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TMC में घर वापसी करने वाले मुकुल रॉय ने 4 साल बाद बीजेपी छोड़ने का फैसला क्यों लिया?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की जबरदस्त जीत के बाद से ही कई नेताओं की घर-वापसी की चर्चा चल रही थी. इस कड़ी में पहली बड़ी घर वापसी हुई है. सीएम ममता बनर्जी के पुराने करीबी रहे मुकुल रॉय ने बीजेपी छोड़कर फिर से TMC का दामन थाम लिया है. उन्होंने शुक्रवार 11 जून को ममता बनर्जी की उपस्थिति में फिर से पार्टी जॉइन की. इस मौके पर मुकुल रॉय ने कहा कि बंगाल में जिस तरह का माहौल है, कोई भी बीजेपी में नहीं रुक सकता.

TMC जॉइन की, अभिषेक बनर्जी को गले लगाया

शाम तकरीबन 4.30 बजे मुकुल रॉय TMC में ‘घर-वापसी’ के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचे. उनके साथ बेटा शुभ्रांशु रॉय भी थे. ममता बनर्जी, भतीजे अभिषेक बनर्जी और दूसरे नेता भी वहां मौजूद थे. प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने अपने लिए रखी खास कुर्सी को बदलवाया. सबके लिए एक जैसी कुर्सी रखने को कहा. उसके बाद ममता बनर्जी के पास मुकुल रॉय बैठे. उनके बाद अभिषेक बनर्जी ने कुर्सी संभाली. अभिषेक बनर्जी ने जैसे ही मुकुल रॉय को पार्टी जॉइन करवाने के लिए तृणमूल कांग्रेस का अंगवस्त्र पहनाया, उन्होंने अभिषेक बनर्जी को गले लगा लिया.

मुकुल बनर्जी ने कहा कि वह बीजेपी छोड़ने की वजह तफ्सील से बताएंगे. उन्होंने कहा कि

मुझे आज इस घर में और इस सभा में वापस आकर बहुत अच्छा लग रहा है. बीजेपी से बाहर आकर नए तरीके से जिन लोगों से बात और मुलाकात हो रही है, वह अच्छा लग रहा है. मैं सोच रहा हूं कि अब बंगाल फिर अपनी जगह पर वापस आएगा. पश्चिम बंगाल और देश को हमारी नेता ममता बनर्जी लीड करेंगी. मैं समझ चुका हूं कि बीजेपी में अब नहीं रह पाऊंगा, इसलिए वापस अपने पुराने घर में आया हूं. बंगाल में जो स्थिति है, उसमें कोई बीजेपी में नहीं रह सकता.

‘गद्दारों’ पर भड़कीं ममता बनर्जी

ममता बनर्जी ने मुकुल रॉय के पार्टी में वापस आने पर खुशी जाहिर की. उन्हें घर का लड़का बताया. उन्होंने कहा कि मुकुल रॉय ने भले ही पार्टी छोड़ी, लेकिन कभी भी TMC या किसी के खिलाफ गलतबयानी नहीं की. उनका पार्टी में वापस आना अच्छा लग रहा है. हालांकि इस मौके पर उन्होंने पार्टी छोड़कर गए कई लोगों को चेताया भी. उन्होंने कहा कि वह गद्दारों को पार्टी में वापस नहीं लेंगी. उन्होंने यह संकेत भी दिया कि आने वाले वक्त में कुछ और लोग तृणमूल कांग्रेस जॉइन कर सकते हैं. ममता बनर्जी ने कहा कि

मुकुल रॉय हमारे घर के ही लड़के हैं. वह घर वापस आ रहे हैं. मुकुल रॉय पार्टी के पुराने नेता हैं. बीजेपी ने उन्हें चमका कर, धमका कर एजेंसी का डर दिखा कर पार्टी जॉइन करवा ली. उन्हें अब यहां आकर मानसिक शांति मिली है. बीजेपी में शोषण बहुत ज्यादा है. वहां पर कोई जिंदा नहीं रह सकता. हमारा दल शक्तिशाली है. आपने देखा कि हमने बड़ी जीत हासिल की. जिन लोगों ने हमारी पार्टी के साथ गद्दारी की, उन्हें हम पार्टी में कतई वापस नहीं लेंगे. लेकिन मुकुल ने ऐसा नहीं किया है. उन्होंने हमारे साथ गद्दारी नहीं की. मुकुल ने एक बार भी दल विरोधी बात नहीं की.

मुकुल रॉय के बीजेपी छोड़ने की पटकथा

मुुकुल रॉय ने 2017 में TMC छोड़कर बीजेपी जॉइन की थी. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक़, मुुकुल रॉय केंद्रीय सरकार में पद न मिलने से व्यथित थे. उसके बाद पश्चिम बंगाल में विपक्ष का नेता न बनाए जाने से वह बीजेपी से बिफरे हुए थे. पहले रेल मंत्री रह चुके मुकुल रॉय को केंद्र में कोई बड़ा पद मिलेगा, ऐसी उनकी उम्मीद थी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

बीजेपी में आने के बाद मुकुल रॉय ने संगठन विस्तार के लिए काफ़ी काम किया. वह कई TMC के नेताओं को बीजेपी में लाए, संगठन को जमीन पर भी मजबूत किया. इसका परिणाम 2019 में देखने को मिला. जब भाजपा लोकसभा में 18 सीटें जीतने में कामयाब हुई. इसके बाद भी मुकुल रॉय को केंद्र में कोई पद नहीं मिला. यहां तक कि उन्हें राज्य सभा भी नहीं भेजा गया. इसी दौरान बीजेपी ने मुकुल रॉय को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बना दिया. पार्टी सूत्रों के मुताबिक़, मुकुल बंगाल विधान सभा का चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे. वह प्रदेश भर में दौरा करना चाहते थे, लेकिन उन्हें पार्टी ने चुनाव लड़ाया और इस वज़ह से वो अपनी सीट कृष्णनगर (उत्तर) तक सीमित रह गए.

