूसरी तरफ सीएनजी के फिलिंग स्टेशन भी कुछ बड़े शहरों तक ही सीमित हैं. इन सब के बीच सरकार की स्क्रैपिंग पॉलिसी या पुराने वाहनों को चलाने पर खर्चा बढ़ाने वाली नीति को किस तरह से देखना चाहिए?

ये बिल्कुल ज़रूरी है कि हमारा पर्यावरण साफ-सुथरा हो. और इसके बिल्कुल ये ज़रूरी है कि लिए वाहनों का प्रदूषण भी घटाया जाए. लेकिन नई नीतियां तभी कामयाब होंगी जब लोगों को नए विकल्पों की सहूलियत भी मिलेगी.


वीडियो- भारत में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए मोदी सरकार अब क्या नया नियम ला रही है?

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