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मुहर्रम को लेकर यूपी पुलिस के 'गोपनीय' सर्कुलर में क्या है, जिस पर मुस्लिम धर्मगुरुओं की सख्त आपत्ति है?

मुहर्रम. इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना. इस्लाम को मानने वाले हुसैन इब्न अली की शहादत को इस महीने मनाते हैं. हुसैन इब्न अली पैगंबर मोहम्मद के पोते थे. कर्बला की लड़ाई में हजरत हुसैन ने शहादत दी थी. मुहर्रम इसी शहादत का शोक है. हजरत हुसैन की शहादत को याद करते हुए मुसलमान, खासकर शिया मुसलमान मुहर्रम पर जुलूस निकालते हैं. इस साल मुहर्रम 19 अगस्त को है. दुनियाभर के मुसलमानों के साथ भारतीय मुस्लिम समाज के लोग भी जुलूस निकालने की तैयारी में हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश में मुहर्रम का मातम करना मुश्किल दिख रहा है.

यूपी पुलिस ने सर्कुलर जारी किया

दरअसल, शनिवार 31 जुलाई को यूपी पुलिस ने एक सर्कुलर (Muharram 2021 Uttar Pradesh Guidelines) जारी किया. इसमें मुहर्रम पर जुलूस नहीं निकालने का निर्देश दिया गया है. इसे लेकर बवाल खड़ा होता दिख रहा है. सर्कुलर के हवाले से शिया धर्मगुरुओं ने यूपी पुलिस पर सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का आरोप लगाया है. वहीं, यूपी पुलिस का कहना है कि जारी सर्कुलर पिछले 3-4 सालों से निकाला जा रहा है.

पुलिस के मुताबिक, उसने कोरोना वायरस संकट के मद्देनज़र ये गाइडलाइन जारी की हैं. इसी के चलते पिछले महीने कांवड यात्रा पर भी प्रतिबंध लगाया गया था. अब मुहर्रम के मौके पर निकलने वाले जुलूस को लेकर दिशा-निर्देश दिए हैं. हालांकि मुस्लिम धर्मगुरुओं का कहना है कि उन्हें इस सर्कुलर में इस्तेमाल की गई भाषा से दिक्कत है.

Muharram In Kolkata
पिछले साल कोलकाता में मुहर्रम के जुलूस में शामिल लोग. (तस्वीर- पीटीआई)

सर्कुलर में क्या है?

उत्तर प्रदेश के डीजीपी कार्यालय द्वारा जारी ये “गोपनीय/अति आवश्यक” सर्कुलर सूबे के तमाम पुलिस आयुक्तों को लिखा गया है. 4 पन्नों के इस सर्कुलर के पॉइंट नंबर 4 में मुहर्रम को “सांप्रदायिक दृष्टिकोण से बेहद सेंसिटिव” बताया गया है. इसमें लिखा है,

“मुहर्रम सांप्रदायिक दृष्टिकोण से अति-संवेदनशील है. ऐसे धार्मिक अवसरों पर लोग अक्सर भावनाओं से ओत-प्रोत होकर मुखर हो जाते हैं. राज्य के हिंदू व मुस्लिम समुदायों के कट्टरवादी और असहिष्णु तत्व छोटी-बड़ी घटनाओं को तूल देकर दोनों समाज के बीच अप्रत्याशित रूप से विवाद, तनाव, टकराव आदि को लेकर असामान्य स्थिति पैदा कर सकते हैं. पुराने लंबित धार्मिक और सांप्रदायिक प्रकरणों, और ऐसे नए उठने वाले विवादों, अपरंपरागत धार्मिक जुलूसों और कार्यों, यौन संबंधी घटनाओं, गौवंश वध आदि को लेकर पहले भी अनेक अवसरों पर सांप्रदायिक सद्भाव प्रभावित होता रहा है. इसे देखते हुए सतर्कता अपेक्षित है.”