विधान सभा चुनाव हारने के बाद बीजेपी ने जब मुकुल रॉय की जगह सुवेंदु अधिकारी को नेता प्रतिपक्ष घोषित कर दिया तो मामला गड़बड़ाने लगा. इसी बीच मुकुल के बेटे शुभ्रांशु रॉय ने एक फ़ेसबुक पोस्ट किया. शुभ्रांशु पहले TMC से विधायक रह चुके हैं. वह हाल ही में हुए विधान सभा चुनावों में बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर इलेक्शन लड़े, लेकिन हार गए. उन्होंने अपने फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा,

“हमेशा एक चुनी हुई सरकार की आलोचना करने से ज़्यादा, आत्मालोचना करना भी ज़रूरी है.”

इसके बाद लोग उनकी और उनके पिता मुकुल रॉय की TMC वापसी के क़यास लगाने लगे.

कुछ दिन पहले मुकुल रॉय की पत्नी बीमार थीं. उनका इलाज़ चल रहा था. सबको चौंकाते हुए उनसे मुलाक़ात करने सीएम ममता बनर्जी और उनके भतीजे TMC नेता अभिषेक बनर्जी पहुंच गए. इसके बाद ही राजनीतिक गलियारों में उनकी घर-वापसी की बातें तेज हो गईं. ममता बनर्जी के बाद PM मोदी ने भी मुकुल रॉय को फोन करके उनकी पत्नी का हाल चाल पूछा. प्रदेश में बीजेपी के बड़े नेता दिलीप घोष भी उनसे मिलने गए.

ममता के खास रहे हैं मुकुल रॉय?

मुकुल रॉय पहले भी ममता बनर्जी के खासमखास रहे हैं. यूथ कांग्रेस के समय से ही ममता के करीबी रहे मुकुल तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं. वह 2006 से 2017 तक TMC की तरफ़ से राज्यसभा सदस्य रहे. केंद्र की यूपीए-2 सरकार में रेल मंत्री भी रहे. लेकिन 2015 में शारदा चिट फंड मामले में ममता बनर्जी के साथ नाम आने के बाद मुकुल और ममता के रिश्ते खटास आ गई. रिश्ते इतने बिगड़े कि 2017 आते-आते मुकुल को तृणमूल से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया. 25 सितंबर 2017 को उन्होंने TMC से इस्तीफा दे दिया. कुछ दिन बाद ही उनकी BJP नेताओं से करीबी दिखने लगी. हालांकि आधिकारिक तौर उन्होंने 3 नवंबर 2017 को BJP जॉइन की.

वो केस, जिनमें मुकुल रॉय का नाम आया

9 फरवरी 2019 को कृष्णगंज विधानसभा क्षेत्र से TMC विधायक सत्यजीत बिस्वास की हत्या हो गई थी. 41 वर्षीय बिस्वास जब अपने क्षेत्र में सरस्वती पूजा कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे, तब उन्हें पॉइंट ब्लैंक यानी बिल्कुल सामने से गोली मारी गई थी. दिसंबर 2020 में पश्चिम बंगाल CID ने BJP के तत्कालीन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल रॉय का नाम एडिशनल चार्जशीट में शामिल कर लिया. चार्जशीट में CID ने मुकुल रॉय पर सत्यजीत बिस्वास की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया. मार्च 2020 में मुकुल रॉय से पूछताछ भी की. इस मामले में उन्हें कोलकाता हाईकोर्ट से अंतरिम ज़मानत मिला. उस वक्त मुकुल रॉय ने इसे लेकर ममता बनर्जी  चुनौती दे दी थी. मुकुल रॉय ने कहा था कि

ये एक साजिश है. मैं ममता बनर्जी को चुनौती देता हूं कि वो जनता के सामने आएं और मेरे ऊपर लगे आरोपों के बारे में बताएं. अगर जनता मानती है कि मैं ऐसे मामलों में शामिल हो सकता हूं तो मैं जेल जाने के लिए तैयार हूं

इसके अलावा, नारदा स्टिंग मामले में भी मुकुल रॉय का नाम आया. मार्च 2016 में विधानसभा चुनावों के ठीक पहले नारदा न्यूज़ के सीईओ मैथ्यू सैमुएल ने एक स्टिंग वीडियो जारी करके बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी थी. इस वीडियो में वे एक कंपनी के प्रतिनिधि के तौर पर तृणमूल कांग्रेस के सात सांसदों, तीन मंत्रियों और कोलकाता नगर निगम के मेयर शोभन चटर्जी को काम कराने के एवज़ में मोटी रकम देते नज़र आ रहे थे. विधायक मुकुल रॉय भी इस स्टिंग में शामिल थे. मामले में सीबीआई जांच बिठाई गई. सीबीआई की एफ़आईआर में सबसे प्रमुख आरोपी मुकुल रॉय थे.सीबीआई ने अप्रैल 2017 में यह मामला दर्ज किया था. कथित आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के लिए मंत्रियों सहित TMC के 12 नेताओं पर मामला दर्ज किया गया. हालांकि मुकुल रॉय के ख़िलाफ़ कार्रवाई के लिए सीबीआई ने अब तक आवेदन ही नहीं दिया है.


वीडियो – बंगाल: नारद स्टिंग ऑपरेशन में तृणमूल के नेता गिरफ्तार लेकिन BJP के सुवेंदु और मुकुल रॉय कैसे बच गए?

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