Moharram Up Police Order
डीजीपी कार्यालय द्वारा जारी “गोपनीय/अति आवश्यक” सर्कुलर.

क्या बोले धर्मगुरु?

शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने इस सर्कुलर को ‘गालियों भरा’ खत बताया है. उन्होंने कहा कि इस सर्कुलर के लिए यूपी पुलिस को अदालत के कटघरे में खड़ा करना चाहिए. कल्बे जव्वाद कहा,

“ये सर्कुलर गालियों भरा ख़त है. शिया (समाज) के ऊपर झूठे इल्ज़ामों का पुलिंदा है. बताया गया है की मुहर्रम में रेप होते हैं, गाय काटी जाती हैं. क्या ये सब कोविड गाइडलाइन हैं?”

मौलाना कल्बे जव्वाद यहीं नहीं रुके. उन्होंने यूपी पुलिस पर ये भी आरोप लगा दिया कि वो ना सिर्फ़ शिया-सुन्नी, बल्कि हिंदू-मुस्लिम को भी लड़ाना चाह रही है. मौलाना ने आरोप लगाया कि पुलिस के इस सर्कुलर के पीछे कट्टरपंथी ताक़तों का हाथ है. कल्बे जव्वाद ने कहा,

“ये किसी मुल्ले से लिखवाया है जो इस तरह की बाते करते हैं. ये अमन चैन भंग करने की पूरी तैयारी है.”

Muslim Month Of Muharram
पाकिस्तान के रावलपिंडी में मुहर्रम का नजारा. (तस्वीर- पीटीआई)

शिया पर्सनल बोर्ड ने भी जताया विरोध

ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड (AISPB) के जनरल सेक्रेटरी और शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने भी इस सर्कुलर पर विरोध जताया है. उन्होंने कहा कि ये सर्कुलर ‘सऊदी और वहाबी सोच का नमूना’ है. यासूब अब्बास के मुताबिक,

“पूरे उत्तर प्रदेश में मुहर्रम को लेकर डीजीपी की तरफ से जो सर्कुलर जारी किया गया है, उसे उनके किसी वहाबी मित्र ने बैठकर तैयार किया है. लिहाजा ऑल इंडिया शिया पर्सनल बोर्ड इस पूरी गाइडलाइन का विरोध करता है.”

मौलाना ने बताया कि इस मसले पर मंगलवार 3 अगस्त को उनके आवासर पर बोर्ड की अहम बैठक बुलाई गई है. यासूब अब्बास के मुताबिक, बैठक के बाद इस मामले में अहम फ़ैसला लिया जा सकता है.

उधर, सर्कुलर के पॉइंट नंबर 8 में ये लिखा है कि पुलिस को मामले से जुड़ी पीस कमेटी और धर्मगुरुओं के साथ मिलकर इस सर्कुलर की जानकारी देनी होगी और दिल्ली हाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों के बारे में भी बताना होगा. हालांकि धर्मगुरुओं का साफ कहना है कि वे पुलिस के साथ किसी भी बातचीत में तब तक नहीं शामिल होंगे, जब तक ये सर्कुलर वापस नहीं ले लिया जाता.

इस बीच, उत्तर प्रदेश के एडीजी (लॉ एंड आर्डर) प्रशांत कुमार ने आजतक को बताया कि ये सर्कुलर तीन-चार साल से जारी हो रहा है. उनके मुताबिक़, इसमें कोई भी बात नई नहीं लिखी गई है. प्रशांत कुमार ने आगे बताया कि इंटेलिजेंस के इनपुट के आधार पर अपने अफसरों को सतर्कता बरतने के लिए ये सर्कुलर जारी किया गया है. उनका कहना है कि ये पुलिस विभाग का इंटर्नल सर्कुलर है, किसी बाहरी व्यक्ति का इससे कोई सरोकार नहीं है, ना ही इसमें कुछ विवादास्पद है.


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